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Phone Farms: फेक कमेंट्स, लाइक्स और डिसलाइक से कैसे प्रभावित हो रहा है सोशल मीडिया का सच?

Updated at : 30 Jul 2025 10:15 AM (IST)
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Phone Farms

Phone Farms

Phone Farms: जानिए क्या है फोन फार्म और कैसे इसका उपयोग फेक कमेंट्स, लाइक्स और डिसलाइक के लिए हो रहा है. डिजिटल फ्रॉड के इस नये रूप से कैसे प्रभावित हो रहा है सोशल मीडिया?

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What are Phone Farms? आज के सोशल मीडिया युग में जहां हर लाइक (Like), कमेंट (Comment) और शेयर (Share) को सफलता का पैमाना माना जाता है, वहीं एक छिपा हुआ और तेजी से बढ़ता हुआ ट्रेंड सामने आया है- फोन फार्मिंग (Phone Farming). यह एक ऐसी तकनीकी व्यवस्था है, जिसमें सैकड़ों स्मार्टफोन एक साथ जोड़कर फर्जी इंगेजमेंट तैयार किया जाता है. इसका उद्देश्य? सोशल मीडिया पर लोकप्रियता का भ्रम पैदा करना.

Phone Farming: इस रिपोर्ट में हम जानेंगे

फोन फार्म क्या है और कैसे काम करता है?

कैसे बॉट्स और स्क्रिप्ट्स से फेक कमेंट्स और लाइक्स बनाए जाते हैं?

क्यों यह डिजिटल लोकतंत्र और छोटे क्रिएटर्स के लिए खतरा है?

सरकार और सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स इस पर क्या कार्रवाई कर रहे हैं?

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क्या है फोन फार्म? (What are phone farms?)

फोन फार्म एक ऐसी तकनीकी व्यवस्था है जिसमें दर्जनों या सैकड़ों स्मार्टफोन एक साथ चलाये जाते हैं, जिनसे ऑटोमेटिक कमेंट्स, लाइक्स और डिसलाइक जेनरेट किये जाते हैं. इसका उपयोग कुछ वेबसाइट्स, यूट्यूब चैनल्स या सोशल मीडिया अकाउंट्स अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए करते हैं.

Phone Farms: कैसे होता है फेक इंगेजमेंट का खेल? (Fake Engagement)

बॉट्स या स्क्रिप्ट की मदद से एक कंट्रोल सिस्टम सभी फोन्स पर एक साथ ऑपरेशन चलाता है

वीडियो या पोस्ट पर क्लिक, कमेंट और शेयर जैसी एक्टिविटीज फर्जी रूप से बढ़ाई जाती हैं

यह न केवल प्लैटफॉर्म की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है, बल्कि यूजर्स को भी गलत जानकारी मिलती है.

क्यों है यह चिंता का विषय? (Phone Farms)

कंटेंट की वैधता पर सवाल उठते हैं

छोटे क्रिएटर्स को नुकसान होता है, क्योंकि उनका ऑर्गेनिक इंगेजमेंट पीछे छूट जाता है

यह डिजिटल लोकतंत्र को प्रभावित करता है और डेटा मैनिपुलेशन के खतरे बढ़ाता है.

Phone Farms: सरकार और प्लैटफॉर्म्स क्या कर रहे हैं?

भारत में IT एक्ट और डिजिटल मीडिया पॉलिसी के तहत ऐसे फेक एंगेजमेंट को रोकने की कोशिश हो रही है. कई प्लैटफॉर्म्स AI आधारित सिस्टम्स से बॉट एक्टिविटी डिटेक्ट कर रहे हैं और ऐसे अकाउंट्स को सस्पेंड भी किया जा रहा है.

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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