अमृत सरोवर योजना : धनबाद में लक्ष्य से अधिक हो रहा निर्माण, पर हकीकत कुछ और है, पढ़ें पूरी खबर
Published by : Samir Ranjan Updated At : 07 Aug 2023 5:01 PM
अमृत सरोवर योजना का हाल धनबाद में बेहाल है. कागज पर पूर्ण दिखाया गया है, लेकिन हकीकत कुछ और है. आलम देखिये कि जिले में 90 फीसदी सरोवरों का निर्माण कागज पर पूर्ण दिखाया गया है, लेकिन वास्तव में कई अपूर्ण है. इस योजना के तहत राज्य के प्रत्येक जिले में 75 सरोवर का निर्माण का लक्ष्य है.
धनबाद, संजीव झा, संजय रवानी, रंजीत सिंह, चंद्रशेखर व अरिंदम : अमृत महोत्सव के तहत धनबाद जिले में लक्ष्य से अधिक अमृत सरोवर का निर्माण चल रहा है. कई स्थानों पर निर्माण प्राक्कलन के अनुसार नहीं हो रहा है. कागज पर अब तक 90 फीसदी सरोवरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जबकि हकीकत में ऐसे कई पूर्ण सरोवर वास्तव में अपूर्ण है. शेष काम 15 सितंबर तक पूरा कराने को कहा गया है. 27 सरोवरों पर डीएमएफटी से सीढ़ी निर्माण व महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम बनाये जा रहे हैं.
धनबाद जिले में अमृत सरोवर का जानें हाल
27 सरोवरों पर बनाये जा रहे हैं चेजिंग रूम, सीढ़ियां भी हो रहीं तैयार
कुछ तालाब में होने लगा कटाव
लक्ष्य से अधिक सरोवर का हुआ चयन
एक से पांच एकड़ भूमि पर बने हैं सभी
स्वतंत्रता दिवस पर 75 अमृत सरोवरों पर एक साथ होगा झंडोत्तोलन
केंद्र सरकार ने आजादी के अमृत महोत्सव पर सभी राजस्व जिलों में अमृत सरोवर बनाने की घोषणा की थी. धनबाद जिला में भी लक्ष्य 75 के विरुद्ध कुल 82 अमृत सरोवर योजनाएं ली गयीं. 31 जुलाई तक धनबाद जिला के अलग-अलग प्रखंडों में 77 अमृत सरोवरों का निर्माण पूरा हो चुका है. शेष पांच का निर्माण चल रहा है. जिन सरोवरों का निर्माण पूरा हो चुका है, वहां स्वतंत्रता दिवस पर झंडोत्तोलन को लेकर जिला ग्रामीण विकास विभाग की ओर से गाइडलाइन जारी की गयी है.
एक सरोवर निर्माण पर 18 से 21 लाख रुपये तक हो रहे खर्च
अमृत सरोवर का निर्माण मनरेगा के तहत कराया जा रहा है. इनका निर्माण भूमि संरक्षण विभाग, लघु सिंचाई, मत्स्य, एनएचएआइ, डब्ल्यूडीसी जैसी एजेंसियां करा रही हैं. एक-एक सरोवर के निर्माण पर 18 से 21 लाख रुपये तक खर्च किये जा रहे हैं. सरोवर की खुदाई मनरेगा से हुई है. वहीं उनमें सीढ़ी, चेजिंग रूम का निर्माण डीएमएफटी से कराया जा रहा है. अमृत सरोवर का क्षेत्रफल एक से पांच एकड़ तक है. न्यूनतम 10 हजार क्यूबिक मीटर खुदाई की जानी है.
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धनबाद प्रखंड अंतर्गत 12 पंचायतों में से सभी पंचायतों में एक-एक अमृत सरोवर के तहत तालाब खुदवाने की योजना स्वीकृत हुई है. लेकिन अब तक सिर्फ एक पंचायत सियालगुदरी में लघु सिंचाई विभाग धनबाद प्रमंडल अंतर्गत अमृत सरोवर के तहत 20 लाख 55 हजार की लागत से तालाब की खुदाई के साथ दो चेंजिंग रूम व सीढ़ी भी बनी है. जबकि बरडुभी पंचायत में स्वीकृत अमृत सरोवर ( तालाब ) का शिलान्यास के बाद जमीन विवाद के कारण तालाब खुदाई का काम स्थगित है. 19 लाख की लागत से बनने वाले इस तालाब का शिलान्यास 12 मार्च 2023 को धनबाद विधायक राज सिन्हा ने स्थानीय मुखिया मनोज कुमार सिंह समेत जिप सदस्य कुमारी रूपा, पंचायत समिति सदस्य रेणुका देवी के उपस्थिति में किया था.
