जब्त गायों की बीएसएफ ने चोरी-चुपके की नीलाम !

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सिलीगुड़ी : मवेशी विक्रेताओं ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के राधाबाड़ी कैंप पर धांधली करने का आरोप लगाया है. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान उत्तर दिनाजपुर जिले के दालखोला निवासी व मवेशी विक्रेता मोहम्मद इफ्तखार अहमद ने बताया कि 31 जुलाई की रात दो बड़े कंटेनर पर लदीं कुल 74 गायों को […]

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सिलीगुड़ी : मवेशी विक्रेताओं ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के राधाबाड़ी कैंप पर धांधली करने का आरोप लगाया है. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान उत्तर दिनाजपुर जिले के दालखोला निवासी व मवेशी विक्रेता मोहम्मद इफ्तखार अहमद ने बताया कि 31 जुलाई की रात दो बड़े कंटेनर पर लदीं कुल 74 गायों को राधाबाड़ी कैंप के बीएसएफ अधिकारियों ने फूलबाड़ी टोल प्लाजा के पास से जबरन जब्त कर लिया.
साथ ही दोनों कंटेनरों के चालक समेत 10 गाय मालिकों को भी गिरफ्तार किया गया. बाद में बीएसएफ अधिकारियों ने सभी को छोड़ दिया. लेकिन मवेशियों से जुड़े वैध दस्तावेज होने के बावजूद गायों को नहीं छोड़ा गया.
बीएसएफ अधिकारियों ने हमें 3 अगस्त यानि सोमवार को कैम्प में आकर मुलाकात करने की बात कही थी. लेकिन बीएसएफ अधिकारियों ने रविवार को ही अवैध तरीके से सभी गायों की चोरी चुपके नीलामी कर दी. इसकी जानकारी भी बीएसएफ ने गाय मालिकों को नहीं दी. इस बाबद बीएसएफ अधिकारी अब अपना मुंह नहीं खोल रहे. इफ्तखार ने बताया कि 10 मवेशी बिक्रेताओं को मिलाकर हमारा एक सिंडिकेट है.
हमलोगों ने इन 74 गायों को 31 जुलाई को उत्तर दिनाजपुर जिले के पांजीपाड़ा हाट से खरीदा था और उसी दिन कैंटेनर पर लादकर अलीपुरद्वार जिले के सोनापुर हाट ले जा रहे थे. इन मवेशियों से जुड़ी उत्तर दिनाजपुर जिला रेगुलेटेड मार्केट कमेटी की मनी रिसिप्ट एवं पांजीपाड़ा हाट कैटल मार्केट की भी मनी रिसिप्ट एवं अन्य सरकारी दस्तावेज भी हमारे पास मौजूद है.
हम इन मवेशियों को न तो कहीं विदेशों में या अन्य दूसरे राज्य में ले जा रहे थे. बंगाल से इन मवेशियों को खरीदा गया था और बंगाल में ही दूसरे स्थान बेचने जा रहे थे. सही तरीके से मवेशियों का बिक्री करना कोई अवैध धंधा नहीं है, लेकिन बीएसएफ अधिकारियों ने दस्तावेजों को देखना भी मुनासिब नहीं समझा और सभी गायों को अवैध घोषित कर दिया.
हम सभी 10 मवेशी बिक्रेताओं की जिंदगी भर की जमा पूंजी इन गायों में लगी थी. हम लोगों ने करीब साढ़े बारह लाख रुपये में इन गायों को खरीदा था. अब हमारे पास रुपये कहां से आयेंगे और आगे की जिंदगी कैसे चलेगी.
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