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CNG कार में LPG के इस्तेमाल से धधक उठेगी गाड़ी! माइलेज घटेगा और इंजन हो सकता है सीज

Updated at : 06 Feb 2024 9:36 AM (IST)
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CNG कार में LPG के इस्तेमाल से धधक उठेगी गाड़ी! माइलेज घटेगा और इंजन हो सकता है सीज

एलपीजी का पूरा नाम लिक्विड पेट्रोलियम गैस है. यह नेचुरल गैसों के साथ ही पेट्रोलियम उत्पादन के दौरान भी प्राप्त होती है. सीएनजी का पूरा नाम कंप्रेस्ड नेचुरल गैस है. इसमें मुख्य रूप से मिथेन गैस होती है, जो हाई प्रेशर में भी गैस के रूप में ही रहता है.

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LPG Use in CNG Car: देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह से लोग सीएनजी (कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस) वाली कारों को अधिक खरीद रहे हैं. बाजार में कुछ ऐसी ऑटोमैटिक हाइब्रिड कारें भी आ रही हैं, जो सीएनजी के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल या फिर इलेक्ट्रिक बैटरी से भी चलती हैं. लेकिन, कुछ लोग सीएनजी कार के खर्च को कम करने के लिए उसमें एलपीजी (लिक्विड पेट्रोलियम गैस) का भी इस्तेमाल करते हैं. क्या ऐसा करना सही है? सीएनजी कार में एलपीजी के इस्तेमाल से माइलेज बढ़ जाएगा? इसका इंजन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? एलपीजी से सीएनजी कार चलाने पर कोई खतरा तो नहीं है? आइए, इसके बारे में सबकुछ विस्तार से जानते हैं.

सीएनजी और एलपीजी में क्या है अंतर

सीएनजी से चलने वाली कार में एलपीजी के इस्तेमाल के बारे में जानने से पहले आपको इन दोनों गैसों के बीच का अंतर समझ लेना ज्यादा बेहतर होगा. जब आप इन दोनों के बीच का अंतर समझ लेंगे, तब आप यह भी जान जाएंगे कि सीएनजी कार में एलपीजी का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं?

एलपीजी : इसका पूरा नाम या फुलफॉर्म लिक्विड पेट्रोलियम गैस है. यह नेचुरल गैसों के साथ ही पेट्रोलियम उत्पादन के दौरान भी प्राप्त होती है. इसमें प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होता है, जो दबाव के कारण तरल रूप धारण कर लेता है है. एलपीजी का इस्तेमाल घरों में रसोई बनाने वाले ईंधन के तौर पर किया जाता है.

सीएनजी: इसका पूरा नाम या फुलफॉर्म कंप्रेस्ड नेचुरल गैस है. इसमें मुख्य रूप से मिथेन गैस होती है, जो हाई प्रेशर में भी गैस के रूप में ही रहता है. इस गैस का इस्तेमाल मुख्य रूप से गाड़ियों में ईंधन के तौर पर किया जाता है. यह पेट्रोल-डीजल के मुकाबले काफी सस्ता, स्वच्छ और कम प्रदूषण फैलाती है.

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क्या सीएनजी कार में एलपीजी का कर सकते हैं इस्तेमाल

सीएनजी कार में एलपीजी का इस्तेमाल करना कतई सही कदम नहीं हो सकता है. इसका कारण यह है कि सीएनजी और एलपीजी का रासायनिक मिश्रण अलग-अलग है. इन दोनों में किसी प्रकार की समानता नहीं है. इन दोनों का इस्तेमाल भी अलग-अलग है. एलपीजी का इस्तेमाल रसोई बनाने में किया जाता है. वहीं, कार चलाने के लिए सीएनजी का इस्तेमाल किया जाता है. इन दोनों गैसों का दबाव, तापमान, जलने का आनुपातिक तापमान और उर्जा के गुण अलग हैं. सीएनजी कारों के इंजन, फ्यूल टैंक, नली और नोजल कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस से चलने के लायक ही बनाए जाते हैं. इसमें एलपीजी के इस्तेमाल पर कई प्रकार के नुकसान हो सकते हैं.

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सीएनजी कार में एलपीजी के इस्तेमाल से लग सकती है आग

सीएनजी इंजन वाली कार में एलपीजी के इस्तेमाल से आपकी गाड़ी का माइलेज और परफॉर्मेंस घट जाएगा. इसका कारण यह है कि एलपीजी में कैलोरिफिक वैल्यू सीएनजी के मुकाबले काफी कम होती है. इसके अलावा, आपकी कार का इंजन सीज हो सकता है. इसका कारण यह है कि एलपीजी में सल्फर की मात्रा अधिक होती है, जो इंजन के कलपुर्जों को नुकसान पहुंचाता है और इंजन की लाइफ कम हो जाती है. सबसे बड़ी बात यह है कि सीएनजी कार में एलपीजी के इस्तेमाल से गाड़ी में आग लगने का खतरा अधिक रकता है. एलपीजी जल्दी लीक हो जाती है और आसानी से आग पकड़ लेती है. इसके अलावा, कार की वारंटी खत्म हो सकती है, क्योंकि कंपनियां सीएनजी इंजन वाली कारों को एलपीजी के लिए अनुमोदित नहीं करती हैं. अगर आप ऐसा करते हैं, तो आपको किसी भी प्रकार की सर्विस या रिपेयर की सुविधा नहीं मिलेगी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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