AI से चेहरा बदलवाने का बढ़ता ट्रेंड बना खतरा, सर्जन्स की चेतावनी- परफेक्ट फेस की चाह पड़ सकती है भारी

AI की बनाई तस्वीर लेकर पहुंच रहे मरीज, डॉक्टरों के सामने नयी चुनौती / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन
AI चैटबॉट्स से तैयार हो रहे परफेक्ट फेस की मांग तेजी से बढ़ रही है. प्लास्टिक सर्जन्स का कहना है कि ऐसी डिजिटल सुंदरता को असल जिंदगी में हासिल करने की कोशिश गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ सवालों के जवाब देने या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं रह गया है. बड़ी संख्या में लोग अब चैटबॉट्स से अपने चेहरे का बेहतर वर्जन तैयार करा रहे हैं और फिर उसी लुक को असल जिंदगी में पाने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी का सहारा लेना चाहते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह नया ट्रेंड खतरनाक दिशा में जा रहा है. कई प्लास्टिक सर्जनों के मुताबिक AI द्वारा तैयार किये गए चेहरे अक्सर इंसानी शरीर की वास्तविक सीमाओं से परे होते हैं और उन्हें हासिल करने की कोशिश गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है.
चैटबॉट ने बनाया परफेक्ट फेस, डॉक्टर भी रह गए हैरान
ब्रिटेन के लेखक और पत्रकार आइजैक टॉम्पकिन्स ने अपने एक सामान्य सेल्फी फोटो को AI चैटबॉट में अपलोड कर उसे और आकर्षक बनाने के लिए कहा. कुछ ही सेकेंड में AI ने उनके चेहरे का ऐसा रूप तैयार कर दिया जिसमें नाक ज्यादा सीधी, आंखें ज्यादा संतुलित और चेहरे की बनावट अधिक आकर्षक दिखाई गई.
जब यह तस्वीर एक अनुभवी कॉस्मेटिक सर्जन को दिखाई गई, तो उन्होंने माना कि बदलाव देखने में मामूली लगते हैं, लेकिन इन्हें वास्तविकता में बदलने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. इसके बावजूद नतीजे बिल्कुल AI जैसी तस्वीर वाले नहीं होंगे.
क्लीनिक में बढ़ रही AI फेस की मांग
कॉस्मेटिक सर्जनों का कहना है कि अब कई मरीज AI से तैयार तस्वीरें लेकर क्लीनिक पहुंच रहे हैं. वे चाहते हैं कि उनका चेहरा बिल्कुल उसी तरह दिखे जैसा चैटबॉट ने डिजाइन किया है.
विशेषज्ञों के अनुसार इन तस्वीरों में अक्सर असामान्य रूप से परफेक्ट त्वचा, अत्यधिक संतुलित चेहरे की बनावट और ऐसी समरूपता दिखाई जाती है जो प्राकृतिक रूप से इंसानी शरीर में संभव नहीं होती. यही वजह है कि डॉक्टरों को मरीजों को वास्तविकता और डिजिटल कल्पना के बीच का अंतर समझाना पड़ रहा है.
करोड़ों रुपये खर्च करने पर भी नहीं मिल सकती AI जैसी शक्ल
एक अन्य एक्सपेरिमेंट में AI से सबसे आकर्षक और मर्दाना चेहरा तैयार करने को कहा गया. इसके बाद जो सुझाव सामने आये उनमें जबड़े की बड़ी सर्जरी, चेहरे की चर्बी हटाने और कई इम्प्लांट शामिल थे.
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बदलाव बेहद महंगे होने के साथ-साथ जोखिम भरे भी हो सकते हैं. कई मामलों में उम्र बढ़ने के साथ चेहरा फिर बदल जाता है, जिससे सर्जरी के बाद भी AI जैसा परिणाम नहीं मिल पाता.
इंसानी शरीर कोई फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर नहीं
प्लास्टिक सर्जन बताते हैं कि AI किसी तस्वीर के हर पिक्सल को तुरंत बदल सकता है, लेकिन वास्तविक शरीर में ऐसा करना संभव नहीं है. उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति की एक आंख दूसरी आंख से कुछ मिलीमीटर ऊपर या नीचे है, तो AI उसे सेकेंडों में संतुलित कर सकता है.
हालांकि असल दुनिया में आंखें खोपड़ी की हड्डियों के भीतर स्थित होती हैं और उनके पीछे मस्तिष्क मौजूद होता है. ऐसे हिस्सों में बदलाव करना जटिल और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है. यही कारण है कि डॉक्टर AI से बने चेहरों को चिकित्सा दृष्टि से अव्यावहारिक मानते हैं.
सोशल मीडिया और AI बना रहे हैं नया दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पहले ही लोगों पर परफेक्ट दिखने का दबाव बना चुका है. अब AI टूल्स इस दबाव को और बढ़ा रहे हैं क्योंकि वे कुछ सेकेंड में ऐसा चेहरा तैयार कर देते हैं जो वास्तविकता से काफी दूर होता है.
डॉक्टरों का कहना है कि सुंदर दिखने की इच्छा स्वाभाविक है, लेकिन AI द्वारा बनायी गई डिजिटल कल्पनाओं को हासिल करने के लिए शरीर के साथ अत्यधिक प्रयोग करना लंबे समय में नुकसानदेह हो सकता है.
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