सोशल मीडिया को एडल्ट कंटेंट का अड्डा कैसे बना रहे पॉपुलर मोबाइल ऐप्स?

Edited by Rajeev Kumar
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मोबाइल ऐप्स ने फैलाया एडल्ट कंटेंट का जाल / सांकेतिक एआइ इमेज

इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स की लोकप्रियता ने उन्हें एक शक्तिशाली मंच बना दिया है, लेकिन उनकी दिशा अब सवालों के घेरे में है. जानिए कि एडल्ट कंटेंट की ओर बढ़ता यह रुझान कैसे न केवल सामाजिक मूल्यों को चुनौती दे रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरा बन रहा है.

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आज के डिजिटल जमाने में सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब और स्नैपचैट हमारी जिंदगी का खास हिस्सा बन चुके हैं. ये प्लैटफॉर्म्स शुरू में बनाये तो गए थे दोस्तों से कनेक्ट करने, क्रिएटिविटी दिखाने और एंटरटेनमेंट के लिए, लेकिन हाल के वर्षों में इनका स्वरूप बदलता नजर आ रहा है. कई एक्सपर्ट्स और रिपोर्ट्स की मानें, तो ये प्लैटफॉर्म्स धीरे-धीरे एडल्ट कंटेंट साइट्स में बदलते जा रहे हैं, जहां अश्लीलता को कुछ इस तरह पेश किया जा रहा है, जैसे वह नॉर्मल लगे. आइए, इस बदलाव की वजह, असर और एक्सपर्ट्स की राय पर गौर करते हैं.

सोशल मीडिया में आये इस बदलाव की वजह क्या है?

कंटेंट का कमर्शियलाइजेशन : इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लैटफॉर्म्स पर एल्गोरिदम व्यूज और एंगेजमेंट को बढ़ावा देते हैं. स्टैटिस्टा का डेटा बताता है कि उत्तेजक और कामुक कंटेंट को सामान्य कंटेंट की तुलना में 70% ज्यादा लाइक्स और शेयर मिलते हैं. इससे यूजर्स और इन्फ्लुएंसर्स अर्ध-नग्न तस्वीरें, डांस वीडियो और सुझावात्मक कंटेंट पोस्ट करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं.

फिल्टर और शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट : स्नैपचैट के फिल्टर और टिकटॉक के क्विक वीडियो फॉर्मैट ने कामुकता को रचनात्मकता के नाम पर सामान्य बना दिया है. उदाहरण के लिए, टिकटॉक पर डांस चैलेंज अक्सर स्किन-टाइट कपड़ों और उत्तेजक हरकतों के साथ वायरल होते हैं.

प्राइवेसी का अभाव : इन प्लैटफॉर्म्स पर स्टोरीज और रील्स जैसे फीचर्स के जरिये यूजर्स अपनी निजी जिंदगी को खुलेआम शेयर करते हैं. एक रिपोर्ट में पाया गया कि 40% से ज्यादा युवा यूजर्स ऐसे कंटेंट पोस्ट करते हैं, जो सामाजिक नियम-कायदों से परे होता है.

रिपोर्ट्स, जो देती हैं इस बात की गवाही

The Wall Street Journal (2021) : इस अखबार ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के आंतरिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि कंपनी को पता है कि उनके प्लैटफॉर्म पर कामुक कंटेंट को बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन वे इसे रोकने के बजाय एल्गोरिदम के जरिए प्रमोट कर रहे हैं.

BBC की जांच (2022) : बीबीसी की एक रिपोर्ट में बताया गया कि टेलीग्राम जैसे प्लैटफॉर्म्स के साथ-साथ इंस्टाग्राम पर भी निजी तस्वीरों का दुरुपयोग बढ़ रहा है. कई यूजर्स की तस्वीरें फोटोशॉप कर सॉफ्ट पोर्न की तरह शेयर की जा रही हैं.

साइबर सिक्योरिटी रिपोर्ट (2023) : एक अध्ययन में सामने आया कि टिकटॉक पर 15-20% वायरल वीडियो में सॉफ्ट पोर्न तत्व मौजूद हैं, जैसे कि उत्तेजक पोज और कम से कम कपड़े. यह बच्चों और किशोरों के लिए खतरा बन रहा है.

