सोशल मीडिया बनी महिलाओं की आवाज

Updated at : 23 Jun 2017 11:20 AM (IST)
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सोशल मीडिया बनी महिलाओं की आवाज

ब्राजील : उत्पीड़न के विरोध में गोलबंद हुईं महिलाएं ब्राजील में यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं ने अपनी आवाज सोशल मीडिया पर बुलंद की है. इससे देश में महिलाओं के साथ होनेवाली घटनाओं का अब लोग भी विरोध करने लगे है. नेशनल कंटेंट सेल दुनिया भर में यौन हिंसा की सबसे ऊंची दर ब्राजील में […]

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ब्राजील : उत्पीड़न के विरोध में गोलबंद हुईं महिलाएं
ब्राजील में यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं ने अपनी आवाज सोशल मीडिया पर बुलंद की है. इससे देश में महिलाओं के साथ होनेवाली घटनाओं का अब लोग भी विरोध करने लगे है.
नेशनल कंटेंट सेल
दुनिया भर में यौन हिंसा की सबसे ऊंची दर ब्राजील में है. जिसे देश भी मानता है. लेकिन अब सोशल मीडिया पर महिलाएं इसका विरोध कर रहीं हैं. ब्राजील में एक रियलिटी टीवी शो के एक एपिसोड में ब्राजील में होनेवाली हिंसा पर कार्यक्रम दिखाये जाने के बाद यह ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा. देश अपनी स्थिति पर सोचने के लिए मजबूर हो गया कि उनके यहां इस प्रकार की घटनाएं भी होती हैं.
लोगों को यह देख कर लगा कि महिलाएं दैनिक जीवन में कितनी कठिनाइयों का सामना करती है. ऐसी हिंसा का विरोध करने के लिए चलाये जा रहे कैंपेन थिंक ओल्गा की 26 वर्षीय प्रबंधक ल्यूस बेलो ने बताया कि महिलाओं के साथ होनेवाली हिंसा से महिलाओं को ही लड़ना होगा. टीवी शो कार्यक्रम के चार दिनों के भीतर, ट्विटर पर महिला हिंसा से संबंधित हैशटैग को 82 हजार बार ट्वीट किया गया.
ट्विटर पर साझा की गयी 3,111 रिपोर्टों का विश्लेषण करके ओल्गा ने गणना की कि तो पता चला कि ब्राजील में औसतन 9.7 साल की उम्र में बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की घटना पहली बार होती है. कुछ मामलों में तो पांच साल की बच्चियों के साथ भी ऐसी हरकतें हुई हैं. एक लड़की ने ट्विटर पर लिखा कि जब वह मात्र आठ वर्ष की थी तब उसके साथ बस में एक व्यक्ति ने दुर्व्यवहार किया था. एक अन्य लड़की ने बताया कि सड़क पर लोगों के गलत नजरिये और टिप्पणी के बाद उसने शॉट्स पहनना छोड़ दिया.
इसके बाद कई महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की घटनाओं का जिक्र किया. यहां महिला उत्पिड़न के खिलाफ ओल्गा कैंपन चलानेवाली महिला जुलियाना फारिया ने बताया कि जब वह 11 वर्ष की थी तब उसके साथ पहली बार उत्पिड़न की घटना हुई थी. वह बताती हैं कि जब उन्होंने इस कैंपेन की शुरुआत की थी तो उन्हें विस्वास नहीं था कि महिलाएं इतना प्रखर होकर यौन हिंसा के बारे में बताएंगी.
यह प्रत्याशित आंकड़ों से कहीं ज्यादा था. वे कहती हैं कि जब कोई महिला ऐसी बात बताती है तो लोग उससे पहला सवाल यही करते हैं कि उस वक्त आपने क्या पहना था या तुम वहां अकेली क्या कर रही थी. लोग पीड़ित से ही उल्टे सवाल करने लगते हैं.
लोग यह नहीं समझते की इस प्रकार की मानसिकतावालों का इससे कुछ लेन-देना नहीं है. मैप ऑफ व्यालेंस की रिपोर्ट के अनुसार ब्राजिल में पिछले कुछ सालों में उत्पिड़न की घटनाओं में बाढ़ सी आ गयी है. इन घटनाओं में 10 प्रतिशत से ज्यादा यौन उत्पिड़न की घटनाएं हैं. यौन उत्पिड़न की इन धटाओं में नौ हजार घटनाएं किशोरियों के साथ घटित हुए हैं.
कैंपेन से मिला महिलाओं को लाभ
जर्नलिज्म की एक 20 वर्षीय छात्रा ब्रुना डे लारा ने कहा कि शिक्षक भी उत्पीड़न करते हैं जिले लोग मजाक में लेते हैं. लेकिन उनका लक्ष्य लड़कियां ही होती हैं. हमें यह पहचानने की जरूरत है कि उत्पीड़न है क्या. लारा बताती हैं कि देश में चलनेवाले इन कैंपेन से लड़कियों को बहुत फायदा मिला है.
अब यौन और मनोवैज्ञानिक हिंसा की रिपोर्ट करने के लिए राष्ट्रीय टेलीफोन हॉटलाइन की कॉल में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. फारिया और लारा जैसी महिलाओं का मानना है कि ब्राजील में महिला आंदोलन चरम पर है और ऑनलाइन नेटवर्क के जरिये बहस तेज हुई है. महिलाएं अगर इसी प्रकार पहल करें तो यौन उत्पीड़न जैसी समस्या कम हो सकती है.
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