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चुनाव के दौरान जमीन पट्टा देने की घोषणा हवा-हवाई : एडवर्ड

Updated at : 27 Nov 2019 2:04 AM (IST)
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चुनाव के दौरान जमीन पट्टा देने की घोषणा हवा-हवाई : एडवर्ड

दार्जिलिंग : मुख्यमंत्री की ओर से पहाड़वासियों के लिए जमीन का पर्जा पट्टा देने की घोषणा सिर्फ हवा-हवाई साबित हुई. उक्त बातें गोरामुमो के दार्जिलिंग ब्रांच कमेटी के अध्यक्ष एवं केंद्रीय कमेटी सदस्य अजय एडवर्ड ने कही. पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री एडवर्ड ने कहा कि पिछले कुछ माह पहले हुए लोकसभा और दार्जिलिंग […]

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दार्जिलिंग : मुख्यमंत्री की ओर से पहाड़वासियों के लिए जमीन का पर्जा पट्टा देने की घोषणा सिर्फ हवा-हवाई साबित हुई. उक्त बातें गोरामुमो के दार्जिलिंग ब्रांच कमेटी के अध्यक्ष एवं केंद्रीय कमेटी सदस्य अजय एडवर्ड ने कही. पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री एडवर्ड ने कहा कि पिछले कुछ माह पहले हुए लोकसभा और दार्जिलिंग विधानसभा उपचुनाव के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के चाय श्रमिकों से लेकर वन बस्तियों में सदियों से रहने वाले लोगों के घर और जमीन का पट्टा देने की घोषणा की थी. परंतु चुनाव संपन्न होने के कई माह बीत जाने के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना वचन पूरा नहीं किया है. मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सीएम की घोषणा हवा-हवाई थी.

गोरामुमो नेता अजय एडवर्ड ने कहा कि ममता बनर्जी ने शरणार्थी बस्तियों में रहने वाले लोगों को घर और जमीन का पर्जा पट्टा देने का संकेत दे चुकी हैं, लेकिन दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में सदियों से रहने वाले लोगों को घर और जमीन का पर्जा पट्टा देने का ऐलान करने के बावजूद भी मुख्यमंत्री अपना वचन पूरा नहीं कर रही हैं, यह दुख की बात है.
इसी तरह से चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस समर्थित गोजमुमो उम्मीदवार विनय तामांग ने भी पहाड़ के चाय श्रमिकों से लेकर वन बस्तियों में रह लोगों को घर और जमीन का पट्टा देने का वचन दिया था. विनय तामांग ने तो यहां तक कहा था, कि चुनाव में मेरी हार हो या जीत, लेकिन पर्जा पट्टा दिलाकर ही रहेंगे. लेकिन अभी तक यह अधर में है. श्री एडवर्ड कहा कि गोरामुमो केंद्रीय अध्यक्ष मन घीसिंग अभी मिरिक भ्रमण में हैं.
भ्रमण के दौरान मिरिक के सौरेनी इलाके के लोगों ने अध्यक्ष मन घीसिंग को बता रहे हैं कि अगर घर और जमीन का पर्जा पट्टा होता तो अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा देने के लिए बेहतर स्कूल एवं कॉलेजों में दाखिला कराते. यह कार्य बैंक से लोन लेकर आसानी से हो जाता. परंतु चाय श्रमिकों को अपना घर और जमीन है, लेकिन उसका पर्जा पट्टा नहीं है.
श्री एडवर्ड ने कहा कि लोकसभा व विधानसभा उपचुनाव के दौरान हमलोगों ने जनता से मिनिमम वेजेस, दार्जिलिंग के स्थायी राजनीतिक समाधान और गोरखाओं के 11 जाति गोष्ठियों को जनजाति में शामिल कराने का वचन दिया था. जिसमें चल रहे शीतकालीन सत्र में मिनिमम वेजेस का बिल केन्द्र सरकार सदन में पेश करने जा रही है. इसी तरह से शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने दार्जिलिंग के स्थायी राजनैतिक समाधान के लिए त्रिपक्षीय बैठक की मांग की है.
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