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एक्सपर्ट्स और सेलेब्स क्या कहते हैं इस बारे में?

डॉ पवन दुग्गल (साइबर लॉ एक्सपर्ट) : सोशल मीडिया अब मनोरंजन से ज्यादा कमाई का जरिया बन गया है. इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर सॉफ्ट पोर्न को सामान्य बनाया जा रहा है, क्योंकि यह ज्यादा ट्रैफिक और विज्ञापन लाता है. सरकार को सख्त नियम लाने चाहिए.

श्वेता तिवारी (एक्ट्रेस) : टीवी की नामचीन अभिनेत्री ने पिछले दिनों एक इंटरव्यू में कहा, मैं अपनी बेटी को टिकटॉक से दूर रखती हूं. वहां जो कंटेंट वायरल हो रहा है, वो बच्चों के लिए सही नहीं है. ये प्लैटफॉर्म्स अब क्रिएटिविटी (रचनात्मकता) कम, और सेंसुअलिटी (उत्तेजना) ज्यादा दिखा रहे हैं.

डैनियल मिलर (मानवविज्ञानी, यूसीएल): अपनी किताब ‘हाउ द वर्ल्ड चेंज्ड सोशल मीडिया’ में उन्होंने लिखा है, सोशल मीडिया अब यूजर्स को नहीं, बल्कि यूजर्स सोशल मीडिया को चला रहे हैं. कामुकता और सनसनीखेज कंटेंट इस बदलाव का बड़ा हिस्सा हैं.

सबसे बड़ा प्रभाव युवाओं पर

सोशल मीडिया के बिहेवियर में आये इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रभाव युवाओं पर पड़ रहा है. इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के एक सर्वे में 60% किशोरों ने माना कि वे सोशल मीडिया पर देखे गए कंटेंट को कॉपी करने की कोशिश करते हैं, जिसमें सॉफ्ट पोर्न एलिमेंट भी शामिल हैं. मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे बॉडी इमेज की समस्याएं, आत्मसम्मान में कमी और असामाजिक व्यवहार बढ़ रहा है. इसके अलावा, बच्चों के लिए ये प्लैटफॉर्म्स असुरक्षित हो गए हैं, क्योंकि कंटेंट मॉडरेशन कमजोर है.

‘अनरेगुलेटेड कंटेंट ऑन डिजिटल मीडिया प्लैटफॉर्म्स एंड इट्स इम्पैक्ट ऑन सोसायटी’ में डिजिटल मीडिया पर बढ़ते आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर मौजूद कंटेंट को सही ज्ञंग से रेग्युलेट नहीं किया गया, तो इसका समाज पर गलत प्रभाव पड़ सकता है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार और संबंधित एजेंसियों को डिजिटल प्लैटफॉर्म्स पर सख्त नियम लागू करने चाहिए. इससे डिजिटल मीडिया का जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा और समाज में बढ़ती नकारात्मकता को रोका जा सकेगा. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन की रिपोर्ट डिजिटल मीडिया के रेगुलेशन के जरिये इस तरह के कंटेंट की रोकथाम की वकालत करती है.

तो उपाय क्या है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सख्त कंटेंट गाइडलाइंस, उम्र सत्यापन और एल्गोरिदम में बदलाव इस समस्या को कम कर सकते हैं. सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों को मिलकर जागरूकता फैलाने और तकनीकी हस्तक्षेप की जरूरत है. यूजर्स को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए ऐसे कंटेंट से दूरी बनानी चाहिए. कुल मिलाकर कहें, तो इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और टिकटॉक जैसे प्लैटफॉर्म्स की लोकप्रियता ने उन्हें एक शक्तिशाली मंच बना दिया है, लेकिन उनकी दिशा अब सवालों के घेरे में है. सॉफ्ट पोर्न की ओर बढ़ता यह रुझान न केवल सामाजिक मूल्यों को चुनौती दे रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरा बन रहा है. समय रहते इस पर ध्यान देना जरूरी है, वरना ये प्लैटफॉर्म्स अपनी असल पहचान खो देंगे.

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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