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Jharkhand Economic Survey: झारखंड में 5 साल तेजी से बढ़ी GSDP, जानें अर्थव्यवस्था की वृद्धि कब रही सबसे कम

2 Mar, 2023 8:24 am
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Jharkhand Economic Survey: झारखंड में 5 साल तेजी से बढ़ी GSDP, जानें अर्थव्यवस्था की वृद्धि कब रही सबसे कम

Jharkhand Economic Survey: झारखंड की अर्थव्यवस्था की रफ्तार कभी बहुत तेज रही, तो कभी बेहद धीमी. पहले 5 साल में झाड़-झंखाड़ वाले इस प्रदेश की जीएसडीपी 8 फीसदी की दर से बढ़ी, तो ऐसा भी एक साल आया, जब इसकी रफ्तार घटकर 1.6 फीसदी रह गयी. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

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Jharkhand Economic Survey: झारखंड सरकार 3 मार्च को विधानसभा में अपना बजट पेश करेगी. उस दिन राज्य के खजाने की स्थिति का पता सबको चलेगा. साथ ही सरकार राज्य को किस दिशा में ले जाना चाहती है, उसका भी रूटमैप सामने आ जायेगा. इससे पहले यह जान लेना चाहिए कि झारखंड की अर्थव्यवस्था (Economy of Jharkhand) अब तक किस रफ्तार से बढ़ी है. इसके लिए हमें पुराने आंकड़ों पर गौर करना होगा. आइए, हम देखते हैं कि वर्ष 2000-01 से लेकर अब तक झारखंड की जीडीपी की वृद्धि की रफ्तार क्या रही है.

5 साल तक 8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी जीएसडीपी

झारखंड गठन के बाद अगले पांच साल तक यानी वर्ष 2000 से वर्ष 2004-05 तक इसकी अर्थव्यवस्था यानी जीएसडीपी 8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी. लेकिन, इसके बाद के 8 साल यानी वर्ष 2004-05 से वर्ष 2011-12 तक अर्थव्यवस्था में वृद्धि की रफ्तार घटकर 6.6 फीसदी रह गयी और वर्ष 2011-12 से वर्ष 2018-19 के दौरान यह रफ्तार घटकर 6.2 फीसदी पर आ गयी.

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मंदी से नहीं बच पाया झारखंड

वर्ष 2019-20 और वर्ष 2020-21 में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में मंदी देखी गयी. भारत और झारखंड भी इससे अछूता नहीं रहा. भारत और झारखंड की अर्थव्यवस्था इस वर्ष 4 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी. इसके बाद वर्ष 2020-21 में कोरोना की मार झेलनी पड़ी, जिसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को एक तरह से ध्वस्त कर दिया. उत्पादक और उपभोक्ता के बीच की सप्लाई चेन बाधित हो गयी, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा.

झारखंड की अर्थव्यवस्था हुई 2.27 लाख करोड़ की

वर्ष 2011-12 में झारखंड की अर्थव्यवस्था 1,50,918 करोड़ रुपये की थी, जो वर्ष 2018-19 (वित्त वर्ष 2019-20) में बढ़कर 2,38,395 करोड़ रुपये की हो गयी. वित्त वर्ष 2020-21 में इसमें 11 हजार करोड़ की कमी आयी और राज्य की अर्थव्यवस्था 2,27,082 करोड़ की रह गयी.

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2013-14 में जीएसडीपी की रफ्तार सबसे कम 1.6 फीसदी

अगर झारखंड की अर्थव्यवस्था की बात करें, तो साल-दर-साल समान रूप से इसमें कभी वृद्धि नहीं हुई. राज्य की अर्थव्यवस्था में असमान वृद्धि होती रही है. वर्ष 2013-14 में जीडीपी की वृद्धि की रफ्तार 1.6 फीसदी रही, जबकि वर्ष 2014-15 में यह 12.5 फीसदी के शिखर पर पहुंच गयी. इसके बाद के तीन साल यानी वर्ष 2016-17 और वर्ष 2018-19 के बीच राज्य की अर्थव्यवस्था 6.2 फीसदी की दर से बढ़ी. इस दौरान वृद्धि दर सामान्य से ज्यादा भी रही और स्थिर भी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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