केंद्र ने कर रखी है बंगाल की आर्थिक नाकेबंदी

राज्यसभा में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने केंद्र सरकार पर गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव करने और प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र ने पश्चिम बंगाल की आर्थिक नाकेबंदी कर रखी है.
एजेंसियां, कोलकाता/नयी दिल्ली
राज्यसभा में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने केंद्र सरकार पर गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव करने और प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र ने पश्चिम बंगाल की आर्थिक नाकेबंदी कर रखी है. उच्च सदन में आम बजट से जुड़े विनियोग विधेयक और जम्मू कश्मीर के बजट से जुड़े विनियोग विधेयकों पर संयुक्त चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के जवाहर सरकार ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के 34 हजार करोड़ रुपये रोक रखे हैं. उन्होंने कहा कि यह धनराशि क्यों रोकी गयी, इसके बारे में वह निश्चित तौर पर कुछ नहीं कह सकते. लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि यह प्रतिशोध की नीति के कारण किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की वर्तमान सरकार ने पश्चिम बंगाल सरकार की आर्थिक नाकेबंदी कर रखी है. उन्होंने प्रश्न उठाया कि भारत सरकार ने उपकर और अतिरिक्त शुल्क को अविभाज्य पूल में क्यों रखा है. इसे राज्यों को क्यों नहीं दिया जाना चाहिए? श्री सरकार ने कहा कि केंद्र के संकेत समझ कर बैंक भी अलग-अलग राज्यों में एक समान तरीके से ऋण नहीं दे रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे संघवाद की रीढ़ की हड्डी टूट जायेगी.””पीएलआइ से जुड़े सभी तथ्य सदन में रखे जायें””
तृणमूल सांसद जवाहर सरकार ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी गयी, क्योंकि ‘हम आपके साथ नहीं हैं.’ तृणमूल सदस्य ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआइ) का उल्लेख करते हुए कहा कि 70 प्रतिशत पीएलआइ केवल एक राज्य को गया है और वह राज्य है गुजरात. उन्होंने वित्त मंत्री को चुनौती दी कि वह उनके इस दावे को गलत साबित करके दिखायें. उन्होंने सरकार से मांग की कि पीएलआइ से जुड़े सारे दस्तावेजों को सदन के पटल पर रखा जाये, ताकि आम जनता को इसके बारे में जानकारी मिल सके. जीवन व स्वास्थ्य बीमा से जीएसटी हटायें : नदीमुलतृणमूल कांग्रेस के ही मोहम्मद नदीमुल हक ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आज डिजिटल युग में कर का नोटिस इमेल या मैसेज के रूप में आ जाता है. उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि ऐसे नोटिस को केवल ऑफिस के समय और कामकाजी दिनों में ही भेजा जाये. उन्होंने यह मांग भी की कि ऐसे नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया जाना चाहिए. मोहम्मद नदीमुल हक ने मांग की कि जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पर लगनेवाले जीएसटी को हटाया जाना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि इन दोनों पर जीएसटी लगाया जाना ‘पाप’ है.
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