जनगणना के नाम पर साइबर ठगी से बचें, एक गलती और आपका खजाना खाली

Published by :Rajeev Kumar
Published at :15 Apr 2026 3:10 PM (IST)
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जनगणना के दौरान साइबर फ्रॉड से सावधान // सांकेतिक एआई तस्वीर

जनगणना के दौरान साइबर ठग फर्जी वेबसाइट, OTP और लिंक के जरिये लोगों को निशाना बना रहे हैं. जानिए कैसे पहचानें ऐसे स्कैम और किन बातों का ध्यान रखकर आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं.

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देशभर में जनगणना की प्रक्रिया शुरू होते ही साइबर अपराधियों की सक्रियता भी बढ़ गई है. आम लोगों की जानकारी जुटाने के इस सरकारी अभियान को अब ठग अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां जनगणना के नाम पर लोगों को फर्जी कॉल, लिंक और वेबसाइट के जरिए निशाना बनाया जा रहा है. ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही आपको बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है.

नकली वेबसाइट और फर्जी पोर्टल का जाल

साइबर ठग सबसे पहले सरकारी वेबसाइट जैसे दिखने वाले नकली पोर्टल तैयार करते हैं. इन वेबसाइट्स का डिजाइन इतना असली लगता है कि आम यूजर आसानी से धोखा खा जाता है. जैसे ही आप इसमें अपनी निजी जानकारी भरते हैं, आपकी डिटेल्स सीधे ठगों के पास पहुंच जाती हैं, जिससे बैंकिंग फ्रॉड का खतरा बढ़ जाता है.

OTP और कॉल के जरिये ठगी

कई लोगों को कॉल करके बताया जा रहा है कि जनगणना के लिए वेरिफिकेशन जरूरी है और इसके लिए OTP शेयर करना होगा. ध्यान रखें, जनगणना प्रक्रिया में कभी भी OTP की जरूरत नहीं होती. अगर कोई ऐसा दावा करता है, तो समझ जाएं कि यह ठगी का तरीका है.

बैंक डिटेल और QR कोड स्कैम

जनगणना सिर्फ परिवार और जनसंख्या से जुड़ी जानकारी के लिए होती है, इसका बैंकिंग डिटेल से कोई संबंध नहीं है. अगर कोई व्यक्ति आपसे अकाउंट नंबर, कार्ड डिटेल या QR कोड स्कैन करने को कहे, तो तुरंत मना कर दें. ऐसे मामलों में आपकी पूरी जमा पूंजी खतरे में पड़ सकती है.

खतरनाक लिंक से रहें दूर

फोन पर SMS या WhatsApp के जरिये जनगणना फॉर्म भरने के नाम पर लिंक भेजे जा सकते हैं. इन लिंक पर क्लिक करते ही आपका फोन हैक हो सकता है या आपकी जानकारी चोरी हो सकती है. हमेशा ऐसे लिंक से दूरी बनाकर रखें और किसी भी अनजान URL पर भरोसा न करें.

खुद को कैसे रखें सुरक्षित?

सरकार की ओर से साफ किया गया है कि जनगणना के दौरान कोई भी अधिकारी आपसे OTP, पैसे या बैंक डिटेल नहीं मांगता. साथ ही, किसी भी वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचने के लिए उसका डोमेन “.gov.in” होना जरूरी है.

थोड़ी सतर्कता और सही जानकारी आपको इस तरह के साइबर जाल से बचा सकती है.

यह भी पढें: WhatsApp – Telegram पर फैल रहे फर्जी mParivahan ऐप और RAT मैलवेयर, सेकेंडों में हो जाएगी आपकी पहचान और कमाई की चोरी

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

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राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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