बाघमारा प्रखंड : तीन तालाबों की सीढ़ी का होने लगा कटाव
बाघमारा प्रखंड की तीन पंचायतों में अमृत सरोवर का निर्माण भूमि संरक्षण विभाग द्वारा कराया गया है. इसमे हरिणा, फुलवारीटांड़ व भीमकनाली पंचायत है. हरिणा पंचायत के हरिणा में 2.11 लाख, भीमकनाली में 1.41 लाख व फुलवारीटांड़ में सबसे ज्यादा 4.92 लाख रुपये खर्च कर बनायी गयी है. हरिणा बस्ती में बने तालाब में मिट्टी को काट कर ही सीढ़ी का रूप दिया गया है. इस वजह से बरसात के पानी से मिट्टी बह कर तालाब को भर रही है. किसी तरह का कोई पक्का काम फिलहाल अभी तक नहीं किया गया है. इस मामले में बीपीओ लक्ष्मी प्रसाद सिंह ने बताया कि प्रखंड मुख्यालय को निर्देश मिला है कि इन सरोवरो में 15 अगस्त को झंडोत्तोलन किया जाना है. झंडोत्तोलन प्लेटफाॅर्म बनाने का निर्णय लिया गया है.
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निरसा विधानसभा क्षेत्र में 19 अमृत सरोवर तालाब का निर्माण कार्य पूर्ण करने का दावा विभाग कर रहा है. गाभला, बेलकूपा, बिल्ली, लखियाबाद, बेनागड़िया में दो-दो, आंकद्वारा के बलाईचक, डुमरिया, लखीपुर, सिजुआ, हीड़बांध, सारसा व मदनडी में एक-एक तालाब का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है. इन तालाबों का निर्माण 10-15 लाख रुपये के बीच में किया गया है. तालाबों का निर्माण डीएमएफटी, भूमि संरक्षण विभाग एवं झारखंड स्टेट वाटर शेड मिशन के तहत किया गया है.
बेलकूपा में केवल ट्रेंच कटिंग पर कर दिया 15 लाख खर्च
निरसा प्रखंड की बेलकूपा पंचायत में अमृत सरोवर के तहत तालाब का निर्माण झारखंड स्टेट वाटर शेड मिशन के माध्यम से हुआ है. प्राक्कलन राशि 15 लाख रुपये है. विभाग की सूची में तालाब को भी पूर्ण दिखाया गया है. इसका क्षेत्रफल 200 वाई 200 एवं 10 फीट है. तालाब को चारों ओर ट्रेंच कटिंग कर ही छोड़ दिया गया है. इसकी खुदाई नगण्य के बराबर हुई है. यहां सीढ़ी एवं चेंजिंग रूम का निर्माण नहीं किया गया है.
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बेनागड़िया में अमृत सरोवर का निर्माण करवाया गया है. प्राक्कलित राशि 11 लाख 91 हजार 900 रुपये है. इसकी दोनों तरफ से सीढ़ी का निर्माण तो करवाया गया है, लेकिन चेंजिंग रूम नहीं बना है. ग्रामीणों ने कहा कि जिस क्षेत्रफल से इसकी खुदाई होनी चाहिए थी, वैसी खुदाई नहीं हुई है. मदनडीह तालाब की भी यही स्थिति है.
टुंडी प्रखंड की 17 पंचायतों में सिर्फ विशुनपुर में अमृत सरोवर
टुंडी प्रखंड की मछियारा पंचायत अंतर्गत विशुनपुर में एक अमृत सरोवर का निर्माण डीएमएफटी मद से लघु सिंचाई विभाग धनबाद द्वारा कराया गया है. यहां सीढ़ी और चेंजिंग रूम भी है. तालाब का आकार 200 बाय 300 फीट है. इसका प्राक्कलन लगभग 24 लाख रुपये है.
