सिलीगुड़ी : दिव्यांगता की पीड़ा से मुक्ति दिलाने में जुटी नेशनल मारवाड़ी फाउंडेशन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Nov 2018 6:38 AM

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प्रभात खबर ने ‘समाजसेवियों से संवाद’ नाम से एक विशेष अभियान शुरू किया है, जिसके तहत शहर की सभी प्रमुख सामाजिक संस्थाओं का इतिहास, उनकी उपलब्धियों और उनकी भावी योजनाओं से पाठकों को रूबरू कराया जा रहा है. प्रत्येक सप्ताह सोमवार को ऐसी किसी एक सामाजिक संस्था का पूरा ब्योरा प्रकाशित किया जाता है. आज […]

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प्रभात खबर ने ‘समाजसेवियों से संवाद’ नाम से एक विशेष अभियान शुरू किया है, जिसके तहत शहर की सभी प्रमुख सामाजिक संस्थाओं का इतिहास, उनकी उपलब्धियों और उनकी भावी योजनाओं से पाठकों को रूबरू कराया जा रहा है. प्रत्येक सप्ताह सोमवार को ऐसी किसी एक सामाजिक संस्था का पूरा ब्योरा प्रकाशित किया जाता है. आज नेशनल मारवाड़ी फाउंडेशन की सिलीगुड़ी इकाई के सेवा कार्यों को प्रकाशित किया जा रहा है. प्रभात खबर की टीम ने संस्था द्वारा संचालित राष्ट्रीय विकलांग केंद्र का जायजा लिया. सेवक रोड के श्याम मंदिर रोड स्थित इस केंद्र में संस्था के ट्रस्टियों से बात करके संस्था के 24 साल के सफर को दर्ज किया गया.
समाजसेवियों से संवाद
सिलीगुड़ी : पैर न होने के चलते किसी को दिव्यांगता का दंश न झेलना पड़े, इस मकसद से अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच (मायुमं) ने 1994 में नेशनल मारवाड़ी फाउंडेशन ट्रस्ट नामक संस्था का गठन किया. संस्था के शुरुआती ट्रस्टी के तौर पर ओमप्रकाश अग्रवाल, राजकुमार जाजोदिया, पुष्कर लाल लोहिया, अरुण बजाज, पवन छिचड़िया, कमल किशोर बुथड़ा व अन्य समाजसेवी देश भर से जुड़े.
इसके लिए मात्र दो साल के अंदर 1996 में सिलीगुड़ी में राष्ट्रीय विकलांग केंद्र की नींव डाली गयी. स्थानीय सेवक रोड में स्थापित अत्याधुनिक मशीनों से युक्त इस विकलांग केंद्र में कृत्रिम पैर तैयार किये जाने लगे और पैर से लाचार लोगों को विकलांगता की पीड़ा से मुक्ति दिलायी जाने लगी.
ट्रस्टी संजय टिबड़ेवाल के अनुसार, सरकार से मदद पाने से वंचित विकलांगों को फाउंडेशन हमेशा सहयोग करता है. पोलियोग्रस्त व ट्रेन से कटने के कारण पैर गंवानेवालों को इलाज के साथ कृत्रिम पैर लगवाने की सुविधा सरकार से मिलती है. लेकिन बहुत से पीड़ित इस सुविधा से वंचित रहते हैं. दौड़-भाग और सरकारी बाबुओं की जी-हुजूरी करने में तमाम समय और आर्थिक बर्बादी हो जाती है, लेकिन कोई फायदा सरकार से नहीं मिल पाता. श्री टिबड़ेवाल का कहना है कि ऐसे वंचित लोगों को सहयोग करने में फाउंडेशन कभी पीछे नहीं हटता.
उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर भारत का यह एकमात्र विकलांग केंद्र है, जहां कृत्रिम पैर तैयार करके विकलांगों को लगाये जाते हैं. इस सेवा केंद्र से केवल सिलीगुड़ी व उ‍त्तर बंगाल को नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों के अलावा पड़ोसी देशों नेपाल, भूटान व बांग्लादेश के लोग भी लाभान्वित होते हैं.
इसी शनिवार को राष्ट्रीय विकलांग केंद्र में हेमिल्टनगंज निवासी राहुल दत्त, जलपाईगुड़ी के सकाती निवासी दीपेन राय, लुकसान निवासी सुमन विश्वास व तन्मय सरकार कृत्रिम पैर लगवाकर खुद अपने पैरों पर चलकर अपने घर लौटे और फाउंडेशन के सेवाकार्य के लिए समाजसेवियों को दुआ भी दी. इन लोगों ने ट्रेन से हुए हादसों में अपने पैर गंवाये थे.
