चप्पल की फैक्ट्री खोल जगायी नयी उम्मीद

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दिल्ली में काम करने वाले दो युवकों ने शुरू किया कुटीर उद्योग में चप्पल बनाने का उद्यम नागराकाटा :डुआर्स में चाय बागानों के संकट और मानव तस्करों के संजाल के बीच दिल्ली से आये दो युवक बेरोजगार युवाओं को नई दिशा दिखा रहे हैं. बानरहाट थानांतर्गत डायना चाय बागान के निवासी विनोद गुरुंग और विशाल […]

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दिल्ली में काम करने वाले दो युवकों ने शुरू किया कुटीर उद्योग में चप्पल बनाने का उद्यम

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नागराकाटा :डुआर्स में चाय बागानों के संकट और मानव तस्करों के संजाल के बीच दिल्ली से आये दो युवक बेरोजगार युवाओं को नई दिशा दिखा रहे हैं. बानरहाट थानांतर्गत डायना चाय बागान के निवासी विनोद गुरुंग और विशाल कुमार अन्य युवकों की तरह दिल्ली में काम करते थे. वहीं पर इन्होंने हवाई चप्पल बनाने की तकनीक सीखी. वहीं से उन्हें चप्पल बनाने का कारखाना खोलने की बात सूझी.
सोमवार को डुआर्स में रबर उद्योग की संभावना तलाशने पहुंचे भारतीय रबर बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सवर धनधनिया ने इनके कुटीर उद्योग को देखकर इन नौजवानों की पीठ थपथपायी. कहा कि डुआर्स में रबर निर्भर उद्योग स्थापना संभव है, इस बात को इन दोनों युवकों ने साबित कर दिया है. वहीं, अलीपुरद्वार से सांसद जॉन बारला ने कहा कि ये दो नौजवान जो कर रहे हैं वह बेरोजगार युवाओं के लिये मिसाल है. हम लोग किस तरह इनकी मदद कर सकते हैं इसपर राय-विचार किया जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि दिल्ली से लौटकर एक साल पहले इन युवकों ने हवाई चप्पल बनाने का काम शुरु किया. दिल्ली में नौकरी करते हुए इन्होंने जो कमाई की थी उससे इन्होंने पांच लाख रुपये से इस उद्यम को शुरु किया. कच्चा माल के रुप में ये रबर शीट दिल्ली से लाते हैं. मशीन गुजरात से लायी गयी है. विनोद के श्रमिक आवास के पीछे 12×18 फीट के छोटे से कमरे में इनका उद्यम है. इन दोनों युवकों के अलावा और तीन श्रमिक काम करते हैं.
इन्हें रबर शीट से एक चप्पल काटने के 80 पैसे मिलते हैं. इस तरह से ये प्रतिदिन सुनील प्रधान, प्रकाश भुजेल और सुजीत छेत्री को दो सौ से तीन सौ रुपये कमा लेते हैं. इनके पास डुआर्स से लेकर पहाड़ से ऑर्डर मिलने लगे हैं. एक जगह से तो आठ हजार जोड़ा चप्पल का ऑर्डर मिला है. लेकिन इनकी सबसे बड़ी मुसीबत है कि इनके पास पूंजी कुछ बची नहीं है. जो था वह इस धंधे में लगा दिया है.
विनोद और विशाल का कहना है कि अगर डुआर्स में रबर के प्रसंस्करण उद्योग होता तो उन्हें कच्चे माल की लागत आधी होती. जानकारों का कहना है कि अगर चाय बागान श्रमिकों के फ्रिंज बेनिफिट के रुप में श्रमिकों को दिये जाने वाले हवाई चप्पल के ऑर्डर इन युवकों को दें तो इनके लिये एक रेडिमेड बाजार मिल जायेगा. इनकी बड़ी मदद होगी. भाजपा के जलपाईगुड़ी जिला उपाध्यक्ष मनोज भुजेल ने भी इनके उद्यम को देखा है. उन्होंने कहा कि इन युवकों के साहसिक प्रयास का यथासंभव प्रचार किया जायेगा.
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