झारखंड: 15 लाख रुपये से चेकडैम बनने के बाद भी सिंचाई के लिए तरस रहे किसान, उम्मीदों पर फिरा पानी

Updated at : 27 Jun 2023 6:01 PM (IST)
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झारखंड: 15 लाख रुपये से चेकडैम बनने के बाद भी सिंचाई के लिए तरस रहे किसान, उम्मीदों पर फिरा पानी

नदी के पास डीजल पंप सुरक्षित रहे. इसके लिये एक रूम बनाया गया था. डीजल पंप रूम में वर्षों से ताला लटका हुआ है. रूम में रखे पंप के कई पार्ट-पूर्जे गायब हो गये. यह चेकडैम जिला सिंचाई योजना से बनाया गया था.

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केदला (रामगढ़), वकील चौहान: रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड अंतर्गत बसंतपुर पंचायत के पचंडा स्थित सतनदिया नदी में 15 लाख की लागत से बने चेकडैम का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है. बसंतपुर के किसान चेकडैम का लाभ करीब तेरह वर्षों से नहीं ले पा रहे हैं. पानी के अभाव में किसान खेती करने को तरस जा रहे हैं. बसंतपुर के दर्जनों किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन के अंदर से खेती के लिये पाइपलाइन गयी थी. हर आठ से दस एकड़ जमीन पर लोहे की पाइप निकाली गयी थी, ताकि किसानों को सिंचाई में परेशानी नहीं हो. चेकडैम चालू होने से बसंतपुर में खेती से खेत लहलहाते रहते.

लाखों की लागत से बना था चेकडैम

नदी के पास डीजल पंप सुरक्षित रहे. इसके लिये एक रूम बनाया गया था. डीजल पंप रूम में वर्षों से ताला लटका हुआ है. रूम में रखे पंप के कई पार्ट-पूर्जे गायब हो गये. यह चेकडैम जिला सिंचाई योजना से बनाया गया था. चेकडैम दिनों-दिन मिट्टी व बालू की रेत से समतल होता जा रहा है. कुछ वर्षों बाद यह मिट्टी के अंदर चला जाएगा. पंप रूम के अलावा नदी के पास कुछ नहीं दिखेगा. इस ओर किसान भी सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं. लाखों रुपये की लागत का बना चेकडैम ढूंढने से भी नहीं मिलेगा.

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पानी को देखकर सतनदिया नदी में बना था चेकडैम

हरली से होते हुये पहाड़ी के बीच से सतनदिया नदी बसंतपुर गांव होते हुये चुटूआ नदी में मिलती है. पहाड़ के बीच आने के कारण नदी में पानी का बहाव हमेशा होता था. क्षेत्र की नदी व तालाब सूख जाते थे, लेकिन यह नदी नहीं सुखती है. चेकडैम के पास गहरे कुएं का निर्माण कराया गया था, ताकि पानी हमेशा संचित रहे. किसानों को फसल उगाने में आसानी हो.

2010 में किसानों को हुई थी अच्छी खेती

सतनदिया नदी में 2010 में चेकडैम बनकर तैयार हो गया था. उस साल बसंतपुर के किसान ने चेकडैम के सहारे धान व सब्जी की खेती की थी. फसल में नियमित पानी देने से फसल में चार चांद लग गयी थी. इसके बाद से किसान बेहतर फसल देखने के लिये तरस गये.

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क्या कहते हैं बसंतपुर के किसान

इस संबंध में बसंतपुर के किसान किटू सिंह, अशोक महतो, वकील महतो, प्रयाग महतो, किशुन महतो, सहित आदि ने बताया कि बसंतपुर के अधिकतर लोग खेती पर निर्भर थे. खाने के लिये लागों को लाले पड़ जाते थे. पूर्व में किसान नदी, तालाब व कुआं के पानी से किसी तरह खोती कर लेते थे. किसान द्वारा काफी संघर्ष के बाद जिला सिंचाई योजना से चेकडैम बना था. इधर, कई सालों से पानी की गंभीर समस्या हो गयी है.

क्या कहती हैं मुखिया

इस संबंध में पंचायत की मुखिया सरिता देवी ने कहा कि चेकडैम की स्थिति की जांच की जाएगी और विभागीय अधिकारी से बात कर चेकडैम को ठीक कराने का प्रयास किया जायेगा, ताकि किसानों को खेती करने में आसानी हो.

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