Google Play Store पर वापस लौटा Telegram, NEET विवाद के बीच सरकार के इस बड़े फैसले के बाद हटा बैन

Edited by Rajeev Kumar
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टेलीग्राम प्ले स्टोर पर वापस आया / एआई इमेज

भारत सरकार का अस्थाई प्रतिबंध खत्म होने के बाद गूगल ने टेलीग्राम ऐप को री-स्टोर कर दिया है. हालांकि, पेपर लीक के सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए मैसेज एडिटिंग पर अभी भी पाबंदी रहेगी.

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भारत में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी सस्पेंस और कड़े सरकारी एक्शन के बाद आखिरकार लोकप्रिय मैसेजिंग प्लैटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) की गूगल प्ले स्टोर पर वापसी हो गई है. नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में दोबारा पेपर लीक होने की आशंका को रोकने के लिए सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध की अवधि समाप्त होते ही टेक दिग्गज गूगल ने इसे अपने प्लैटफॉर्म पर बहाल कर दिया. हालांकि, ऐप स्टोर से हटाए जाने के बाद भी यह ऐप पहले से मौजूद यूजर्स के फोन में काम कर रहा था, लेकिन नए डाउनलोड्स पर पूरी तरह रोक लगी हुई थी. इस पूरे घटनाक्रम ने देश के तकनीकी जगत और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है.

नीट परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने उठाया था अभूतपूर्व कदम

दरअसल, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी को लेकर देश में मचे बवाल के बीच सरकार ने यह सख्त रुख अपनाया था. बीते मई महीने में हुई मुख्य परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र लीक होने के गंभीर आरोपों के बाद सरकार ने उस परीक्षा को रद्द कर दिया था. इसके बाद 21 जून को आयोजित हुई नीट की पुनर्परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक रणनीतिक कदम उठाते हुए गूगल और ऐपल को 22 जून तक टेलीग्राम को अपने-अपने स्टोर से हटाने का आदेश दिया था, ताकि इस प्लैटफॉर्म के जरिए किसी भी तरह की अनधिकृत सामग्री या लीक पेपर का प्रसार न हो सके.

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मैसेज एडिट करने पर अभी भी रहेगी पाबंदी, साक्ष्यों से छेड़छाड़ रोकने की तैयारी

प्ले स्टोर पर टेलीग्राम की वापसी भले ही हो गई हो, लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से ऐप पर अभी भी एक बड़ी बंदिश लागू है. सरकार ने एक अलग विशेष निर्देश जारी कर टेलीग्राम को आगामी 30 जून तक भारत में ‘मैसेज एडिटिंग’ (संदेशों को बदलने) की सुविधा को पूरी तरह ब्लॉक रखने के लिए कहा है. इस कड़े कदम के पीछे सरकार का मुख्य मकसद यह है कि पेपर लीक या किसी भी तरह की धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में अगर कोई संदिग्ध बातचीत हुई हो, तो आरोपी डिजिटल सबूतों और साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या उन्हें डिलीट न कर सकें. इस डिजिटल सेंसरशिप पर सरकार ने बैन लगाने से पहले जून की शुरुआत में ही टेलीग्राम के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया था.

टेलीग्राम के सीईओ ने उठाए सवाल; रिलायंस और व्हाट्सऐप पर लगाया गंभीर आरोप

इस पूरे विवाद ने उस समय एक नया मोड़ ले लिया जब टेलीग्राम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) पावेल ड्यूरोव ने भारत सरकार के इस एक हफ्ते के कड़े प्रतिबंध की सार्वजनिक रूप से तीखी आलोचना की. ड्यूरोव का स्पष्ट मानना था कि इस तरह के अस्थाई प्रतिबंधों से पेपर लीक जैसी जमीनी समस्याओं को नहीं रोका जा सकता. इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा करते हुए आरोप लगाया कि भारत के बड़े औद्योगिक घराने रिलायंस समूह ने प्रतिद्वंद्वी मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप (मेटा) के साथ मिलकर इस प्रतिबंध के लिए सरकार के सामने लॉबिंग की थी. गौरतलब है कि मेटा प्लैटफॉर्म्स की रिलायंस के डिजिटल बिजनेस में हिस्सेदारी है, जिसके कारण इन आरोपों ने कॉरपोरेट जगत में भी हलचल तेज कर दी है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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