चंदा मामा के पास बना है अंतरिक्ष यात्रियों का घर, स्पेस वॉक के दौरान यहीं करते हैं एंजॉय

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 23 Nov 2023 4:21 PM

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आइएसएस काम करने और रहने के लिए कई हिस्सों में बंटा हुआ है. इसमें एक 360 डिग्री का दृश्य दिखाने वाली खिड़की, अंतरिक्षयात्रियों के सोने के लिए छह क्वार्टर और दो बाथरूम हैं. नासा के अनुसार, इसका माप लगभग 109 मीटर है यानी 357 फीट, जो एक अमेरिकी फुटबॉल फील्ड के बराबर है.

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International Space Station Completes 25 Years, Know Its History & Significance : क्या आप जानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी आईएसएस हर 24 घंटे में 16 बार हमारे सिर के ऊपर से होकर गुजरता है. यही नहीं, धरती से 439 किलोमीटर की ऊंचाई पर 16 सूर्योदय और सूर्यास्त देखना भी उसके रूटीन का हिस्सा है. इसकी मदद से ऐसी बहुत सारी खोजें हुई हैं, जो धरती पर जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं. यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, शांति, सहयोग और तकनीक के लिए दुनिया के सबसे सफल स्थानों में से एक है.

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन कब लॉन्च हुआ?

आइएसएस का पहला सेगमेंट जरया कंट्रोल मॉड्यूल रूसी था जो 20 नवंबर, 1998 को लॉन्च किया गया. जरया ने ईंधन स्टोरेज और बैटरी पावर पहुंचाई और आइएसएस पहुंचने वाले दूसरे अंतरिक्ष यानों के लिए डॉकिंग जोन की भूमिका निभायी. इसके लगभग 15 दिन बाद, 4 दिसंबर 1998 को अमेरिका ने यूनिटी नोड 1 मॉड्यूल लॉन्च किया. इन दोनों मॉड्यूल के जरिये स्पेस लैबोरेट्री ने काम करना शुरू किया. इसके बाद स्टेशन स्थापित करने के लिए 42 असेंबली फ्लाइट की मदद से, आइएसएस उस स्थिति में पहुंचा, जिसमें आज वह है.

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आइएसएस कितना बड़ा है?

आइएसएस काम करने और रहने के लिए कई हिस्सों में बंटा हुआ है. इसमें एक 360 डिग्री का दृश्य दिखाने वाली खिड़की, अंतरिक्षयात्रियों के सोने के लिए छह क्वार्टर और दो बाथरूम हैं. नासा के अनुसार, इसका माप लगभग 109 मीटर है यानी 357 फीट, जो एक अमेरिकी फुटबॉल फील्ड के बराबर है. इसका सोलर एरे विंगस्पैन भी 109 मीटर का है. कमर्शियल एयरक्राफ्ट से अगर इसकी तुलना करें, तो एयरबस ए380 का विंगस्पैन 79.8 मीटर है. इस स्पेस स्टेशन के अंदर लगभग 13 किलोमीटर लंबे इलेक्ट्रिकल तारों का जाल है.

स्टेशन पर क्या करते हैं एस्ट्रॉनॉट

दिनभर में आइएसएस धरती के कई चक्कर लगाता है. यह हर 90 मिनट पर, 8 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से चक्कर काटता है. जब अंतरिक्षयात्री किसी एक्सपेरिमेंट में नहीं लगे होते हैं, तब वह सामान्य स्पेसवॉक यानी अंतरिक्ष की सैर पर निकलते हैं ताकि स्टेशन में नयी चीजें जोड़ी जा सकें जैसे रख-रखाव या रोबोटिक हाथ. कई बार उन्हें अंतरिक्ष में पड़े मलबे की वजह से हुए छेदों का परीक्षण करके उन्हें ठीक भी करना पड़ता है. इसके अलावा, सेहत से जुड़ी कड़ी दिनचर्या का भी अंतरिक्षयात्री पालन करते हैं. उन्हें अपनी मांसपेशियों और हड्डियों को कमजोर होने से बचाना होता है, जिसकी वजह माइक्रोग्रैविटी या गुरुत्वाकर्षण की कमी है.

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आइएसएस पर खोज, धरती पर फायदा

अंतरिक्षयात्रियों ने आइएसएस पर सैकड़ों प्रयोग किये हैं. कई बार तो वे खुद पर भी एक्सपेरिमेंट करते हैं. जैसे अपनी सेहत मॉनीटर करना, खान-पान या फिर सोलर रेडिएशन के असर की पड़ताल. इसके साथ, वह धरती पर मौजूद वैज्ञानिकों के लिए भी प्रयोग करते हैं. इनमें बहुत सारी वैज्ञानिक सफलताएं मिली हैं. दिल की बीमारी हो या अल्जाइमर, पर्किंसन, कैंसर अथवा अस्थमा, इन सभी पर स्पेस में शोध हुआ है. वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ प्रयोग तो केवल अंतरिक्ष में ही बेहतर किये जा सकते हैं, क्योंकि माइक्रोग्रैविटी में कोशिकाएं वैसे ही काम करती हैं जैसे इंसान के शरीर में.

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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