Tech Safety: सुरक्षा, विश्वास के नजरिये से तकनीक का नियमन जरूरी, IT राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कही यह बात

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Tech Safety: सुरक्षा, विश्वास के नजरिये से तकनीक का नियमन जरूरी, IT राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कही यह बात

लगभग 85 करोड़ भारतीय पहले से ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं और वित्त वर्ष 2025-26 तक इनकी संख्या बढ़कर 1.2 अरब हो जाने का अनुमान है. चंद्रशेखर ने अपने वीडियो संदेश में ‘डीपफेक’ के मुद्दे पर भी ध्यान आकर्षित किया.

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Rajeev Chandrasekhar on Safety Regulations in Internet, Technology and DeepFake : सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि सुरक्षा और विश्वास के नजरिये से इंटरनेट और प्रौद्योगिकी का सावधानीपूर्वक नियमन नहीं होने पर यह उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुंचा सकती है.

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चंद्रशेखर ने इसके साथ ही कहा कि नवाचार का अत्यधिक नियमन न करते हुए सुरक्षा ढांचे को सावधानीपूर्वक विकसित किया जाना चाहिए. केंद्रीय मंत्री ने ‘डेट विद टेक’ कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हाल के समय की सबसे बड़ी खोज में से एक है और सरकार डिजिटल मंचों पर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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लगभग 85 करोड़ भारतीय पहले से ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं और वित्त वर्ष 2025-26 तक इनकी संख्या बढ़कर 1.2 अरब हो जाने का अनुमान है. चंद्रशेखर ने अपने वीडियो संदेश में ‘डीपफेक’ के मुद्दे पर भी ध्यान आकर्षित किया.

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उन्होंने कहा, हाल की घटनाओं ने दिखाया है कि सावधानीपूर्वक नियमन और सुरक्षा एवं विश्वास का ध्यान न रखे जाने पर इंटरनेट और व्यापक प्रौद्योगिकी परिवेश भी नुकसानदेह और आपराधिक हो सकते हैं.

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डीपफेक तकनीक को लेकर केंद्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी चिंता जतायी है. केंद्रीय मंत्री ने डीपफेक को लोकतंत्र के लिए खतरा करार देते हुए कहा कि सरकार इस बारे में नये नियम लाने की तैयारी कर रही है. इसके तहत ‘डीपफेक’ बनाने वालों और संबंधित मंचों दोनों पर जुर्माना लगाया जा सकेगा.

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‘डीपफेक’ में कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल करते हुए किसी तस्वीर या वीडियो में मौजूद व्यक्ति की जगह किसी दूसरे को दिखा दिया जाता है. इसमें इतनी समानता होती है कि असली और नकली में अंतर करना काफी मुश्किल होता है.

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हाल ही में, बॉलीवुड के कई कलाकारों को निशाना बनाने वाले कई ‘डीपफेक’ वीडियो सोशल मीडिया मंच पर आये. इस पर कई लोगों ने नाराजगी जाहिर की. इससे नकली सामग्री बनाने के लिए प्रौद्योगिकी तथा उपकरणों के दुरुपयोग को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए हैं.

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राजीव कुमार

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By राजीव कुमार

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.

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राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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