पूजा बोनस को लेकर चाय बागान श्रमिक यूनियनों ने कमर कसी

Published at :03 Aug 2016 1:04 AM (IST)
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पूजा बोनस को लेकर चाय बागान श्रमिक यूनियनों ने कमर कसी

जलपाईगुड़ी. बाढ़ से हुए नुकसान का मसला चाय बागान मालिक चाहे जितना बढ़-चढ़कर उठायें, इस बार हमलोग चाय उद्योग के मजदूरों को उनके पूजा बोनस के हक से वंचित नहीं होने देंगे. बीते साल 20 प्रतिशत पूजा बोनस दिया गया था. इस बार भी हम लोग इतना भी बोनस मांगेंगे. आगामी 20 से 25 अगस्त […]

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जलपाईगुड़ी. बाढ़ से हुए नुकसान का मसला चाय बागान मालिक चाहे जितना बढ़-चढ़कर उठायें, इस बार हमलोग चाय उद्योग के मजदूरों को उनके पूजा बोनस के हक से वंचित नहीं होने देंगे. बीते साल 20 प्रतिशत पूजा बोनस दिया गया था. इस बार भी हम लोग इतना भी बोनस मांगेंगे. आगामी 20 से 25 अगस्त को कोलकाता के बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स के भवन में बागान मालिकों के साथ पूजा बोनस को लेकर होनेवाली द्विपक्षीय बैठक में यह मांग श्रमिक यूनियनें रखेंगी.

इस बैठक से पहले कोलकाता के ही नये सचिवालय में त्रिपक्षीय न्यूनतम वेतन सलाहकार समिति की दूसरी बैठक भी होने जा रही है. इन दोनों बैठकों के पहले चाय श्रमिक यूनियनों के ज्वाइंट फोरम की बैठक होगी जिसमें श्रमिकों के हित में रणनीति बनायी जायेगी.


उल्लेखनीय है कि बीते साल चाय उद्योग में ए, बी, सी और डी ग्रुप के श्रमिकों और कर्मचारियों को 20 प्रतिशत बोनस दिया गया था. लेकिन इस बार बाढ़ की वजह से डुवार्स के चाय बागानों को भारी नुकसान हुआ है. इंडियन टी एसोसिएशन की डुवार्स शाखा के सचिव सुमंत गुहठाकुरता ने बताया कि इस बार पूजा बोनस के समय चाय बागान बाढ़ के चलते भारी नुकसान का सामना कर रहे हैं.

इस बारे में कांग्रेस से जुड़े श्रमिक संगठन एनयूपीडब्लू के राज्य संयुक्त महासचिव मणिकुमार दार्नाल ने बताया कि साल 2004 और 1999 में भी चाय उद्योग को कई कारणों से नुकसान हुआ था, लेकिन तब भी पूजा बोनस भुगतान का समझौता हुआ था. अभी बागानों में सिर्फ 132 रुपये दिहाड़ी मजदूरी दी जाती है. चाय बागानों के श्रमिक ज्यादातर परिसेवाएं जैसे घर, पेयजल, पेंशन, सस्ता अनाज आदि राज्य सरकार से पा रहे हैं. फिर प्लांटेशन लेबर एक्ट को रखने का क्या फायदा है? मणिकुमार ने कहा कि वह न्यूनतम वेतन बोर्ड के सदस्य की हैसियत से आगामी 9 अगस्त को होनेवाली बैठक में चाय श्रमिकों के लिए न्यूनतम दिहाड़ी मजदूरी 300 रुपये करने की मांग रखेंगे. उन्होंने कहा कि अगर बागानों में न्यूनतम मजदूरी लागू नहीं होती है, तो और भी चाय श्रमिक दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने को बाध्य होंगे. उन्होंने पुख्ता आवाज में कहा कि किसी सूरत में वह बीते साल की बोनस दर 20 प्रतिशत से कम पर मानने को राजी नहीं होंगे.

सीटू नेता तथा चाय श्रमिक यूनियनों के ज्वाइंट फोरम के कन्वेनर जियाउर आलम ने बताया बीते साल फरवरी में न्यूनतम वेतन समिति की बैठक हुई थी. आगामी 9 अगस्त को दूसरी बैठक है. उन्होंने कहा कि केरल के चाय श्रमिकों को 300 रुपये मजदूरी मिलती है. सरकार की इच्छा हो तो यहां भी केरल की तर्ज पर मजदूरी लागू की जा सकती है. उन्होंने कहा कि अभी जो हाल है उसमें चाय श्रमिकों की संख्या घटती ही जायेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि बहुत से चाय बागानों ने मजदूरों के पीएफ, ग्रेच्युटी आदि का पैसा दबा रखा है, यहां तक कि पिछले साल का बोनस अब तक नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि बाढ़ कोई मसला नहीं है. पूरे साल बागान मुनाफा कमाते हैं. इसलिए बोनस तो देना ही होगा. उन्होंने कहा कि आगामी 4 अगस्त को बानरहाट में ज्वाइंट फोरम की बैठक है. इसमें केरल की तर्ज पर 300 रुपये दैनिक मजदूरी लागू करने और 20 प्रतिशत पूजा बोनस देने का प्रस्ताव रखा जायेगा.


इधर इंडियन टी प्लांटर्स एसोसिएशन के एक अधिकारी अमृतांशु चक्रवर्ती ने बताया कि पूजा बोनस के लिए कोलकाता में बैठक तय हो गयी है. बाढ़ से बागानों को भारी नुकसान हुआ है. बैठक में इस मसले को रखा जायेगा. कितने प्रतिशत बोनस दिया जायेगा, इस बारे में उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

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