संघर्ष: जिनके लिए जिंदगी रोज है नयी जंग

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वीरपाड़ा (अलीपुरद्वार): रविवार को एक तरफ केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन चाय बागानों का दौरा करने उत्तर बंगाल पहुंचीं, तो दूसरी तरफ चाय श्रमिक अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के लिए संघर्ष करते दिखे. डंकन्स समूह के 14 बंद व अचल चाय बागानों में श्रमिकों की स्थिति दयनीय है. डुवार्स के इन चाय बागानों में चिकित्सा, […]

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वीरपाड़ा (अलीपुरद्वार): रविवार को एक तरफ केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन चाय बागानों का दौरा करने उत्तर बंगाल पहुंचीं, तो दूसरी तरफ चाय श्रमिक अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के लिए संघर्ष करते दिखे. डंकन्स समूह के 14 बंद व अचल चाय बागानों में श्रमिकों की स्थिति दयनीय है. डुवार्स के इन चाय बागानों में चिकित्सा, रोजगार, शिक्षा, खाद्यान्न कुछ भी उपलब्ध नहीं है. भूखे पेट या आधा पेट खाकर लोग नदी से पत्थर तोड़कर किसी तरह जीवन बसर कर रहे हैं.

अधिकतर लोगों को सरकारी सहायता नहीं मिल पा रही है. बागानों की अनेक किशोरियों को मुख्यमंत्री की सबुज साथी योजना के तहत साइकिल, कन्याश्री व अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. इन बागानों के ज्यादा परिवारों के पुरुष व महिलाएं काम की तलाश में देश के विभिन्न राज्यों में यहां तक कि दुबई तक चले गये हैं. बागान में स्थित दुकानों में कोई बिक्री नहीं है. इन दुकानों में श्रमिकों की बड़ी रकम उधार है. डंकन्स समूह के अलीपुरद्वार जिले में स्थित डिमडिमा, धुमचीपाड़ा, हांटापाड़ा, ग्यारगेंडा, वीरपाड़ा समेत कई चाय बागानों में बेरोजगार हुए चाय श्रमिक इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं.
मदारीहाट के धुमचीपाड़ा चाय बागान के श्रमिक सरकार की तरफ से कुछ सहायता और सिर्फ 120 रुपये पाकर भी खुश हैं. लेकिन बागान में चिकित्सा परिसेवा और रोजगार नहीं होने पर दयमंती मुंडा और गेदू पाइक जैसे कई श्रमिक नाराजगी भी जाहिर कर रहे हैं. इस बागान में बुधइन मालपहाड़ी नामक एक महिला श्रमिक के परिवार में पति को लेकर कुल सात लोग हैं. इन्हें आधा पेट खाकर गुजारा करना पड़ रहा है. सरकारी सहायता के तहत इन्हें जो राशन मिलता है, वह इनके लिए पर्याप्त नहीं होता. इन्हें चाय गाछ का फूल, जंगली कच्चू आदि खाकर किसी तरह पेट भरना पड़ता है.
बागान में काफी दिनों से दुकान चला रहे गोपी पाइक बताते हैं कि बगान में लगभग एक साल से काम पूरी तरह बंद है. उसी समय से उनकी पत्नी घरेलू नौकरानी का काम करने दुबई गई हुई है. उनकी दुकान पर श्रमिकों का बड़ा बकाया है. बिक्री भी घटकर आधे से कम रह गयी है. धुमचीपाड़ा ग्राम पंचायत सदस्य लुसिया टोप्पो का आरोप है कि सौ दिन काम योजना का पैसा भी श्रमिकों को नहीं मिल रहा है. बहुत से श्रमिकों को सरकारी भत्ता भी नहीं मिला है. बकाया पैसा नहीं मिलने तक श्रमिक सौ दिन योजना के तहत और काम नहीं करना चाहते हैं.
एक बड़ी समस्या यह भी है कि बागान में अवकाश प्राप्त एवं अस्थायी श्रमिक सरकारी सहायता सुविधाओं से वंचित हैं. मोहम्मद अली और जयराम उरांव का आरोप है कि बागान इलाके में सभी तरह की सरकारी सहायता, चाहे वह चावल, दाल और गेहूं हो या फिर आर्थिक सहायता, सिर्फ स्थायी श्रमिकों को मिल रही है. अवकाश प्राप्त एवं अस्थायी श्रमिकों को कोई मदद नहीं मिल रही. धुमचीपाड़ा की एक किशोरी मृदुला पाइक अनुसूचित जाति श्रेणी के तहत आती है. लेकिन इसके बावजूद उसे साइकिल नहीं मिली है. वह कन्याश्री योजना की सुविधा से भी वंचित है. उसे रोज पैदल ही स्कूल जाना पड़ता है.
डंकन समूह के हांटापाड़ा चाय बागान के श्रमिकों की हालत भी खराब है. इस बागान की एक महिला श्रमिक सरस्वती मल्लिक राय का बेटा काम की तलाश में केरल गया हुआ है. सरस्वती की शारीरिक अवस्था काम-काज करने लायक नहीं है. हांटापाड़ा चाय बागान में पेयजल की समस्या भी अत्यंत गंभीर है. सजलधारा योजना का इतना प्रचार-प्रसार किये जाने के बावजूद यहां का हाल देखकर आश्चर्य होता है. अपने चाय बागान में पेयजल समस्या के समाधान को लेकर वीरपाड़ा, मदारीहाट पंचायत समिति की तृणमूल सदस्य संजीला कुजूर के जूते घिस गये हैं. लोगों को सुबह-शाम और देर रात में भी पाइप लाइन के सामने पानी की आस में लाइन में लगे देखा जा सकता है.
डंकन्स समूह का एक और अचल चाय बागान है ग्यारगेंडा. अन्य चाय बागानों की तरह यहां के श्रमिक भी बांगरी नदी में पत्थर तोड़कर किसी तरह दो पैसे का काम कर लेते हैं. चाहे फिर वह बूढ़ा-बुजुर्ग हो या फिर बच्चा. सभी को काम करना पड़ता है. चाय बागानों में आज भी मालिक के माध्यम से राशन आपूर्ति व्यवस्था चलती है. लेकिन बागान बंद होने और मालिक पक्ष के बागान छोड़कर चले जाने के बावजूद श्रमिक सरकारी राशन व्यवस्था से वंचित हैं. बंद, बीमार और अचल चाय बागानों में स्वयंसहायता समूहों के माध्यम से राज्य का खाद्य विभाग राशन व्यवस्था चालू कर रहा है. जलपाईगुड़ी जिले में 83 और अलीपुरद्वार जिले में 54 चाय बागानों में यह व्यवस्था शुरू की जा रही है. इसके लिए खाद्य विभाग स्वयंसहायता समूहों को कमीशन देगा.
ऐसे हालात के बीच रविवार को केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमन ने चाय बागानों का दौरा किया. श्रमिक उनसे उम्मीद लगाये बैठे हैं, लेकिन नतीजा क्या होगा, यह तो वक्त ही बतायेगा.
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