10.3 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

कीबोर्ड का सबसे बड़ा बटन क्यों है स्पेसबार? कइयों को नहीं पता इसके पीछे की वजह

Spacebar Key: लैपटॉप या कंप्यूटर कीबोर्ड पर स्पेसबार सबसे लंबी और सबसे आसानी से दिखने वाली की होती है. देखने में यह भले ही नॉर्मल डिजाइन लगे, लेकिन इसके बड़े साइज के पीछे कुछ वजहें हैं. क्या आपको पता है? अगर नहीं तो आइए आज जानते हैं.

Spacebar Key: अगर आप लैपटॉप, कंप्यूटर या स्मार्टफोन के कीबोर्ड पर टाइप करते हैं, तो आपने जरूर नोटिस किया होगा कि स्पेसबार बाकी सभी कीज (Keys) के मुकाबले सबसे लंबी और सबसे ज्यादा नजर आने वाली होती है. पहली नजर में यह बिल्कुल नॉर्मल लगती है, लेकिन इसके पीछे कई अहम वजहें होती हैं.

दरअसल, टाइप करते समय शब्दों के बीच स्पेस देना सबसे ज्यादा किया जाने वाला काम होता है और स्टडीज बताती हैं कि कीबोर्ड पर सबसे ज्यादा बार दबाई जाने वाली की (key) स्पेसबार ही होती है. यही वजह है कि इसे बड़ा बनाया जाता है. इसके अलावा भी कुछ और कारण हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. आइए आपको इनके बारे में बताते हैं.

दोनों अंगूठों से आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है

दूसरी कीज (Keys) के मुकाबले स्पेसबार को इस तरह बनाया गया है कि इसे दोनों अंगूठों से दबाया जा सके. इसकी चौड़ाई ज्यादा होती है, ताकि दाएं और बाएं हाथ से टाइप करने वाले दोनों तरह के यूजर इसे आसानी से यूज कर सकें. क्योंकि अंगूठे आमतौर पर कीबोर्ड के निचले हिस्से के पास रहते हैं, इसलिए बड़ा स्पेसबार लंबे समय तक टाइप करते समय टाइपिंग को स्मूद बनाता है.

टाइपिंग की सटीकता बेहतर बनाता है

अगर स्पेसबार छोटा होता, तो खासकर फास्ट टाइप करने वालों से ज्यादा गलतियां होतीं. स्पेस छूट जाने पर लिखा हुआ टेक्स्ट पढ़ना मुश्किल हो जाता है और बार-बार सुधार करना पड़ता है. बड़ा स्पेसबार ऐसी गलतियों को कम करता है, जिससे टाइपिंग ज्यादा सही, आसान और फास्ट हो जाती है.

कीबोर्ड का बैलेंस और डिजाइन बनाए रखने में मदद करता है

स्पेसबार सिर्फ टाइप करने के लिए ही नहीं होता, बल्कि यह कीबोर्ड की मजबूती में भी अहम भूमिका निभाता है. यह कई सपोर्ट पॉइंट्स पर टिका होता है, जिससे अलग-अलग एंगल से दबाने पर भी की एक जैसी दबती है. इससे की (key) हिलती नहीं है और उसकी टिकाऊपन बढ़ता है, खासकर लैपटॉप में जहां कीज छोटी और पास-पास होती हैं.

टाइपराइटर में भी होते थे बड़े स्पेसबार

स्पेसबार का साइज बड़ा होने की वजह टाइपराइटर के जमाने से भी जुड़ी है. पुराने मैकेनिकल टाइपराइटर में अक्षरों के बीच खाली जगह देने के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ता था, इसलिए स्पेस देने वाली कुंजी को बड़ा बनाया गया, ताकि उसे आसानी से दबाया जा सके और शब्दों के बीच सही दूरी बन सके. बाद में जब कंप्यूटर कीबोर्ड आए, तो लोगों को नई व्यवस्था अपनाने में दिक्कत न हो, इसीलिए वही जाना-पहचाना डिजाइन काफी हद तक बनाए रखा गया.

यह भी पढ़ें: आधा भारत नहीं जानता कीबोर्ड में ‘F’ और ‘J’ बटन पर लकीरें क्यों होती हैं? जानेगा तो कहलाएगा प्रो

Ankit Anand
Ankit Anand
अंकित आनंद ने GGSIP यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन की है. वर्तमान में, वह प्रभात खबर.कॉम में टेक और वायरल सेक्शन की खबरें कवर करते हैं. प्रभात खबर में शामिल होने से पहले उन्होंने ZEE न्यूज़ में असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है. इन्हें लाइफस्टाइल, ट्रैवल, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स जैसे विषयों पर लिखने में रुचि है. इसके अलावा अंकित को नई चीजें सीखना, किताबे पढ़ना, फिल्में और क्रिकेट देखना पसंद है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel