रायगंज : बंगाल में भी दिख रहा एनआरसी का असर

Updated at : 06 Aug 2018 1:32 AM (IST)
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रायगंज : बंगाल में भी दिख रहा एनआरसी का असर

रायगंज : असम में विदेशी घुसपैठियों के मसले ने बंगाल समेत विभिन्न राज्यों में उबाल ला दिया है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार उत्तर दिनाजपुर जिला प्रशासन की ओर से असम में नौकरी या किसी अन्य कारोबार के सिलसिले में रह रहे लोगों के मूल राज्य से रिकार्ड मांगे गये हैं. ताकि उनके भारत की नागरिकता […]

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रायगंज : असम में विदेशी घुसपैठियों के मसले ने बंगाल समेत विभिन्न राज्यों में उबाल ला दिया है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार उत्तर दिनाजपुर जिला प्रशासन की ओर से असम में नौकरी या किसी अन्य कारोबार के सिलसिले में रह रहे लोगों के मूल राज्य से रिकार्ड मांगे गये हैं. ताकि उनके भारत की नागरिकता साबित की जा सके.
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय नागरिकता पंजी का प्रारुप (ड्राफ्ट) प्रकाशित होने पर लगभग 40 लाख लोगों की नागरिकता पर सवालिया निशान लग गया है. हालांकि जिन लोगों के नाम इस पंजी में शामिल नहीं हैं वे दोबारा आवेदन कर सकते हैं. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस बारे में स्पष्टीकरण दे दिया है. इसी संदर्भ में उत्तर दिनाजपुर जिले में असम में अस्थायी तौर पर रहने वालों के रिकॉर्ड असम सरकार द्वारा मांगे गये हैं. इसलिये उन रिकार्डों को अपडेट किया जा रहा है. जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इस खबर की पुष्टि भी कर दी है.
उल्लेखनीय है कि विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी से आम जनता में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. इसी असमंजस की स्थिति को स्पष्ट करने के लिये प्रशासन की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है. गौरतलब है कि असम में अस्थायी तौर पर रह रहे बिहार और बंगाल के बहुत से लोगों के नाम नागरिकता पंजी के प्रारुप में शामिल नहीं किये गये हैं. इससे ऐसे लोगों की नागरिकता पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
प्रशासनिक सूत्र के अनुसार जिला प्रशासन के पास ऐसे नागरिकों की एक सूची आयी है जो स्थायी रुप से इसे जिले के निवासी हैं. ऐसे लोग नौकरी या अन्य रोजगार के चलते असम में अस्थायी रुप से रह रहे हैं. इन लोगों की नागरिकता वैध है या नहीं इसकी पुष्टि के लिये मूल राज्य के दस्तावेज की मांग की गयी है. सूत्र के अनुसार ऐसे दस्तावेजों की मांग खुद असम सरकार ने की है. उसके बाद ही जिला प्रशासन ने अपनी तत्परता बढ़ा दी है. शहरों में नगरपालिका और ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत की ओर से इसकी छानबीन की जा रही है. छानबीन के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जायेगी.
वहां से उसे ब्लॉक और महकमा प्रशासन को भेजी जायेगी. उसके बाद ही उसे जिला प्रशासन के पास भेजा जायेगा. हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को असम से जोड़कर देखने के पक्ष में नहीं हैं. उत्तर दिनाजपुर जिला प्रशासन के नेशनल पॉपुलेशन रजिस्ट्रार के प्रभारी अधिकारी ओसी अपूर्व चंद्र दे ने बताया कि इस तरह के काम हम लोग पूरे साल करते हैं. यह एक तरह से रूटीन काम है. उन्होंने यह जरूर माना कि फिलहाल शीर्ष अधिकारियों की ओर से इस काम पर विशेष जोर देने के लिये कहा गया है.
जानकारी अनुसार राष्ट्रीय नागरिकता पंजी के सेंसस कमिश्नर के निर्देश पर बीते बुधवार से उत्तर दिनाजपुर जिले में दस्तावेजों की जांच की जा रही है. ब्लॉक प्रशासकीय सूत्र के अनुसार ऐसे नागरिकों के वोटर कार्ड और आधार कार्ड की जांच की जा रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति इस जिले में सपरिवार रह रहा था या नहीं.
अगर हां तो वे कितने दिनों से रह रहे थे. वोटर कार्ड या आधार कार्ड के अलावा नागरिकता प्रमाणित करने के लिये अन्य दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है. जानकारों का मानना है कि जांच प्रक्रिया से एक बार फिर विदेशी नागरिकों का मसला गरमा गया है. वैसे इस प्रक्रिया से बंगाल में भी विदेशी घुसपैठियों का मसला सामने आ गया है. सवाल है कि जो लोग अपनी नागरिकता ठोस सबूतों के आधार पर साबित नहीं कर पायेंगे उनकी नागरिकता का क्या होगा? क्या वे भी विदेशी नागरिक घोषित होंगे? फिलहाल यही सब प्रश्न लोगों के जेहन में उबल रहे हैं.
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