संजय टिबड़ेवाल का कहना है कि फाउंडेशन के इस सेवा कार्य में अन्य सामाजिक संस्थाओं व समाजसेवियों से भी पूरा सहयोग मिलता है.
उन्होंने इस सेवा कार्य में आम लोगों से भी आगे आने और परिवार के किसी सदस्य के जन्मदिन, वैवाहिक सालगिरह, पुण्यतिथि, अन्य किसी अनुष्ठान व मांगलिक कार्यों के दौरान किसी जरूरतमंद को कृत्रिम पैर लगवाकर उसके चेहरे पर मुस्कान लौटाने में सहयोग करने की अपील की.
एक लाख से अधिक लोगों को लगाये कृत्रिम पैर
संस्था के संस्थापक ट्रस्टी ओमप्रकाश अग्रवाल ने सिलीगुड़ी के राष्ट्रीय विकलांग केंद्र के जरिये मायुम के सहयोग से देशभर में अब तक एक हजार से अधिक कैंपों का आयोजन किया है, जिसके माध्यम से एक लाख से भी अधिक लोगों को कृत्रिम पैर लगाये गये हैं.
श्री अग्रवाल का कहना है कि मायुम की देशभर में 640 शाखाएं है. हर जगह इनके कार्यकर्ता विकलांगों के लिए कैंप लगाते हैं. फाउंडेशन की मोबाइल वैन, जो कृत्रिम पैर तैयार करनेवाली अत्याधुनिक मशीनों से युक्त है, विशेषज्ञ टेक्निशियनों के साथ मायुम के उन कैंपों में पहुंचकर पैर से लाचार लोगों को कृत्रिम पैर लगाने का काम करती है.
फाउंडेशन का लक्ष्य आगामी दो सालों में नौ हजार लोगों को कृत्रिम पैर लगाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना है. फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा कि इसके लिए मायुम को और अधिक सक्रिय होना होगा. अधिक-से-अधिक कैंप लगाने होंगे.
फाउंडेशन के वर्तमान ट्रस्टी
चेयरमैन सुभाष सिकरिया (गुवाहाटी), वाइस चेयरमैन रवि अग्रवाल (दिल्ली), अमित अग्रवाल (गुवाहाटी), मैनेजिंग ट्रस्टी रतन विहानी (सिलीगुड़ी), विजय कानोडिया (कोलकाता), नवरतन पारख (सिलीगुड़ी), अरुण कुमार बजाज (दिल्ली), डॉ आरके अग्रवाल (सिलीगुड़ी), राजेश अग्रवाल (सिलीगुड़ी), उत्तम गोयल (सिलीगुड़ी), मन्नालाल वैद (दिल्ली), सजल भजनका (कोलकाता), सरस सिंह शेठिया (दिल्ली), गंगाधर नकीपुरिया (सिलीगुड़ी), अशोक अग्रवाल (सिलीगुड़ी), वसंत बरेलिया (सिलीगुड़ी), शिव कुमार अग्रवाल (सिलीगुड़ी), संजय टिबड़ेवाल (सिलीगुड़ी), अरुण कुमार डाबड़ीवाल (सिलीगुड़ी), संजय शर्मा (सिलीगुड़ी), नितिन गोयल (सिलीगुड़ी), विपुल शर्मा (सिलीगुड़ी), ललित गांधी (कोल्हापुर, महाराष्ट्र) व उमेश गर्ग (सिलीगुड़ी).
सेवा कार्यों के लिए कई हस्तियों से मिली सराहना
नेशनल मारवाड़ी फाउंडेशन के इस सेवा कार्य को कई नामचीन हस्तियों ने सराहा है. फाउंडेशन द्वारा संचालित राष्ट्रीय विकलांग केंद्र में हरियाणा के पूर्व-मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, पश्चिम बंगाल के पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री विनय कृष्ण चौधरी, पड़ोसी राज्य सिक्किम के कई राज्यपालों के अलावा केंद्र सरकार व पश्चिम बंगाल के कई मंत्री पहुंच चुके हैं. यहां के इस सेवा कार्य को अपनी आंखों से देखकर संस्था की तारीफ भी कर चुके हैं.
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