New Technology: जेल से रिहा होंगे कैदी, GPS से रखी जाएगी उन पर नजर; जानें क्या है प्लान

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 03 Sep 2023 3:06 PM

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यह स्वैच्छिक होगा और विचाराधीन कैदियों के पास विकल्प होगा कि वे उपकरण को पहनें या जेल में रहें. उपकरण की मदद से पुलिस और जेल प्रशासन विचाराधीन कैदियों पर नजर रखने में सक्षम होगा. यदि कोई कैदी ट्रैकर को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास करता है, तो स्थानीय थाने को अलर्ट मिलेगा और त्वरित कार्रवाई की जाएगी.

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gps tracking technology for prisoners : ओडिशा की जेलों में कैदियों की संख्या कम करने के लिए एक बड़ी योजना पर काम किया जा रहा है. गैर-जघन्य आरोपों का सामना कर रहे विचाराधीन कैदियों को अब जेल से आजाद कर दिया जाएगा. उनकी ट्रैकिंग के लिए जीपीएस-सक्षम ट्रैकिंग उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा. कैदियों पर जीपीएस लगाकर उनकी निगरानी करने वाला ओडिशा पहला राज्य बन जाएगा. ऐसा करने का उद्देश्य जेल की भीड़ को कम करना और कैदियों पर होने वाले सरकारी खर्च में कटौती करना है. इस तरह की डिवाइस का प्रयोग अमेरिका में हो रहा है.

एड़ी में लगेगी जीपीएस वाली ट्रैकिंग डिवाइस

ओडिशा जेल निदेशालय ने जेल में भीड़ कम करने के लिए राज्य सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखा है कि उसे विचाराधीन कैदियों की एड़ी में जीपीएस युक्त ट्रैकिंग उपकरण लगाने की मंजूरी दी जाए और कैदियों को जेल की चहारदीवारी से आजाद कर दिया जाए. जेल महानिदेशक मनोज छाबड़ा ने कहा कि यदि प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है और इस पर अमल होता है, तो ओडिशा गैर-जघन्य अपराधों में आरोपी विचाराधीन कैदियों को रिहा करने वाला देश में पहला राज्य होगा.

80 फीसदी कैदी विचाराधीन

छाबड़ा ने कहा कि ओडिशा समेत देशभर की जेलों में कैदियों की भीड़ सबसे बड़ी समस्या है और करीब 80 फीसदी कैदी विचाराधीन कैदी हैं. उन्होंने कहा कि इनमें से कई कैदी उन मामलों में जेल में बंद हैं, जिनमें सात साल से कम की सजा का प्रावधान है.

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ताकि जेल में भीड़ कम हो सके

ओडिशा सरकार को भेजे गये विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक, जीपीएस युक्त ट्रैकिंग उपकरण उन कैदियों की एड़ी में लगाये जाएंगे जो उन गैर- जघन्य मामलों में आरोपों का सामना कर रहे हैं जिनमें अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है ताकि जेल में भीड़ कम हो सके.

यह स्वैच्छिक होगा

छाबड़ा ने कहा कि यह स्वैच्छिक होगा और विचाराधीन कैदियों के पास विकल्प होगा कि वे उपकरण को पहनें या फिर जेल में रहें. उन्होंने कहा कि उपकरण की मदद से पुलिस और जेल प्रशासन विचाराधीन कैदियों पर नजर रखने में सक्षम होगा. उन्होंने कहा कि यदि कोई विचाराधीन कैदी ट्रैकर को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास करता है, तो स्थानीय थाने को एक अलर्ट मिलेगा और त्वरित कार्रवाई की जाएगी.

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मानवाधिकार का उल्लंघन तो नहीं होगा?

क्या इस कदम से मानवाधिकार का उल्लंघन होगा, इस बारे में पूछे जाने पर छाबड़ा ने कहा, मुझे लगता है कि हमारे प्रयास का मानवाधिकार कार्यकर्ता समर्थन करेंगे क्योंकि विचाराधीन कैदी जेल में रहने के बजाय आजाद रहेंगे. उन्हें उपकरण को एड़ी के आसपास वाली जगह पहनना होगा, जिसे पतलून से ढंका जा सकता है.

खर्च की बात

अभी इस उपकरण की कीमत के बारे में जानकारी नहीं है, क्योंकि इनका निर्माण देश में नहीं होता. लेकिन छाबड़ा ने कहा कि इस उपकरण की कीमत एक विचाराधीन कैदी पर आने वाले सरकार के खर्च से बहुत कम होगी. उन्होंने कहा कि जेल में एक विचाराधीन कैदी पर हर साल करीब एक लाख रुपये का खर्च आता है, लेकिन ट्रैकिंग उपकरण की कीमत एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए. भाषा इनपुट के साथ

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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