AI एजेंट करेगा ऑर्डर और पेमेंट! एआई समिट में Mastercard ने दिखाया Agentic Commerce का दम
Published by : Shivani Shah Updated At : 19 Feb 2026 8:56 AM
मास्टरकार्ड एजेंट कॉमर्स/ फोटो-मास्टरकार्ड
AI Impact Summit 2026 में Mastercard ने Agentic Commerce टेक्नोलॉजी को दिखाया, जहां AI एजेंट ने यूजर की परमिशन से सिक्योर और टोकनाइज्ड पेमेंट की. कंपनी का कहना है कि यह पहल डिजिटल पेमेंट को और स्मार्ट, तेज और सुरक्षित बनाएगी और फ्यूचर में AI यूजर्स की ओर से खरीदारी और ट्रांजैक्शन भी संभाल सकेगा.
भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है और अब यह एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है. India AI Impact Summit 2026 में Mastercard ने भारत में पहली बार सर्टिफाइड ‘एजेंटिक कॉमर्स’ (Agentic Commerce) ट्रांजैक्शन का डेमोंस्ट्रेशन दिया. इसका मतलब है कि AI एजेंट यूजर की ओर से सुरक्षित और टोकनाइज्ड तरीके से भुगतान कर सकते हैं. कंपनी का कहना है कि वह AI कंपनियों, फिनटेक और मर्चेंट्स के साथ मिलकर भारत और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में AI-बेस्ड कॉमर्स को तेज करने पर काम कर रही है.
किन बैंकों और प्लेटफॉर्म्स के जरिए हुई पहली पेमेंट?
पहले ट्रांजैक्शन Mastercard कार्ड्स के जरिए किए गए, जो Axis Bank और RBL Bank द्वारा जारी किए गए थे. ये टोकनाइज्ड एजेंटिक खरीदारी Cashfree Payments, Juspay, PayU और Razorpay जैसे पेमेंट एग्रीगेटर्स के जरिए की गई. मर्चेंट्स में Swiggy, Instamart, Vi और Tira जैसे ब्रांड शामिल रहे.
यह पूरा स्ट्रक्चर Mastercard के “Agent Pay Framework” पर बेस्ड है, जो टोकनाइजेशन और सुरक्षा के लिए गाइडलाइंस सेट करता है. वहीं, यूजर्स को फ्यूचर में अपनी पसंद के AI एजेंट चुनने की सुविधा भी मिलेगी, जिससे इंटरऑपरेबिलिटी और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल पॉसिबल हो सके.
AI एजेंट के जरिए पेमेंट में क्या जोखिम हो सकते हैं?
Mastercard AI Garage के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नितेंद्र राजपूत ने बताया, कि AI एजेंट को फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की परमिशन देने में कुछ संभावित जोखिम हो सकती हैं. सबसे बड़ा खतरा “मिसअलाइंड ऑप्टिमाइजेशन” का है, जहां AI स्पीड या एफिशिएंसी को प्रायोरिटी देते हुए ग्राहक के इंटरेस्ट से समझौता कर सकता है. दूसरा खतरा “कास्केडिंग एरर्स” का है, जिसमें ऑटोमेशन के कारण छोटी गलती बड़े नुकसान में बदल सकती है.
तीसरा जोखिम ओवर-रिलायंस का है, जहां यूजर AI के फैसलों पर आंख मूंदकर भरोसा करने लगे. इन जोखिमों से बचने के लिए सिस्टम में क्लैरिटी, लगातार मॉनिटरिंग, इंडिपेंडेंट ऑडिट और मानवीय निगरानी बेहद जरूरी है.
फ्रॉड से कैसे निपटेगा AI
आज के समय में स्कैमर्स भी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. सिंथेटिक आइडेंटिटी, ऑटोमेशन और मशीन लर्निंग के जरिए स्कैम किए जा रहे हैं. Mastercard का कहना है कि उसके फ्रॉड मॉडल “Mixture of Experts” एप्रोच पर काम करते हैं, यानी कई AI इंजन एक साथ पैरेलल तरीके से चलते हैं. इससे मॉडल लगातार एडवांस्ड होते रहते हैं और स्कैमर्स से आगे रहते हैं. कंपनी के मुताबिक, इस स्ट्रैटेजी के जरिए नेटवर्क पर अरबों डॉलर की धोखाधड़ी रोकी जा चुकी है.
भारत की खास डिजिटल डायवर्सिटी, अलग-अलग डिवाइस, असिस्टेड कॉमर्स और सोशल बिहेवियर को ध्यान में रखते हुए लोकलाइज्ड AI मॉडल तैयार किए जाते हैं, ताकि सिस्टम सिर्फ रिएक्टिव नहीं बल्कि स्ट्रक्चरल रूप से मजबूत रहे.
डेटा लोकलाइजेशन और AI ट्रेनिंग पर असर
डेटा लोकलाइजेशन से जुड़ी बहसें फाइनेंशियल सर्विस में AI सिस्टम को नया शेप दे रही है. Mastercard का कहना है कि प्राइवेसी और रेगुलेटरी कंपलाईन्स उसके लिए नॉन-कॉम्प्रोमाइजिंग है.
इसका मतलब है कि AI मॉडल ट्रेनिंग, मॉनिटरिंग और डिप्लॉयमेंट में नेशनल डेटा लिमिट का सम्मान किया जाएगा. हालांकि, फ्रॉड लिमिट को नहीं मानता कई बार पैटर्न पहले ग्लोबल लेवल पर दिखते हैं और बाद में लोकल लेवल पर, इसलिए कंपनी ग्लोबल एल्गोरिद्म को लोकल डेटा के साथ जोड़कर हाइब्रिड मॉडल अपनाती है.
भारत क्यों है खास?
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में भारत में क्रेडिट कार्ड खर्च ₹2.12 लाख करोड़ तक पहुंच गया. डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर छोटे शहरों और गांवों में.
भारत ने दुनिया को दिखाया है कि बड़े पैमाने पर भी डिजिटल पेमेंट सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से चल सकते हैं. यही वजह है कि AI बेस्ड पेमेंट सिस्टम के लिए भारत एक बड़ा टेस्टबेड बन गया है.
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By Shivani Shah
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