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बच्चों को दें वर्चुअल टच का ज्ञान, नहीं तो हो जाएगा ये नुकसान

Virtual Touch: टेक्नोलॉजी में हो रहे बदलाव ने हमारे जीवन को अनेक सुविधाओं से लैस कराया है, लेकिन इसके साथ ही कई नए प्रकार के खतरे भी सामने आए हैं. इन्हीं खतरों में से एक है 'वर्चुअल टच'.

Virtual Touch: तकनीक ने विकास के साथ ही हमारे सामाजिक संपर्कों की दुनिया भी बदली है. आभासी माध्यमों(वर्चुअल मीडियम) के जरिये मेल-मिलाप ने एक ओर जहां लोगों का दायरा बढ़ा दिया है, वहीं कई नए खतरे भी सामने आए हैं. बच्चे भी बड़े पैमाने पर इसके शिकार हो रहे हैं. स्थिति यहां तक बिगड़ चुकी है कि दिल्ली हाईकोर्ट तक को कहना पड़ा है कि बच्चों को गुड टच, बैड टच के साथ ही वर्चुअल टच की भी समझाइश दें.

क्या है वर्चुअल टच?

‘वर्चुअल टच’ की चिंता सोशल मीडिया और ऑनलाइन सिक्योरिटी के खतरों से एक कदम आगे की है. इसमें कोई भी अजनबी इंटरनेट के माध्यम से बच्चों को उनके फेवरेट कैरेक्टर या फिर मनचाही चीजों का लोभ देकर अपनी ओर आकर्षित करता है. फिर नाबालिगों का विश्वास जीतकर अपनी जरूरतों के हिसाब से उसका इस्तेमाल करता है. यहां तक कि इसके माध्यम से बच्चे यौन उत्पीड़न के शिकार भी हो जाते हैं.

मेटावर्स की दुनिया में हो चुका है वर्चुअल गैंग रेप

यह घटना जनवरी माह में ब्रिटेन में घटी थी. इसमें वर्चुअल रियलिटी गेम के अंदर कथित बलात्कार की रिपोर्ट सामने आई थी. ब्रिटिश पुलिस की जांच में सामने आया था कि “मेटावर्स” की इस दुनिया में कोई शारीरिक क्षति न होने के बावजूद युवा लड़की को वास्तविक हमले के बराबर भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक आघात का अनुभव हुआ. यह घटना गेम के दौरान तब घटी जब पीड़ित वर्चुअल रियलिटी हेडसेट पहने थी.

बच्चों को कैसे समझाएं वर्चुअल टच

नाबालिगों को ऑनलाइन होने वाले गलत व्यवहार के बारे में समझाना ही वर्चुअल टच की असलियत को बताना है. हिंसक व्यवहार के चेतावनी संकेतों को पहचानना, प्राइवेसी सेटिंग्स और ऑनलाइन दायरे का महत्व भी इसके तहत शामिल है. इसका मकसद टेक्नोलॉजी और इंटरनेट के इस्तेमाल से होने वाले मानसिक और भावनात्मक नुकसान से बचाना है.

आईटी एक्सपर्ट विनीत कुमार प्रभात खबर से बात करते हुए बताते हैं कि वर्चुअल टच में इंसान सामने नहीं होता पर वर्चुअली दोस्ती करने की कोशिश करता है. पैरेंट्स को इस बात को समझने की जरूरत है कि अगर रियल वर्ल्ड में किसी के साथ कुछ गलत होता है तो हम सामने आकर मदद करते हैं. ठीक उसी प्रकार अगर किसी के साथ वर्चुअल वर्ल्ड में भी कोई घटना घट जाए तो उसका मजाक बनाने के बजाए मदद करनी चाहिए.

“वर्चुअल टच की शिक्षा आज के डिजिटल युग में बच्चों के लिए अत्यंत आवश्यक है. यह उन्हें न केवल सुरक्षित रखती है, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की दिशा में भी मदद करती है.”

विनीत कुमार, फाउंडर, साइबर पीस

सोशल मीडिया पर दोस्ती के बाद यौन उत्पीड़न

दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ दिनों पहले कमलेश देवी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि डिजिटल युग में बच्चों को वर्चुअल टच की जानकारी देना बेहद जरूरी है. इस महिला पर यौन उत्पीड़न में अपने बेटे की मदद करने का आरोप था. सोशल मीडिया पर दोस्ती के बाद 16 वर्षीय लड़की जब राजीव से मिलने गई तो लड़की को जबरन मध्य प्रदेश ले जाया गया. यह भी बात सामने आई कि लड़की को पैसे के बदले 45 वर्षीय व्यक्ति से शादी करने के लिए मजबूर किया गया था. किशोरी ने आरोप लगाया कि उसे कई पुरुषों की यौन संतुष्टि के लिए मजबूर किया जाता था.

” कभी भी किसी स्ट्रेंजर से वर्चुअल रिश्ता नहीं बनाना चाहिए. ये नाबालिगों का फायदा उठाने के लिए किसी हद तक जा सकते हैं. पैरेंट्स को भी अपने बच्चों को वर्चुअल टच का ज्ञान देना चाहिए.”

पवन कुमार बरनवाल, मनोचिकित्सक

बच्चों को मोबाइल से दूर रखना अच्छा समाधान

डीएवी गांधीनगर के प्राचार्य सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं कि बच्चों को मोबाइल की दुनिया से दूर रखना एक अच्छा समाधान हो सकता है. हमलोग बकायदा बच्चों की काउंसलिंग भी करते हैं. इसके अलावा झारखंड सरकार की टीम भी समय-समय पर विजिट करती रहती है, ताकि बच्चों को वर्चु्अल दुनिया के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जा सके. मोबाइल के प्ले फील्ड से बाहर निकलकर ग्राउंड के प्ले फील्ड में आना चाहिए. बहुत जल्द हम लोग ‘वन डे विदाउट बैग इन ए वीक’ का कॉन्सेप्ट शुरू करने वाले हैं. यह काम हम लोगों के लिए काफी चैलेंजिंग है. इसके लिए हम लोगों को पैरेंट्स को राजी करना पड़ेगा.

“पैरेंट्स और टीचर्स के साथ पार्टनरशिप में ही बच्चों को डिजिटल टच के बारे जागरूक किया जा सकता है. इंटरनेट पर समय बिताने के बजाए रीडिंग, राइटिंग और लिस्निंग स्किल को सिखाने पर ज्यादा जोर देना चाहिए. पैरेंट्स को बच्चों के ऑब्जर्वेशन के लिए कुछ वक्त जरूर निकालना चाहिए.”

डॉ राम सिंह, प्रिंसिपल, डीपीएस रांची

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