स्मार्टफोन की स्टोरेज जल्दी क्यों भर जाती है? आपकी ये आदतें हैं वजह
Published by : Rajeev Kumar Updated At : 11 Mar 2026 11:16 AM
फोन की स्टोरेज फुल होने से पहले सुधार लें ये आदतें
एंड्रॉयड फोन में पर्याप्त स्टोरेज होने के बावजूद यह जल्दी भर जाता है. वजह है यूजर्स की आदतें- पुराने स्क्रीनशॉट और डुप्लीकेट फोटो न हटाना, WhatsApp-टेलीग्राम की मीडिया फाइलें जमा करना, अनयूज्ड ऐप्स इंस्टॉल छोड़ देना और ऑफलाइन डाउनलोड्स को न मिटाना. इन्हें सुधारकर स्टोरेज की समस्या से बचा जा सकता है.
आजकल ज्यादातर एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर्याप्त स्टोरेज के साथ आते हैं. इसके बावजूद कुछ महीनों में ही यूजर्स को ‘स्टोरेज फुल’ का मैसेज मिलना शुरू हो जाता है. नतीजा यह होता है कि फोन की स्पीड धीमी पड़ जाती है और कई बार नये फोन खरीदने तक की नौबत आ जाती है. असल वजह हमारी ही कुछ आदतें हैं, जिन्हें अगर समय रहते सुधार लिया जाए तो स्टोरेज की समस्या से बचा जा सकता है.
स्क्रीनशॉट और डुप्लीकेट फोटो
गैलरी में अक्सर पुराने स्क्रीनशॉट और डुप्लीकेट फोटो पड़े रहते हैं. ये कभी काम के थे, लेकिन अब सिर्फ जगह घेरते हैं. इन्हें डिलीट न करने से स्टोरेज पर अनावश्यक दबाव पड़ताहै.
मैसेजिंग ऐप्स की मीडिया फाइलें
WhatsApp, Telegram जैसे ऐप्स रोजाना दर्जनों फोटो और वीडियो डाउनलोड कर लेते हैं. “गुड मॉर्निंग” मैसेज से लेकर फॉरवर्डेड वीडियो तक, ये फाइलें कुछ ही दिनों में कई GB जगह घेर लेती हैं. इन्हें समय-समय पर साफ करना जरूरी है.
अनयूज्ड ऐप्स
कई बार हम किसी खास काम के लिए ऐप डाउनलोड करते हैं और बाद में उसे भूल जाते हैं. ऐसे ऐप्स फोन में पड़े रहते हैं और स्टोरेज खा जाते हैं. इन्हें अनइंस्टॉल करना सबसे आसान उपाय है.
ऑफलाइन डाउनलोड्स
Spotify, YouTube या अन्य ऐप्स से किये गए ऑफलाइन डाउनलोड गैलरी में दिखाई नहीं देते, लेकिन स्टोरेज पर भारी असर डालते हैं. इन्हें हटाने से तुरंत काफी जगह खाली हो सकती है.
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By Rajeev Kumar
राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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