AI से नौकरियां खत्म होने की बात से पीछे हटे Sam Altman, 2.5 लाख लोगों की नौकरी जाने के बाद बदला सुर

AI से जॉब खत्म होने की भविष्यवाणी पर अब क्यों बदल रही राय / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के दारियो अमोदेई अब मान रहे हैं कि एआई पूरी तरह इंसानों की नौकरियां नहीं ले पाएगा. बड़े पैमाने पर हुई टेक छंटनी के बाद एआई और इंसानों के साथ काम करने की नयी चर्चा शुरू हो गई है.
भारत में पिछले डेढ़ साल से एआई को लेकर सबसे बड़ा डर यही था कि यह इंसानों की नौकरियां खा जाएगा.ओपनएआई के सीईओ सैमऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के दारियोअमोदेई जैसे बड़े टेक लीडर्स लगातार चेतावनी दे रहे थे कि आने वाले समय में व्हाइट-कॉलर जॉब्स तेजी से खत्म होंगी. कंपनियों ने भी इन बयानों को गंभीरता से लिया और बड़े स्तर पर छंटनी शुरू हो गई. लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है. वही टेक दिग्गज, जो कभी एआई को नौकरी खत्म करने वाली मशीन बता रहे थे, अब कह रहे हैं कि इंसान और एआई साथ मिलकर काम करेंगे. यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब दुनियाभर में 2.5 लाख से ज्यादा टेक कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं.
एआई से जॉब खत्म होने की भविष्यवाणी अब बदल रही
2025 में सैमऑल्टमैन ने कई बार कहा था कि एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर जॉब्स सबसे पहले खत्म होंगी. इससे टेक इंडस्ट्री में डर का माहौल बन गया था. कंपनियों ने लागत कम करने और एआई पर ज्यादा फोकस करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटानी शुरू कर दी. लेकिन अब ऑस्ट्रेलिया में हुए एक कॉन्फ्रेंस के दौरान ऑल्टमैन ने माना कि उनकी शुरुआती सोच पूरी तरह सही नहीं थी.
उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि एआई अब तक बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म कर देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उनके मुताबिक इंसानी बातचीत, अनुभव और निर्णय लेने की क्षमता अब भी बेहद जरूरी है. उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने इस मामले में स्थिति को गलत समझा था.
कंपनियों ने एआई के भरोसे की बड़ी कीमत चुकाई
एआई को लेकर किये गए बड़े-बड़े दावों का असर सीधे टेक इंडस्ट्री पर पड़ा. कई कंपनियों ने यह मान लिया कि एआई इंसानी कर्मचारियों की जगह ले सकता है. इसी सोच के चलते Meta, Amazon और Snap जैसी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर छंटनी की.रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 के शुरुआती महीनों तक 1.15 लाख से ज्यादा टेक कर्मचारी नौकरी खो चुके हैं.
कई कंपनियों ने अपनी छंटनी के पीछे एआई री-स्ट्रक्चरिंग को मुख्य वजह बताया. यही कारण है कि अब जब टेक लीडर्स अपने पुराने बयान बदल रहे हैं, तो लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस डर का फायदा किसे मिला.
एआई इंसानों से सस्ता नहीं, कई मामलों में ज्यादा महंगा
शुरुआत में यह माना जा रहा था कि एआई कंपनियों का खर्च कम करेगा. लेकिन अब कई रिपोर्ट्स बता रही हैं कि बड़े स्तर पर एआई सिस्टम चलाना बेहद महंगा साबित हो रहा है. हाई-कम्प्यूटिंग कॉस्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर और लगातार ट्रेनिंग की जरूरत इसे आसान विकल्प नहीं बनने दे रही.
एंथ्रोपिक के सीईओ दारियोअमोदेई भी अब अपने सुर बदलते नजर आ रहे हैं. पहले वह कहते थे कि आने वाले पांच साल में आधी एंट्री-लेवल नौकरियां खत्म हो सकती हैं. अब उनका कहना है कि इंसान अगर किसी काम का सिर्फ 5 प्रतिशत हिस्सा भी संभालता है, तो एआई बाकी 95 प्रतिशत को बेहतर तरीके से पूरा कर सकता है. यानी फोकस अब रिप्लेसमेंट से ज्यादा कोलैबोरेशन पर है.
सोशल मीडिया पर टेक दिग्गजों को घेरा जा रहा
सैमऑल्टमैन के हालिया बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई. कई यूजर्स ने कहा कि पहले एआई को लेकर डर फैलाया गया और अब उसी बयान से पीछे हटने की कोशिश हो रही है.डेवलपर्स और टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई को लेकर लगातार बदलते बयान इंडस्ट्री और कर्मचारियों दोनों को भ्रमित कर रहे हैं.
कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि 2024 और 2025 में एआई को लेकर फैलाए गए डर ने कंपनियों को कर्मचारियों की कटौती के लिए प्रेरित किया. अब जब एआई उतना सस्ता और आसान विकल्प नहीं दिख रहा, तो कहानी बदली जा रही है.
भविष्य में इंसान और एआई साथ काम करेंगे?
फिलहाल इतना साफ है कि एआई पूरी तरह इंसानों की जगह लेने की स्थिति में नहीं पहुंचा है. कंपनियां अब ऐसे मॉडल पर काम कर रही हैं, जहां एआई कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाए, न कि उन्हें पूरी तरह हटाए. हालांकि नौकरी को लेकर असुरक्षा अभी भी बनी हुई है और आने वाले समय में एआई किस दिशा में जायेगा, यह पूरी तरह साफ नहीं है.
लेकिन एक बात जरूर बदल गई है. अब टेक इंडस्ट्री में यह चर्चा ज्यादा हो रही है कि एआई इंसानों को रिप्लेस नहीं करेगा, बल्कि उनके काम करने का तरीका बदल देगा.
यह भी पढ़ें: Google Search में AI से परेशान हुए लोग, अब DuckDuckGo बना नया सहारा
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By राजीव कुमार
राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.
राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.
डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. Google Discover और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारी भरे होते हैं, बल्कि यूजर्स की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, कॉम्पैरिजन-बेस्ड आर्टिकल्स और एक्सप्लेनर स्टोरीज को यूजर्स काफी पसंद करते हैं.
राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.
जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.
जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










