AI की मदद से बंदे ने खोज डाली 25 पुश्तैनी प्रॉपर्टी, वायरल हुई कहानी

AI मैपिंग से सामने आई 25 पुश्तैनी प्रॉपर्टी / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन
उत्तर प्रदेश के युवक ने AI असिस्टेंट की मदद से अपनी 25 पुश्तैनी जमीनों की सटीक लोकेशन खोज निकाली. सरकारी रिकॉर्ड्स और कॉम्प्लेक्स मैपिंग डेटा को AI ने आसान बनाकर पूरा नक्शा तैयार कर दिया.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ चैटिंग, फोटो एडिटिंग या ऑफिस वर्क तक सीमित नहीं रह गया है. उत्तर प्रदेश के एक युवक ने AI की मदद से ऐसा काम कर दिखाया, जिसने इंटरनेट पर लोगों को हैरान कर दिया. मोहम्मदपुर गांव से जुड़े इस मामले में युवक ने अपनी 25 पुश्तैनी जमीनों का पता AI की मदद से लगाया, जबकि उसे खुद गांव की जमीनों की सही लोकेशन तक नहीं पता थी. यह कहानी अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे भारत में AI के सबसे उपयोगी उदाहरणों में से एक बता रहे हैं.
सरकारी रिकॉर्ड्स के जाल में फंसी थी पुश्तैनी जमीन
जाहिद खान नाम के युवक ने बताया कि यह जमीन उनके परदादा से दादा, फिर पिता और बाद में उन्हें विरासत में मिली थी. लेकिन असली समस्या तब शुरू हुई जब जमीन की पहचान करनी पड़ी. रिकॉर्ड्स अलग-अलग सरकारी वेबसाइट्स पर मौजूद थे और उनमें इस्तेमाल हुई तकनीकी हिंदी को समझना आसान नहीं था.
जाहिद के मुताबिक, उन्होंने अपने जीवन में मोहम्मदपुर गांव बहुत कम देखा था. ऐसे में यह समझना लगभग नामुमकिन था कि परिवार की जमीन आखिर कहां मौजूद है. डिजिटल रिकॉर्ड होने के बावजूद जानकारी इतनी उलझी हुई थी कि सामान्य व्यक्ति के लिए उसे समझना बेहद मुश्किल था.
AI असिस्टेंट ने खुद खोजे जमीन के रिकॉर्ड
समस्या का हल निकालने के लिए जाहिद ने AI असिस्टेंट Claude का इस्तेमाल किया. उन्होंने AI के “कंप्यूटर यूज” फीचर की मदद ली, जिसके बाद AI ने खुद सरकारी पोर्टल्स पर जाकर जमीन से जुड़े रिकॉर्ड्स खंगालने शुरू किए.
AI ने हिंदी ऑन-स्क्रीन कीबोर्ड का इस्तेमाल करते हुए उनके पिता का नाम दर्ज किया और उससे जुड़े जमीन रिकॉर्ड्स खोज निकाले. इसके बाद AI ने परिवार से जुड़ी 25 अलग-अलग जमीनों के गाटा नंबर ढूंढ लिए.
यहीं से मामला और दिलचस्प हो गया. सरकारी मैपिंग सिस्टम में सामान्य लोकेशन की बजाय UTM कोऑर्डिनेट्स का इस्तेमाल किया गया था, जिन्हें समझना आसान नहीं था. लेकिन AI ने इन डेटा पॉइंट्स को कन्वर्ट कर पूरा मैप तैयार कर दिया.
GPS लोकेशन और जमीन की सीमा तक दिखाई
AI ने सभी जमीनों की सीमाएं पहचानने के बाद KML मैप फाइल तैयार की और उसे Google My Maps पर अपलोड किया. इसके जरिए हर जमीन की सटीक GPS लोकेशन और बॉउंड्री साफ दिखाई देने लगी.
जाहिद का कहना है कि अगर AI की मदद नहीं मिलती, तो उन्हें पुराने कागजात, सरकारी दफ्तरों और स्थानीय लोगों पर निर्भर रहना पड़ता. लेकिन AI ने कुछ ही समय में पूरा काम आसान बना दिया.
सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी
जाहिद खान की यह पोस्ट इंटरनेट पर वायरल हो गई. कई लोगों ने इसे AI का सबसे प्रैक्टिकल और असरदार इस्तेमाल बताया. कुछ यूजर्स ने कहा कि भारत में सरकारी रिकॉर्ड्स डिजिटल तो हो चुके हैं, लेकिन आम लोगों के लिए उन्हें इस्तेमाल करना अभी भी बेहद मुश्किल है. ऐसे में AI इन जटिल सिस्टम्स को आसान बना सकता है.
कई टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में AI सरकारी प्रक्रियाओं, जमीन रिकॉर्ड्स, दस्तावेज सत्यापन और भाषा संबंधी समस्याओं को काफी हद तक आसान बना सकता है.
AI अब सिर्फ चैटबॉट नहीं, असली समस्याओं का समाधान भी
यह मामला दिखाता है कि AI अब सिर्फ मनोरंजन या कंटेंट जेनरेशन का टूल नहीं रहा. सही इस्तेमाल होने पर यह ऐसी समस्याएं भी हल कर सकता है जो वर्षों से लोगों को परेशान कर रही हैं.
भारत जैसे देश में जहां करोड़ों सरकारी रिकॉर्ड्स डिजिटल तो हैं लेकिन आम आदमी के लिए समझना मुश्किल है, वहां AI आने वाले समय में बड़ी भूमिका निभा सकता है.
यह भी पढ़ें: AI से नौकरियां खत्म होने की बात से पीछे हटे Sam Altman, 2.5 लाख लोगों की नौकरी जाने के बाद बदला सुर
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By राजीव कुमार
राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.
राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.
डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. Google Discover और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारी भरे होते हैं, बल्कि यूजर्स की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, कॉम्पैरिजन-बेस्ड आर्टिकल्स और एक्सप्लेनर स्टोरीज को यूजर्स काफी पसंद करते हैं.
राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.
जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.
जुड़िए [email protected] पर
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










