इंस्टाग्राम पर 16 घंटे रोज बिताना एडिक्शन है या नहीं? कोर्ट में छिड़ी नयी बहस

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 17 Feb 2026 3:48 PM

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Instagram केस: डिजिटल आदतों पर कानूनी कसौटी

Instagram के चीफ Adam Mosseri ने कैलिफोर्निया कोर्ट में कहा, सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल क्लिनिकल एडिक्शन का सबूत नहीं माना जा सकता है. इस मुकदमे में Meta, YouTube भी शामिल हैं, जबकि TikTok और Snapchat पहले ही समझौता कर चुके हैं.

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सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य के संबंध पर चल रही अहम कानूनी बहस के बीच Adam Mosseri ने कैलिफोर्निया की अदालत में इंस्टाग्राम का पक्ष रखा. Instagram के प्रमुख ने गवाही देते हुए कहा कि किसी यूजर का अत्यधिक समय तक प्लैटफॉर्म पर एक्टिव रहना अपने आप में ‘क्लिनिकल एडिक्शन’ का प्रमाण नहीं माना जा सकता. यह मुकदमा टेक कंपनियों की जिम्मेदारी और किशोरों पर डिजिटल प्लैटफॉर्म के प्रभाव को परखने वाला एक महत्वपूर्ण परीक्षण बन चुका है.

कानूनी लड़ाई के केंद्र में जिम्मेदारी बनाम पर्सनल फैक्टर

मामले में मूल वादी, जिन्हें अदालत में केवल उनके नाम के इनीशियल्स K.G.M के रूप में पहचाना गया, का दावा है कि सोशल मीडिया उपयोग ने उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया.इंस्टाग्राम की मूल कंपनी Meta का तर्क है कि वादी के अनुभवों के पीछे अन्य व्यक्तिगत और सामाजिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं. मुकदमे में YouTube को भी प्रतिवादी बनाया गया है, जबकि Snapchat और TikTok पहले ही समझौते के जरिये अलग हो चुके हैं.

‘अत्यधिक उपयोग’ की परिभाषा पर सवाल

गवाही के दौरान मोसेरी ने स्पष्ट किया कि इंस्टाग्राम उपयोग की सीमा तय करना आसान नहीं है. उनके अनुसार, किसी के लिए अधिक समय तक प्लैटफॉर्म पर सक्रिय रहना समस्या हो सकता है, तो किसी दूसरे के लिए वही अनुभव सकारात्मक भी हो सकता है. उन्होंने इसे एक व्यक्तिगत स्थिति बताया, जहां उपयोग की मात्रा से अधिक महत्व यूजर के एक्सपीरिएंस और असर का है.

‘क्लिनिकल एडिक्शन’ बनाम ‘समस्यात्मक उपयोग’

मोसेरी ने अदालत में यह रेखांकित किया कि ‘क्लिनिकल एडिक्शन’ और ‘प्रॉब्लेमेटिक यूज’ में फर्क समझना आवश्यक है. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किसी शो को देर रात तक लगातार देखना अक्सर लोग मजाक में ‘एडिक्शन’ कह देते हैं, लेकिन चिकित्सकीय दृष्टि से यह अलग अवधारणा है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि वे नशा या लत से जुड़े चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं हैं.

बुलिंग और सुरक्षा पर उठे सवाल

वादी पक्ष के वकील Mark Lanier ने Meta के एक आंतरिक सर्वे का उल्लेख किया, जिसमें बड़ी संख्या में यूजर्स द्वारा बुलिंग देखने या झेलने की बात सामने आई. साथ ही, K.G.M द्वारा सैकड़ों शिकायतें दर्ज करने का मुद्दा भी उठाया गया. मोसेरी ने स्वीकार किया कि उन्हें इन खास डिटेल्स की जानकारी नहीं थी, लेकिन उन्होंने दोहराया कि सुरक्षा उनके प्लैटफॉर्म की प्राथमिकता है.

इमेज फिल्टर विवाद पर चर्चा

मुकदमे में 2019 के एक ईमेल के जरिये हुई बातचीत का जिक्र हुआ, जिसमें फोटो फिल्टर फीचर के संभावित नकारात्मक प्रभावों पर चिंता जताई गई थी.मोसेरी के अनुसार, कंपनी ने मेकअप प्रभावों से आगे बढ़ने वाले फिल्टर पर रोक लगाने का निर्णय लिया था, हालांकि बाद में इस नीति में संशोधन किया गया.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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