सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में अभी भी डॉक्टरों की संख्या कम

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सिलीगुड़ी: राज्य के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी विश्वरूप सतपति के कल सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के दौरे का स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर करे विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्वागत किया है. इसके साथ ही इन लोगों ने सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की भी मांग की है. श्री सतपति ने कल […]

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सिलीगुड़ी: राज्य के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी विश्वरूप सतपति के कल सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के दौरे का स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर करे विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्वागत किया है. इसके साथ ही इन लोगों ने सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की भी मांग की है. श्री सतपति ने कल बुधवार को सिलीगुड़ी जिला अस्पताल का दौरा किया था और उन्होंने डॉक्टरों तथा अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की थी.

बाद में उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा था कि सिलीगुड़ी तथा इसके आसपास के इलाकों के मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल में कई सेवाओं की शुरूआत की गई है. डायलेसिस यूनिट में स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति की गई है और इसके साथ ही यहां डायलेसिस का काम भी शुरू हो गया है. इसके अलावा नये इंनेस्थिसिस्ट डॉक्टर की भी नियुक्ति की गई है. डॉक्टर सतपति के इस दौरे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नॉर्थ बंगाल वोलंटियरी ब्लड डोनर फोरम के अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की गई है. नये इंनेस्थिसिस्ट तथा डायलेसिस यूनिट में नये डॉक्टर की नियुक्ति एक स्वागतयोग्य कदम है. उसके बाद भी सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में काफी कमियां हैं, जिसको आने वाले दिनों में दूर करने की आवश्यकता है. उनमें सबसे बड़ी कमी मेडिसीन विभाग में डॉक्टरों की पर्याप्त संख्या में नियुक्ति नहीं होना है. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दिनों के मुकाबले में वर्तमान में मेडिसीन विभाग में भी हालांकि अधिक डॉक्टर हैं. पहले सिर्फ दो डॉक्टरों से ही मेडिसीन विभाग का काम-काज चलाया जा रहा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इस विभाग में दो और डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है.

डॉ शिरसेन्दू पाल, डॉ सोमो घोष, डॉ सिद्धार्थ विश्वास तथा डॉ ओपू अधिकारी मेडिसीन विभाग में तैनात हैं. मेडिसीन विभाग में रोगियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए सिर्फ चार डॉक्टरों से काम चलाना संभव नहीं है. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में भारी संख्या में रोगी अपनी चिकित्सा कराने आते हैं. सिलीगुड़ी तथा इसके आसपास के इलाके के रोगी अपनी चिकित्सा के लिए इसी अस्पताल पर निर्भरशील हैं. रोगियों की सबसे अधिक भीड़ मेडिसीन विभाग में ही होती है. ऐसे में इस विभाग में और भी अधिक डॉक्टरों की नियुक्ति करने की मांग श्री चटर्जी ने की. इसके साथ ही चटर्जी ने सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में कार्य कर रहे डॉक्टरों में ‘रेफर टू मेडिकल’ की प्रवृत्ति बंद करने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने इन दिनों किसी भी प्रकार के मरीज को मेडिकल कॉलेज भेज देने की प्रवृत्ति काफी बढ़ गई है.

छोटी से छोटी बीमारी के लिए भी सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर देते हैं. इससे गरीब मरीजों तथा उनके परिवार वालों को काफी परेशानी होती है. अस्पताल प्रबंधन द्वारा पर्ची में रेफर टू मेडिकल लिखकर अपना पल्ला झाड़ लेने की प्रवृत्ति है. रोगियों को जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज भेजने की कोई व्यवस्था नहीं की जाती. रोगियों के परिवार वालों को अपने खर्च पर मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ता है. इससे दो तरह की परेशानी होती है. एक ओर जहां रोगी के परिवार वाले मुश्किल में फंसते हैं, वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज में रोगियों की अतिरिक्त भीड़ से चिकित्सा सेवा प्रभावित होती है.

बेड बढ़े 12, तो कम हुए 25
उन्होंने यह भी आरोप लगाते हुए कहा कि सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में पिछले दिनों सीसीयू तथा इमर्जेसी में बेडों की संख्या तो बढ़ायी गई, लेकिन दूसरी ओर जेनरल वार्ड में बेडों की संख्या में कमी कर दी गई है. श्री चटर्जी ने कहा कि सीसीयू में छह बेड तथा इमज्रेन्सी में छह बेड बढ़ाये गये हैं. इन दोनों विभागों को मिलाकर कुल 12 बेड बढ़ाये गये हैं. दूसरी तरफ जेनरल वार्ड से 25 बेड कम कर दिये गये हैं. राज्य स्वास्थ्य विभाग को जेनरल वार्ड के बेडों की संख्या में कटौती नहीं करनी चाहिए थी.
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