झारखंड के गांवों में पैसरा धान से खीर बनाने की परंपरा आज भी जारी, 8 नवंबर से महापर्व छठ की शुरुआत

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8 नवंबर से महापर्व छठ की शुरुआत हो रही है. झारखंड के गांवों में भी इस पर्व को लेकर काफी उत्साह देखा जाता है. गांवों में पैसरा धान से खीर बनाने की परंपरा आज भी है. छठ पर्व को लेकर छठव्रतियों की तैयारी पूरी हो गयी है.

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Chhath Puja 2021 (संजय सागर, बड़कागांव, हजारीबाग) : छठ महापर्व की तैयारी झारखंड के गांव- देहातों में पूरी कर ली गयी है. यह महापर्व देश के अन्य पर्वों से अलग है. महापर्व को लेकर गांव से लेकर छठ घाटों तक साफ- सफाई की जाती है. बच्चों से लेकर बड़ों के बीच हर्षोउल्लास भरा रहता है. वहीं, महिलाएं भी भक्ति में तल्लीन रहती हैं.

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यह महापर्व भगवान सूर्य के महत्व को दर्शाता है. भगवान सूर्य एवं मानव जीवन के बीच सदियों से गहरा ताल्लुक रहा है. इसीलिए छठ महापर्व में उगते हुए सूर्य एवं डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. छठ महापर्व को लेकर झारखंड सरकार के शर्तों के साथ मिली छूट के बाद तालाबों की साफ- सफाई तेज हो गयी.

छठव्रतियों का मानना है कि छठी मईया जब साथ में है, तो कोरोना जैसी बीमारी भी दूर हो जायेगी. छठ पूजा को लेकर वर्तियों ने लाल गेहूं को सुखायी है. वहीं, धान के खेतों से पैसरा धान को अपने- अपने घरों में लाये गये है. मान्यता है कि इस धान के चावल व गुड़ से छठ पूजा में खीर बनायी जाती है. इससे छठ माता ज्यादा खुश होती हैं.

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छठ पर्व की शुरुआत नहाए खाए से शुरू हो जायेगी. 8 नवंबर को नहाए खाए है. वहीं, 9 नवंबर को खरना या लोहंडा होगा. इस दिन बेहद ही स्वादिष्ट गन्ने की रस की खीर बनायी जाती है. इसके बाद छठी मइया को खीर को भोग लगाने के बाद इस प्रसाद को लोगों के बीच वितरण किया जाता है. 10 नवंबर को संध्या समय में डूबते सूर्य को अर्घ्य और 11 नवंबर को सुबह में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जायेगा. इसके साथ ही महापर्व छठ का समापन भी जायेगा.

कौन हैं छठी मइया

कार्तिक मास की षष्टी को छठ मनायी जाती है. मान्यता है कि छठ पूजा के दौरान पूजी जाने वाली यह माता सूर्य भगवान की बहन है. इसीलिए लोग सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मइया को प्रसन्न करते हैं. वहीं, पुराणों में मां दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी देवी को भी छठ माता का ही रूप माना जाता है. छठ मइया को संतान देने वाली माता के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि छठ पर्व संतान के लिए मनाया जाता है. खासकर वो जोड़े जिन्हें संतान का प्राप्ति नहीं हुई. वो छठ का व्रत रखते हैं, बाकि सभी अपने बच्चों की सुख-शांति के लिए छठ मनाते हैं.

सूर्य को अर्घ्य देने का वैज्ञानिक कारण

करणपुरा कॉलेज के सुरेश महतो का कहना है कि छठ पूजा में अर्घ्य देने का वैज्ञानिक महत्व यह बात सभी को मालूम है कि सूरज की किरणों से शरीर को विटामिन डी मिलती है और उगते सूर्य की किरणों के फायदेमंद और कुछ भी नहीं. इसीलिए सदियों से सूर्य नमस्कार को बहुत लाभकारी बताया गया. वहीं, प्रिज्म के सिद्धांत के मुताबिक सुबह की सूरज की रोशनी से मिलने वाले विटामिन डी से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और स्किन से जुड़ी सभी परेशानियां खत्म हो जाती है.

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Posted By : Samir Ranjan.

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