Screen Time: बच्चों की आंखों की सुरक्षा- तिरछी नजर से बचने के लिए 20-20-20 फाॅर्मूला अपनाएं

Edited by Rajeev Kumar
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20-20-20 rule for eye care for kids screen time / ai image

Screen Time: लंबे समय तक डिजिटल स्क्रीन देखने के कारण यह समस्या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के रूप में सामने आ रही है. इस स्थिति से बचाव के लिए नेत्र विशेषज्ञों ने 20-20-20 फाॅर्मूले को अपनाने की सलाह दी है.

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Screen Time: मोबाइल और कंप्यूटर के बढ़ते इस्तेमाल ने बच्चों की आंखों की सेहत पर गंभीर असर डाला है. कम उम्र में ही बच्चों की आंखें तिरछी (स्क्विंट) होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक डिजिटल स्क्रीन देखने के कारण यह समस्या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के रूप में सामने आ रही है. इस स्थिति से बचाव के लिए नेत्र विशेषज्ञों ने 20-20-20 फाॅर्मूले को अपनाने की सलाह दी है.

क्या है 20-20-20 फाॅर्मूला?

20-20-20 फाॅर्मूला आंखों की थकान और तनाव को कम करने के लिए एक प्रभावी उपाय है.

इस फाॅर्मूले के अनुसार:

हर 20 मिनट बाद स्क्रीन से नजर हटाएं
20 फीट की दूरी पर स्थित किसी वस्तु को देखें
20 सेकंड तक इसे लगातार देखें.

इस सरल प्रक्रिया से आंखों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और डिजिटल स्क्रीन से होने वाली समस्याओं को रोका जा सकता है.

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षण

लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाली इस समस्या के कुछ सामान्य लक्षण हैं:

आंखों में जलन और सूखापन
सिरदर्द और धुंधला दिखना
आंखों में खिंचाव महसूस होना
आंखों का तिरछा होना या दोहरा दिखना

बच्चों की आंखों की देखभाल के लिए जरूरी उपाय

स्क्रीन टाइम सीमित करें: बच्चों के स्क्रीन समय को प्रतिदिन 1-2 घंटे तक सीमित रखें
ब्रेक लेना अनिवार्य करें: हर 20 मिनट बाद ब्रेक लें और आंखों को आराम दें
नेत्र जांच कराएं: नियमित रूप से आंखों की जांच करवाएं ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके
प्राकृतिक रोशनी में समय बिताएं: बच्चों को अधिक समय तक प्राकृतिक प्रकाश में खेलने के लिए प्रेरित करें.

आंखों की सेहत को बनाये रखने के लिए यह फाॅर्मूला बेहद कारगर है. माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन समय पर नजर रखें और समय-समय पर नेत्र परीक्षण कराते रहें.

ध्यान रहे कि आंखों की सेहत से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए नेत्र विशेषज्ञ (ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट) से सलाह लेना सबसे बेहतर उपाय है.

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यदि आपके बच्चे को आंखों में किसी भी प्रकार की परेशानी जैसे कि:

आंखों का तिरछा होना (Squint)
धुंधला दिखना या दोहरा दिखना
जलन या सूखापन महसूस होना
लंबे समय तक स्क्रीन देखने पर सिरदर्द

इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें.

कब नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें?

यदि आंखों की समस्या लगातार बनी रहे
बच्चों को स्कूल में पढ़ने या बोर्ड देखने में कठिनाई हो
लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बाद थकावट या दर्द महसूस हो

ऑनलाइन विशेषज्ञ से सलाह लेने के विकल्प:

आप चाहें तो कई विश्वसनीय स्वास्थ्य प्लैटफॉर्म जैसे कि Practo, 1mg, Apollo 24/7 पर जाकर किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ से ऑनलाइन परामर्श भी ले सकते हैं.

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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