Dombari Buru: बिरसा स्मारक स्थल के लिए बिसु मुंडा ने दे दी अपनी पुश्तैनी जमीन, नौकरी के लिए भटक रहे दर-दर

Updated:
विज्ञापन

डोंबारी बुरु में बिरसा स्मारक स्थल की देखरेख करने वाले बिसु मुंडा ने बताया कि 01 अगस्त 1990 को उनसे नौकरी देने का वादा करके स्मृति स्थल के लिए 80 डिसमिल जमीन ली गयी थी. 32 साल गुजर गये, लेकिन अब तक उन्हें या उनके परिवार वालों को सरकारी नौकरी नहीं मिली.

विज्ञापन

डोंबारी बुरु आज भी धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा और अंग्रेजों के बीच संघर्ष की कहानी बयां करता है. यहां पर बिरसा मुंडा की याद में स्मृति स्थल बनाया गया है. जहां पर उनकी बड़ी प्रतिमा और कार्यक्रम के लिए मंच तैयार किया गया है. यहां पर हमेशा मंत्री, विधायक और नेताओं का दौरा होते रहता है, लेकिन भगवान बिरसा की यादों को संजो कर रखने के लिए 80 डिसमिल जमीन देने वाने बिसु मुंडा को अब भी इंसाफ का इंतजार है. उन्हें बिना पैसे के दिनभर वहां की देखरेख करनी पड़ती है.

नौकरी देने का वादा कर लिया गया जमीन, 850 रुपये मिलता था मनदेय

डोंबारी बुरु में बिरसा स्मारक स्थल की देखरेख करने वाले बिसु मुंडा ने बताया कि 01 अगस्त 1990 को उनसे नौकरी देने का वादा करके स्मृति स्थल के लिए 80 डिसमिल जमीन ली गयी थी. 32 साल गुजर गये, लेकिन अब तक उन्हें या उनके परिवार वालों को सरकारी नौकरी नहीं मिली. जब वह अपनी कहानी बता रहे थे, उनकी बातों में दर्द साफ झलक रहा था. उन्होंने बताया, सितंबर 1997 तक मानदेय के रूप में 850 रुपये जिला परिषद से दिये गये. लेकिन उसके बाद उसे भी बंद कर दिया गया.

Also Read: Jharkhand Foundation Day:अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान का गवाह है डोंबारी बुरू

बिसु मुंडा के लिए परिवार का पेट पालना बड़ी चुनौती

बिसु मुंडा ने बताया, भगवान बिरसा की यादों को बचाये रखने के लिए दिनभर स्थल की देखरेख करते हैं. लेकिन पैसे नहीं मिलने से परिवार का पेट पालना मुश्किल हो गया है. कई बार उन्होंने अधिकारियों से इस बारे में बात भी की, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिला. परिवार का पेट पालने के लिए उन्हें खेतीबाड़ी के काम पर निर्भर रहना पड़ता है. लेकिन दिनभर स्मृति स्थल की देखरेख करने के कारण खेती करना भी मुश्किल हो जाता है. बिसु मुंडा ने कहा, डोंबारी पहाड़ में सौकड़ों की संख्या में लोग रोज घुमने के लिए आते हैं, देखरेख के अभाव में इस स्थान को नुकसान पहुंचने का डर है, इसलिए बिना पैसे के ही वह यहां अपना दिन गुजार दे रहे हैं.

बिसु मुंडा को किसी फरिश्ते का है इंतजार

डोंबारी बुरु में बने स्मृति स्थल की देखरेख करने वाले बिसु मुंडा को अब भी किसी फरिश्ते का इंतजार है. जो उन्हें उनका हक दिला सके. उन्होंने जिला परिषद से दी गयी चिट्ठी को भी दिखाया, जिसमें साफ-साफ लिखा गया है, श्री बिसु मुंडा को डुंबारी स्थित बिरसा भगवान की मूर्ति प्रतिस्थापन के बाद दिनांक 1.8.1990 से दैनिक मजदूरी पर रात्रि प्रहरी सह चौकीदार सह पहरेदार के पद पर अस्थायी तौर पर नियुक्त किया जाता है.

क्या है डोंबारी बुरु की कहानी

डोंबारी बुरु झारखंड की अस्मिता और संघर्ष का साक्षी है. यह स्थल बिरसा मुंडा और उनके अनुयायियों के बलिदान की कर्मभूमि है. इसी पहाड़ पर भगवान बिरसा मुंडा ने 9 जनवरी 1900 को अपने अनुयायियों के साथ बड़ी जनसभा की थी. जिसमें 400 से अधिक लोग जमा हुए थे. इस जनसभा की सूचना मिलने के बाद अंग्रेजों ने पूरे पहाड़ को घेर लिया और बिरसा व उनके अनुयायियों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी. इस गोलीकांड में सैकड़ों की संख्या में निर्दोश लोग मारे गये. कहा जाता है, अंग्रेजों की गोलीबारी से डोंबारी पहाड़ खून से लाल हो गया था. हालांकि भगवान बिरसा अंग्रेजों से बचकर निकल गये. बाद में उन्हें संकरी से गिरफ्तार किया गया और रांची जेल लाया गया. जहां 9 जून 1900 को उनकी मृत्यु हो गयी.

विज्ञापन
ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola