कालियागंज : प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से हो रहा पॉलीथिन का इस्तेमाल

Updated at : 20 Jul 2018 5:17 AM (IST)
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कालियागंज : प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से हो रहा पॉलीथिन का इस्तेमाल

कालियागंज : नगरपालिका प्रशासन की तरफ से पोलीथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाये जाने के बावजूद हाट-बाजारों में इसका धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है. उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले कालियागंज के स्वयंसेवी संगठन नदी बचाओ व परिवेश बचाओ कमेटी की पहल पर सेमिनार का आयोजन किया गया था. इसमें पोलीथीन से होने वाले […]

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कालियागंज : नगरपालिका प्रशासन की तरफ से पोलीथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाये जाने के बावजूद हाट-बाजारों में इसका धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है.
उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले कालियागंज के स्वयंसेवी संगठन नदी बचाओ व परिवेश बचाओ कमेटी की पहल पर सेमिनार का आयोजन किया गया था. इसमें पोलीथीन से होने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए इस पर तत्काल प्रतिबंध लगाये जाने की मांग की गई थी.
उसके बाद ही नगरपालिका चेयरमैन कार्तिक चन्द्र पाल ने अधिसूचना जारी कर पोलीथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाये जाने की घोषणा कर दी.
इसके बावजूद ग्राहकों की मांग को देखते हुए व्यवसायी पोलीथीन में सामान वगैरह ग्राहकों को दे रहे हैं. इस बारे में कालियागंज व्यसायी समिति के सचिव सुनील साहा ने बताया कि पोलीथीन पर पूर्ण प्रतिबंध को लागू करने के लिए नगरपालिका प्रशासन से लेकर व्यवसायियों और ग्राहकों को भी आगे आना होगा. पुलिस को चाहिए कि पोलीथीन के खिलाफ अभियान चलाये. ऐसा नहीं करने से भविष्य में इसके घातक परिणाम होंगे.
गौरतलब है कि 40 माइक्रोन से कम पतले प्लास्टिक के कैरीबैग पर कानूनी प्रतिबंध है. इसका उपयोग करना गैरकानूनी माना जाता है.
इसके बावजूद न तो कारखानों में पोलीथीन का उत्पादन रूका है और न ही इसका आम लोगों के द्वारा उपयोग. सामाजिक संगठनों का कहना है कि सबकुछ जानते हुए भी ब्लॉक प्रशासन और कालियागंज नगरपालिका मौन साधे हुए है. उल्लेखनीय है कि 40 माइक्रोन से कम पतले प्लास्टिक सालों भर मिट्टी में पड़े रहने के बावजूद गलते नहीं हैं.
इससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है. पोलीथीन के चलते मिट्टी में प्रदूषण हो जाता है. इससे पर्यावरण असंतुलन की समस्या खड़ी होती है. पोलीथीन और प्लास्टिक के चलते नाले भी जाम होकर जल जमाव की समस्या खड़ी करती है.
पोलीथीन के उपयोग पर बोलते हुए एक सब्जी व्यवसायी अशोक गुप्ता ने कहा कि ऐसे बहुत कम लोग हैं जो सामान खरीदने के लिए झोले वगैरह लाते हैं. ग्राहकों की मांग को देखते हुए उन्हें पोलीथीन में सब्जी देनी पड़ती है. वहीं मछली और मांस के विक्रेता सुरजीत मंडल और शंभू दास ने बताया कि मछली व मांस प्लास्टिक के बैग में नहीं देने से ग्राहक नाराज होते हैं.
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