राहत: राहत शिविरों में अभी भी 25 सौ से अधिक लोग, धीरे-धीरे सामान्य हो रही है स्थिति

Published at :27 Jul 2016 6:56 AM (IST)
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राहत: राहत शिविरों में अभी भी 25 सौ से अधिक लोग, धीरे-धीरे सामान्य हो रही है स्थिति

धूपगुड़ी. पिछले 24 घंटों में बारिश की कमी के बाद धूपगुड़ी तथा इसके आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. हालांकि अभी भी विभिन्न वार्ड बाढ़ की पानी में जलमग्न हैं, लेकिन जल स्तर में कमी आयी है. यही वजह है कि कई बाढ़ पीड़ित अपने-अपने घर लौटने लगे हैं. […]

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धूपगुड़ी. पिछले 24 घंटों में बारिश की कमी के बाद धूपगुड़ी तथा इसके आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. हालांकि अभी भी विभिन्न वार्ड बाढ़ की पानी में जलमग्न हैं, लेकिन जल स्तर में कमी आयी है. यही वजह है कि कई बाढ़ पीड़ित अपने-अपने घर लौटने लगे हैं. मंगलवार की सुबह से सैकड़ों बाढ़ पीड़ित घर वापस लौट गये. ऐसे अभी भी काफी संख्या में बाढ़ पीड़ित विभिन्न राहत शिविरों में शरण लिये हुए हैं.

धूपगुड़ी ब्लॉक में कई स्थानों पर बने राहत शिविरों में 25 सौ से 27 सौ बाढ़ पीड़ित शरण लिये हुए हैं. इन लोगों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है. बाढ़ पीड़ितों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए ब्लॉक प्रशासन की निगरानी इन शिविरों पर बनी हुई है. धूपगुड़ी के बीडीओ शुभंकर राय तथा अन्य अधिकारियों ने आज विभिन्न राहत शिविरों का दौरा किया और राहत कार्यों की समीक्षा की. बीडीओ श्री राय ने बताया कि धूपगुड़ी ब्लॉक में कुल नौ राहत शिविर बनाये गये हैं.

इनमें से जलढाका नदी से प्लावित कुशामारी, दुदुआ नदी से प्लावित मुंडापाड़ा, बाड़ोहलिया, घाटपार सरगांव, शीशापाड़ा, गधेरकोठी आदि इलाके के बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए ये राहत शिविर बनाये गये हैं. उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग के कर्मचारियों को भी मैदान में उतार दिया है.

इधर, राहत शिविरों में शरण लिये हुए लोग तत्काल स्थिति सामान्य होने के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि लगातार बारिश की वजह से बाढ़ ने सबका जीना दुभर कर दिया है. किसी भी तरह से वह लोग अपने घरों को लौटना चाहते हैं. कुरशामारी में बने एक राहत शिविर में शरण लेने वाले रणजीत सरकार ने कहा कि वह तथा उसके परिवार के लोग यहां के प्राइमरी स्कूल में पिछले चार दिनों से पड़े हुए हैं. प्रशासन की ओर से खिचड़ी तथा चिउरा आदि दिये जा रहे हैं. उनका काम तो किसी तरह से चल जाता है, लेकिन बच्चों को परेशानी हो रही है. हालांकि मंगलवार से बच्चों के लिए भी दूध मंगाये जा रहे हैं. फिर भी यह सभी जल्द-जल्दी अपने-अपने घरों को लौटना चाहते हैं.

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