हजारीबाग के इचाक में खपरैल की छत धंसने से मलवे में चार मासूम बच्चों समेत 5 लोग दबे

Hazaribagh News: पूरा परिवार खपरैल के मकान में सो रहा था. इसी दौरान अचानक खपरैल की छत धंसा गयी. घर में सो रहे मकान मालिक पंकज गिरी एवं उसके चार बच्चे मलबे में दब गये. घटना मंगलवार की 11 बजे रात घटी.
Hazaribagh News: हजारीबाग जिले के इचाक प्रखंड में हर दिन हो रही बारिश के कारण मंगुरा पंचायत के जमुआरी गांव में एक खपरैल के मकान की छत धंस गयी. चार मासूम बच्चों के साथ पंकज गिरि उसमें दब गये. घटना चार अक्टूबर की रात का है.
खपरैल के मकान में सो रहा था परिवार
बताया गया है कि पूरा परिवार खपरैल के मकान में सो रहा था. इसी दौरान अचानक खपरैल की छत धंस गयी. घर में सो रहे मकान मालिक पंकज गिरी एवं उसके चार बच्चे मलबे में दब गये. हादसा मंगलवार की 11 बजे रात हुआ.
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बाल-बाल बच गयी जुड़वा बच्चियां
हल्ला सुनकर पड़ोस के ग्रामीण जुटे एवं मलवे के नीचे से सभी लोगों को बाहर निकाला. खपरैल के मकान की लकड़ी और बांस गिरने से पंकज गिरी एवं दो बच्चे रियांश (2 वर्ष) एवं आलोक (12 वर्ष) घायल हो गये, जबकि दो जुड़वा बहनें रिद्धि एवं सिद्धि (6 वर्ष) बाल-बाल बच गयी.
पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया
सूचना पाकर देर रात इचाक पुलिस पहुंची. तीनों घायलों को सामुदायिक अस्पताल इचाक में भर्ती कराया गया. सूचना मिलते ही मांगुरा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि रामशरण जमुआरी गांव पहुंचे. यहां से अस्पताल गये और तीनों घायलों का इलाज करवाने के बाद घर पहुंचाया. अब तीनों की हालत ठीक है.
पंकज की पत्नी के चिल्लाने पर आये पड़ोसी
पंकज की पत्नी तेजनी देवी ने बताया कि हम शौच के लिए घर से बाहर निकले थे. उसी दौरान घर गिर गया. मैं चिल्लाने लगी, तो पड़ोस के लोग जुटे. इसके बाद बच्चों एवं मेरे पति को किसी तरह से मलवे से बाहर निकाला.
मुखिया ने की पीएम आवास दिलाने की मांग
इधर, मुखिया मीना देवी ने पंचायत भवन दूर होने के कारण परिवार के सदस्यों को स्कूल भवन में रहने की सलाह दी है. साथ ही पीड़ित परिवार एवं अन्य क्षतिग्रस्त मकानों में रह रहे सभी परिवारों को अविलंब प्रधानमंत्री आवास (PM Awas) दिलाने की मांग बीडीओ रिंकू कुमारी से की है.
जान जोखिम में डालकर क्षतिग्रस्त मकान में रहे लोग
उन्होंने कहा कि जमुआरी गांव के अधिकांश गिरी जाति के लोग गरीब हैं. इनकी स्थिति दयनीय है. कई लोगों का घर क्षतिग्रस्त है. वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने की वजह से सभी लोग जान जोखिम में डालकर क्षतिग्रस्त मकान में रहने के लिए मजबूर हैं.
रिपोर्ट- रामशरण शर्मा, इचाक, हजारीबाग
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By मिथिलेश झा
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