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अधिक गर्मी होने पर जल का अभाव ना हो और जिले में पानी की समस्या दूर हो, इसको ध्यान में रखकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा 24 अप्रैल, 2022 को अमृत सरोवर योजना की शुरुआत की. इस योजना के तहत राज्य के सभी जिलों में 75 तालाब का निर्माण करने का लक्ष्य है. इस योजना की सहायता से ऐसे स्थान पर तालाब बनेंगे जहां सतही और भूमिगत जमीन होगी. ऐसी जगह पर जल को बढ़ाने में सहायता मिलती है. इसका उद्देश्य से भूमिगत जगह पर जल की पूर्ति करना है. इसके तहत किसानों को सिंचाई के जल की पूर्ति होगी.
कैसे होगा जल संरक्षण
योजना के अंतर्गत बड़े गहरे नए तालाब बनाये जायेंगे और पुराने तालाबों को पुनर्जीवित किया जायेगा. इन तालाबों से ही छोटे छोटे नाले निकले जायेंगे जो बारिश का पानी एकत्रित होने पर खेतो की सिचाई के कार्य में कारगर होगा.
इस योजना से निम्नलिखित लाभ होंगे :
खेतो की सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी.
पानी की बर्बादी कम होगी.
जल संरक्षण होगा.
मछली पालन को बढ़ावा मिलेगा.
पर्यावरण को स्वच्छ रखा जा सकेगा.
यह योजना एक महत्वपूर्ण पहल है जो जल संकट को दूर करने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करेगी.
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अमृत सरोवर योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य देश में 75,000 तालाबों का निर्माण करना है. यह योजना स्वतंत्रता के 75वें अमृत महोत्सव के अवसर पर शुरू की गई है.
अमृत सरोवर योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं :
योजना के तहत देश के सभी राज्यों के सभी जिलों में तालाबों का निर्माण किया जाएगा.
तालाबों का निर्माण स्थानीय जलवायु और भूजल स्तर के अनुसार किया जाएगा.
तालाबों को नीम, बरगद और पीपल जैसे पेड़ों से घिरा जाएगा.
तालाबों का उपयोग सिंचाई, मत्स्य पालन, जल पर्यटन और अन्य उद्देश्यों के लिए किया जाएगा.
तालाबों को सामाजिक सभा स्थल के रूप में भी विकसित किया जाएगा.
अमृत सरोवर योजना से भारत को निम्नलिखित लाभ होंगे :
जल संरक्षण में वृद्धि होगी.
भूजल स्तर में सुधार होगा.
सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी.
मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा.
जल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.
ग्रामीण क्षेत्रों में विकास होगा.
सामाजिक समरसता बढ़ेगी.
अमृत सरोवर योजना भारत के लिए एक ऐतिहासिक योजना है, जो देश को जल संरक्षण और विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी.
अमृत सरोवर योजना के लाभ
जल संरक्षण : अमृत सरोवर योजना के तहत बनाए जाने वाले तालाबों से पानी का संरक्षण होगा और भूजल स्तर को बढ़ावा मिलेगा.
पर्यटन को बढ़ावा : अमृत सरोवर योजना के तहत बनाए जाने वाले तालाब पर्यटन को बढ़ावा देंगे और लोगों को प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेने का अवसर प्रदान करेंगे.
खेती को बढ़ावा : अमृत सरोवर योजना के तहत बनाए जाने वाले तालाब खेती को बढ़ावा देंगे और किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराएँगे.
जलजीवन को बढ़ावा : अमृत सरोवर योजना के तहत बनाए जाने वाले तालाब जलजीवन को बढ़ावा देंगे और मछली, पक्षी और अन्य जलीय जीवों को आवास प्रदान करेंगे.
स्वच्छता : अमृत सरोवर योजना के तहत बनाए जाने वाले तालाब स्वच्छता को बढ़ावा देंगे और लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएँगे.
रोजगार : अमृत सरोवर योजना के तहत बनाए जाने वाले तालाबों के निर्माण और रखरखाव में लोगों को रोजगार मिलेगा.
अमृत सरोवर योजना एक महत्वपूर्ण पहल है जो भारत को जल संकट से निपटने और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद करेगी.
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लेखक के बारे में
By Samir Ranjan
Senior Journalist with more than 20 years of reporting and desk work experience in print, tv and digital media
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