बच्चों के वीडियो गेम खेलने पर चीन में लगी समय की पाबंदी, जानें क्या हुआ उसके बाद

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 25 Dec 2024 11:36 PM

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gaming in china

चीन में वीडियो गेम उद्योग विशाल है, लेकिन बच्चों द्वारा वीडियो गेम के उपयोग को लेकर गहरी सांस्कृतिक और सामाजिक चिंताएं हैं, जिन्हें 'आध्यात्मिक अफीम' कहा जाता है.

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ऑस्ट्रेलिया की संघीय संसद ने नवंबर 2024 में 16 साल से कम उम्र के लोगों के सोशल मीडिया उपयोग पर पाबंदी लगाने के लिए एक ऐतिहासिक विधेयक पारित किया. हालांकि, इसके विवरण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन सरकार ने संकेत दिया है कि आयु सत्यापन तकनीकों का उपयोग इस कानून के प्रवर्तन में किया जाएगा. चीन में भी 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ऑनलाइन गेमिंग पर सख्त प्रतिबंध हैं, जिसमें आयु सत्यापन प्रौद्योगिकियां लागू की गई हैं. हालांकि, इन उपायों को लागू करना गोपनीयता और अनुपालन की चुनौतियों के साथ जुड़ा है, और यह दर्शाता है कि तकनीकी प्रतिबंध प्रभावी रूप से लागू करना मुश्किल हो सकता है.

गेमिंग पर समय पाबंदी

चीन में वीडियो गेम उद्योग विशाल है, लेकिन बच्चों द्वारा वीडियो गेम के उपयोग को लेकर गहरी सांस्कृतिक और सामाजिक चिंताएं हैं, जिन्हें ‘आध्यात्मिक अफीम’ कहा जाता है. यह चिंताएं गेमिंग को युवाओं के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में देखती हैं, और इसके चलते चीन ने 2019 में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए गेमिंग समय सीमित करने के लिए कानून बनाया. इसके तहत सप्ताह के दिनों में 90 मिनट और सप्ताहांत में तीन घंटे की सीमा तय की गई थी, साथ ही रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक गेमिंग पर पाबंदी लगाई गई. 2021 में इस नियम को और कड़ा किया गया, जिसमें सप्ताहांत और सार्वजनिक छुट्टियों पर गेमिंग का समय केवल रात 8 से 9 बजे तक सीमित किया गया. 2023 में इस विनियमन को लाइव स्ट्रीमिंग प्लैटफॉर्म, वीडियो-शेयरिंग साइट्स और सोशल मीडिया पर भी लागू कर दिया गया.

तकनीक करा रही नियमों का पालन

चीन की प्रमुख गेम कंपनियां अपने विनियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आयु सत्यापन प्रणालियां और चेहरे की पहचान जैसी तकनीकों का उपयोग कर रही हैं, जिससे गोपनीयता संबंधी चिंताएं उत्पन्न हो रही हैं. इसके अलावा, मोबाइल डिवाइस निर्माताओं, ऐप स्टोर और ऐप डेवलपर्स ने ‘माइनर मोड’ पेश किया है, जो निर्दिष्ट समय सीमा तक पहुंचने के बाद उपयोगकर्ताओं के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित कर देता है.

ऑस्ट्रेलिया को चीन से क्या सीखना चाहिए?

चीन के सख्त गेमिंग नियमों के बावजूद, कई बच्चे इन्हें दरकिनार करने के तरीके खोजते हैं, जैसे बड़े रिश्तेदारों या दोस्तों के नाम से अकाउंट पंजीकृत करना या चेहरे की पहचान तकनीक को मात देने के लिए बड़े लोगों की तस्वीरें इस्तेमाल करना. इसके परिणामस्वरूप नाबालिगों के लिए अनपेक्षित जोखिम, जैसे कि गेम अकाउंट विक्रेताओं से जुड़ी ठगी, उत्पन्न हो गए हैं. एक मामले में, लगभग 3,000 नाबालिगों से 86,000 युआन की ठगी की गई. ऑस्ट्रेलिया को चीन से यह सीखना चाहिए कि तकनीकी उपायों के जरिये पूर्ण प्रतिबंध लागू करना प्रभावी नहीं हो सकता और इससे ऑनलाइन जोखिम बढ़ सकते हैं. इसके बजाय, सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण बनाने के लिए आयु-उपयुक्त सामग्री फिल्टर, अभिभावकों के नियंत्रण और स्क्रीन टाइम प्रबंधन जैसे उपायों का उपयोग किया जाना चाहिए.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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