पाथरघाटा ग्राम पंचायत में भी ढह गया लाल दुर्ग
Updated at : 05 Oct 2018 2:44 AM (IST)
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बागडोगरा : माटीगाड़ा ब्लॉक के पाथरघाटा ग्राम पंचायत में लाल दुर्ग ध्वस्त हो गया है.इस ग्राम पंचायत के गठन के बाद से ही इसपर माकपा का कब्जा था. बृहस्पतिवार को इस लाल दुर्ग का रंग हरा हो गया है. माकपा बोर्ड के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में तृणमूल कांग्रेस ने बाजी मार ली है. इस इस […]
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बागडोगरा : माटीगाड़ा ब्लॉक के पाथरघाटा ग्राम पंचायत में लाल दुर्ग ध्वस्त हो गया है.इस ग्राम पंचायत के गठन के बाद से ही इसपर माकपा का कब्जा था. बृहस्पतिवार को इस लाल दुर्ग का रंग हरा हो गया है. माकपा बोर्ड के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में तृणमूल कांग्रेस ने बाजी मार ली है. इस इस ग्राम पंचायत पर तृणमूल कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है.
तृणमूल कांग्रेस शीघ्र ही बोर्ड का गठन करेगी. यहां पहली बार तृणमूल कांग्रेस का कब्जा हुआ है. ग्राम पंचायत के गठन के बाद से ही हर बार माकपा यहां बोर्ड बनाती थी. पूरे राज्य में भले ही सत्ता परिवर्तन हो गया हो लेकिन इस ग्राम पंचायत पर सत्ता परिवर्तन की हवा जरा भी देखने को नहीं मिली थी. 28 सीटों वाली पाथरघाटा ग्राम पंचायत में वर्ष 2016 में चुनाव हुआ था. तब माकपा 14, तृणमूल 8, कांग्रेस 1,भाजपा 2 तथा आदिवासी विकास परिषद 1 सीट पर विजयी हुई थी. जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने बाजी मारी थी. भाजपा को साथ लेकर माकपा ने बोर्ड का गठन किया. माकपा के प्रफुल्ल बर्मन प्रधान बने जबकि भाजपा के भगवान मुंडा उप प्रधान बने.
हाल ही में माकपा के प्रधान प्रफुल्ल बर्मन, कांग्रेस, भाजपा एवं आदिवासी विकास परिषद के एक-एक सदस्य तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए. जिससे तृणमूल सदस्यों की संख्या बढ़कर 12 हो गयी. दूसरी ओर माकपा सदस्यों की संख्या घटकर 13 रह गयी. पिछले दिनों भाजपा के दो सदस्यों एवं तृणमूल सदस्यों ने वर्तमान बोर्ड के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया. उसके बाद आज अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होनी थी. आज वोटिंग के दिन माकपा के 13 में से 12 सदस्य ही उपस्थित हुए.
गायत्री दाहाल नामक एक पंचायत सदस्य नहीं आई. इसके साथ ही भाजपा के दो सदस्य सीपीएम का साथ छोड़कर तृणमूल शिविर में चले गए. जिससे तृणमूल ने इस ग्राम पंचायत पर बहुमत हासिल कर लिया. अब निर्देश मिलते हैं तृणमूल कांग्रेस ग्राम पंचायत बोर्ड गठन करेगी. इससे पहले अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान को देखते हुए यहां सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए थे. माटीगाड़ा बीडीओ कार्यालय के प्रीसाइडिंग ऑफिसर मतदान प्रक्रिया को संचालित करने आए थे. किसी प्रकार की गड़बड़ी ना हो, इसके लिए पहले से ही यहां भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी. हालांकि अविश्वास प्रस्ताव लाने की नौबत ही नहीं आई क्योंकि माकपा के सदस्यों की संख्या ऐसे ही कम थी.
माकपा बोर्ड के गिरने से तृणमूल समर्थकों में जबरदस्त जोश एवं उत्साह का माहौल है. तृणमूल समर्थकों ने हरे अबीर की होली खेली. ग्राम पंचायत में तृणमूल नेता खगेश्वर राय,रामानंद बर्मन, दुर्लभ चक्रवर्ती, अभिजीत पाल सहित काफी संख्या में तृणमूल नेता एवं समर्थक उपस्थित थे. मतदान प्रक्रिया शुरू होने से पहले सीपीएम के 12 सदस्य पंचायत कार्यालय आए. जबकि उनका एक सदस्य नहीं आया. उस सदस्य के आने का काफी देर तक इंतजार किया गया. दूसरी और तृणमूल कांग्रेस का कहना था कि उनके साथ 16 सदस्य हैं.
सभी 16 सदस्यों की उपस्थिति दर्ज कराई गई. उसके बाद ही वाम मोर्चा के बोर्ड को भंग करने का निर्णय लिया गया और तृणमूल को नया बोर्ड गठन करने का करने के लिए आमंत्रित किया गया है. दूसरी ओर सीपीएम नेता शंभू प्रसाद ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस ने डरा धमकाकर तथा लोभ लालच देकर उनके पंचायत सदस्यों को अपने पाले में कर लिया है.
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