ASCI Report: डिजिटल मीडिया के विज्ञापनों को लेकर आ रहीं सबसे ज्यादा शिकायतें, जानें पूरी बात
Published by : Rajeev Kumar Updated At : 23 Nov 2023 10:24 AM
ASCI Report - स्वास्थ्य क्षेत्र के बाद शिक्षा और व्यक्तिगत देखभाल क्षेत्र का स्थान रहा. इनका योगदान 18-18 प्रतिशत रहा. वहीं गेमिंग क्षेत्र का योगदान 15 प्रतिशत रहा. परिषद ने तीन चौथाई शिकायतें स्वत: संज्ञान आधार पर ली. वहीं, उपभोक्ताओं ने 21 प्रतिशत से अधिक मामलों में शिकायतें की.
ASCI Report : डिजिटल मीडिया पर प्रसारित विज्ञापनों को लेकर शिकायतें बढ़ी हैं. चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-सितंबर के दौरान डिजिटल मीडिया पर आपत्तिजनक विज्ञापनों की हिस्सेदारी सर्वाधिक रही.
भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) ने कहा कि उसने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान 3,501 विज्ञापनों की जांच की है और शिकायतों की संख्या 4,491 रही. यह सालाना आधार पर क्रमशः 27 प्रतिशत और 34 प्रतिशत अधिक है.
Also Read: PhonePe, Google Pay, Paytm UPI आईडी हो जाएगी बंद; जानें वजह
रिपोर्ट में कहा गया है कि एएससीआई जिन विज्ञापनों का प्रसंसकरण किया, उसमें इनफ्लूएंसर मामलों का योगदान 22 प्रतिशत था. इसमें कहा गया है कि गैर-अनुपालन वाले मामलों की सूची में अभिनेता अमिताभ बच्चन भी शामिल थे. उन्होंने आठ मामलों में नियमों का उल्लंघन किया था.
पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, एएससीआई ने कहा कि क्षेत्रवार देखा जाए, तो स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में सबसे ज्यादा नियमों का उल्लंघन हुआ है. परिषद ने जिन शिकायतों को निपटान किया, उसमें इस क्षेत्र का योगदान 21 प्रतिशत था.
Also Read: ALERT: आपके हर सर्च पर नजर रखता है Google, हिस्ट्री को ऐसे करें क्लीन
स्वास्थ्य क्षेत्र के बाद शिक्षा और व्यक्तिगत देखभाल क्षेत्र का स्थान रहा. इनका योगदान 18-18 प्रतिशत रहा. वहीं गेमिंग क्षेत्र का योगदान 15 प्रतिशत रहा. परिषद ने तीन चौथाई शिकायतें स्वत: संज्ञान आधार पर ली. वहीं, उपभोक्ताओं ने 21 प्रतिशत से अधिक मामलों में शिकायतें की.
ASCI रिपोर्ट के कुछ प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं –
डिजिटल प्रभुत्व : 79% समस्याग्रस्त विज्ञापन ऑनलाइन पाए गए, जो डिजिटल विज्ञापन जगत में चुनौतियों को उजागर करते हैं.
नियामक सतर्कता : एएससीआई के केंद्रित निगरानी तंत्र ने माध्यम में आपत्तिजनक सामग्री से निपटने के लिए डिजिटल निगरानी को बढ़ावा दिया. संसाधित कुल विज्ञापनों में से 98% को किसी न किसी रूप में संशोधन की आवश्यकता होती है.
स्वैच्छिक अनुपालन : डिजिटल विज्ञापन क्षेत्र में, एएससीआई में शिकायत किये गए कुल विज्ञापनों में प्रभावशाली लोगों का योगदान 22% था. प्रभावशाली दिशानिर्देशों के लिए संसाधित किये गए 99.4% विज्ञापन उल्लंघन में पाए गए. एएससीआई को पिछले वर्षों में 86% की तुलना में 92% प्रभावशाली मामलों में अपनी सिफारिशों का अनुपालन प्राप्त हुआ, जो एएससीआई की सीसीसी सिफारिशों के अधिक अनुपालन का संकेत देता है.
सुर्खियों में हेल्थकेयर : हेल्थकेयर सबसे अधिक उल्लंघनकारी क्षेत्र के रूप में उभरा, संसाधित सभी विज्ञापनों में से 21% का योगदान रहा. इस उछाल का कारण डिजिटल प्लैटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में दवा और दवा के विज्ञापन हैं.
कानूनी उल्लंघन : एएससीआई ने ड्रग एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट 1954 का सीधे तौर पर उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी, जिसके कारण विज्ञापनदाताओं को विज्ञापन वापस लेने या उसमें संशोधन करने की सलाह देने वाली सूचनाएं जारी की गईं. एएससीआई ने केवल छह महीनों में आयुष मंत्रालय को 565 विज्ञापन भेजे, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में 464 विज्ञापन भेजे गए थे.
एएससीआई की सीईओ और महासचिव मनीषा कपूर ने कहा, एएससीआई डिजिटल विज्ञापन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है. उपभोक्ताओं की ऑनलाइन सुरक्षा के मुद्दे से निपटने के लिए सभी हितधारकों को एक साथ आने की जरूरत है, क्योंकि वे वहां काफी समय बिताते हैं और जहां आपत्तिजनक विज्ञापनों का प्रसार होता है. ऑनलाइन स्थान पर हमारी निरंतर निगरानी उन विज्ञापनों और ब्रांडों को बाहर करने में मदद करती है जो एएससीआई कोड का उल्लंघन करते हैं, जिसके लिए विज्ञापनों को सच्चा, सभ्य और सुरक्षित होना आवश्यक है. हमें उम्मीद है कि विभिन्न क्षेत्र उल्लंघनों को पहचानेंगे और अधिक जिम्मेदार विज्ञापन के लिए प्रतिबद्ध होंगे.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Rajeev Kumar
राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










