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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुख्य गेट को छात्रों ने किया बंद, पुलिस प्रशासन पर लगाया यह आरोप

Updated at : 10 Dec 2021 8:20 PM (IST)
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुख्य गेट को छात्रों ने किया बंद, पुलिस प्रशासन पर लगाया यह आरोप

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आमरण अनशन पर बैठे छात्रों में अब तक 30 की हालत बिगड़ चुकी है. सभी को अस्पताल मे भर्ती कराया गया है. वहीं, अनशन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट को बंद कर दिया है. प्रोफेसर और कर्मचारी अंदर हैं.

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Prayagraj News: इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा नियम विरुद्ध हॉस्टल में प्रवेश करने वाले छात्रों पर लगाए गए शुल्क के विरोध में छात्रों का तीसरे दिन भी आमरण अनशन जारी रहा. दूसरे दिन जहां छह छात्रों की आमरण अनशन के दौरान तबियत बिगड़ी थी. वहीं, तीसरे दिन अब तक कुल 30 छात्रों की तबियत बिगड़ चुकी है. सभी छात्रों को अस्पताल ले जाया गया है.

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लाइब्रेरी के सामने अनशन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी गेट और केपीयूसी के सामने के गेट को बांधकर बंद कर दिया है. खबर लिखे जाने तक विश्वविद्यालय के तमाम प्रोफेसर और कर्मचारी अभी विश्वविद्यालय के अंदर ही मौजूद हैं. रक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस भी तैनात की गई है.

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आमरण अनशन कर रहे छात्रों का कहना है कि लॉकडाउन के समय विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों से हॉस्टल खाली करा लिए थे और सभी छात्रों को उनके घर भिजवा दिया गया था. लॉकडाउन खुला तो छात्र वापस लौटे और विश्वविद्यालय प्रशासन से हॉस्टल अलॉट करने का अनुरोध किया लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया ना मिलने से छात्र हॉस्टल में रहने लगे. विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों से हॉस्टल की फीस के बाबत ₹13,500 लिए जाते थे, जिसकी तुलना में अभी लगाया गया अर्थदंड काफी ज्यादा है. लॉकडाउन की मार झेल रहे परिजन और छात्र इसे कैसे भरेंगे जबकि देश के तमाम विश्वविद्यालय ने कोविड काल के समय की फीस को माफ कर दिया है.

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अनशन कर रहे छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रों से हॉस्टल का पुराना निर्धारित शुल्क ही लिया जाए. वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह अर्थदंड नहीं यूजर चार्ज है, जो छात्रों पर लगाया गया है. इस संबंध में एक दिन पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मीडिया को बताया था कि कोविड काल में काफी छात्रों ने हॉस्टल खाली नहीं किया था. इन छात्रों से विश्वविद्यालय प्रशासन ने 15-15 हजार रुपये बतौर शुल्क लेने का आदेश दिया है जिसके विरोध में छात्रों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है.

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उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय छात्रों से किसी प्रकार का अर्थदंड नहीं ले रहा है. बल्कि, उनसे यूजर चार्ज लिया जा रहा है. इस चार्ज को भी विश्वविद्यालय ने तीन कैटेगरी में बांटा है. प्रथम कैटेगरी में आने वाले छात्रों को पांच हजार, दूसरी कैटेगरी में आने वाले छात्रों को 10 हजार और तीसरी कैटेगरी में आने वाले छात्रों को पन्द्रह हजार देना होगा. विश्वविद्यालय के मुताबिक, 1097 छात्रों को यूजर चार्ज देना है.

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आमरण अनशन कर रहे छात्रों ने prabhatkhabar.com को बताया कि आज शाम को अनशन स्थल पर कुछ पुलिस अधिकारी आए हुए थे. उन्होंने अनशन खत्म कराने का दबाव बनाते हुए कहा यदि अनशन खत्म नहीं किया तो उन्हें फर्जी मुकदमों में इस तरह फंसाया जाएगा कि वे विश्वविद्यालय का चक्कर छोड़ कचहरी का चक्कर काटेंगे और पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता भी नहीं मिलेगा.

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जानकारी के मुताबिक, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी गेट के सामने आमरण अनशन पर बैठे छात्रों में से अभी तक 30 छात्रों की तबियत बिगड़ चुकी है. जिन्हें इलाज के लिए हॉस्पिटल भेजा गया है. जिन छात्रों की तबियत बिगड़ी है उनमें संजीव कुमार, विश्वजीत, शिवप्रताप बाजपेई, आनंद मिश्रा, अनूप सिंह, अभिषेक सिंह, विजय सेन, गौरव पटेल, अभय कुमार, संतोष यादव, अभिषेक यादव, दीपक कनौजिया, विकास यादव, अमर सिंह, प्रफुल्ल, शशि प्रकाश, अमित कुमार, अंकित, आकाश, अवधेश, राहुल, प्रदीप पाल, आदि शामिल है. छात्रों का कहना है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगें नहीं मान लेता तब तक वह आमरण अनशन पर डटे रहेंगे.

(रिपोर्ट- एस के इलाहाबादी, गोरखपुर)

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