मालदा शहर में चांदी की मोहरों से भरा घड़ा निकला

मालदा. जमीन खुदाई के दौरान मोहरों (प्राचीन सिक्के) से भरा एक घड़ा बरामद हुआ. इसके बाद स्थानीय लोगों ने इन मोहरों की लूटपाट शुरू कर दी. घटना की खबर मिलने के बाद पुलिस ने घर-घर की तलाशी अभियान चलाकर प्राचीन सिक्कों की बरामदगी का अभियान शुरू किया. और मोहरें पाने की उम्मीद में इलाके के […]
यह सनसनीखेज घटना सोमवार रात मालदा शहर के 22 नंबर वार्ड के महानंदापल्ली के सुकांतपल्ली इलाके में घटी. नगरपालिका की ओर से कुछ श्रमिक पाइप लाइन की खुदाई का काम कर रहे थे. इसी खुदाई के दौरान मोहरों से भरा एक घड़ा बरामद हुआ. यह खबर तेजी से पूरे इलाके में फैल गयी और आसपास के लोग बड़ी संख्या में वहां पहुंच गये. आरोप है कि स्थानीय लोगों ने कुछ ही देर में 100 से अधिक मोहरों को लूट लिया. घटना की खबर पाकर काफी देर बाद इंगलिश बाजार थाने की पुलिस मौके पर पहुंची. लेकिन रात में पुलिस के हाथ कुछ नहीं आया. सिर्फ टूटा हुआ खाली घड़ा मिला.
जमीन के नीचे मोहरें मिलने की खबर इलाके में फैलने के बाद स्थानीय लोग खुदाई स्थल के आसपास पहुंचने लगे. लोगों ने रात भर कुदाल और फावड़ा से खुदाई की. लेकिन और कोई घड़ा बरामद नहीं हुआ. सुकांतपल्ली इलाके निवासी गणेश हालदार और प्रदीप साहा ने बताया कि हमने अपनी आंखों से मोहरों से भरा घड़ा देखा था. मोहरें जगमग कर रही थीं. खुदाई में लगे मजदूर बहुत सी मोहरें लेकर भाग गये. साथ ही इलाके के लोग भी आनन-फानन में मोहरें लूट कर भाग गये. इलाके के लोगों का कहना है कि मालदा में ऐसी किसी घटना के बारे में उन्होंने पहले कभी नहीं सुना था. मंगलवार की सुबह इंगलिश बाजार थाना की पुलिस विशाल दल-बल के साथ सुकांतपल्ली इलाके में मोहरों की बरामदगी के लिए अभियान में उतरी.
जिले के इतिहासकार कमल बसाक ने बताया कि मोहरों की बरामदगी में कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है. मालदा जिला एक समय राजशाही के अधीन था. इसके बाद यहां ब्रिटिश शासन स्थापित हुआ. उन्होंने कहा कि मोहरें देखने में चांदी की लग रही हैं. इनके मौजूद मूल्य के बारे में अनुमान लगाना मुश्किल है.
यह सरकारी संपत्ति है, जिसे संरक्षित करके रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की है. उन्होंने कहा कि मोहरों पर दर्ज लिपि को देखकर लगता है कि ये सेन काल की हैं. ये मोहरें इतिहास को एक नयी दिशा दे सकते हैं. किसी जमाने में मालदा का नाम बागबाड़ी और बल्लालबाड़ी था. राजा बल्लाल सेन का राज-काज और महल यही पर था. जिस जगह से मोहरें बरामद हुई हैं, उसके पास ही आरापुर कोतवाली है. वहीं पर बल्लाल सेन का किला था. इस इलाके में खुदाई होने से इस तरह की और भी प्राचीन मुद्राएं और अन्य संपदा बरामद हो सकती हैं.
इधर, 22 नंबर वार्ड के पार्षद नरेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि मेरे इलाके से मोहरों से भरा घड़ा बरामद हुआ है. मैंने इलाके के लोगों से कहा है कि जो लोग लूटपाट करके मोहरें ले गये हैं, वह उसे पुलिस और प्रशासन को सौंप दें, क्योंकि यह सरकारी संपत्ति है. जिला अधिकारी शरद द्विवेदी ने बताया कि मोहरों की बरामदगी की जगह पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी गये हैं. इस पूरे मामले को देखने का निर्देश महकमा अधिकारी को दिया गया है.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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