श्रीमति नदी के संरक्षण पर विचार-विमर्श
Updated at : 09 Jul 2018 2:01 AM (IST)
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कालियागंज : आधुनिक सभ्यता की भाग दौड़ और शहरीकरण के चलते नदियां, तालाब और जलाशय वगैरह विलुप्त हो रहे हैं. इस वजह से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है जिसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ रहा है. इसी तरह से कालियागंज की श्रीमति नदी भी विलुप्ति के कगार पर है. इस नदी के संरक्षण के […]
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कालियागंज : आधुनिक सभ्यता की भाग दौड़ और शहरीकरण के चलते नदियां, तालाब और जलाशय वगैरह विलुप्त हो रहे हैं. इस वजह से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है जिसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ रहा है. इसी तरह से कालियागंज की श्रीमति नदी भी विलुप्ति के कगार पर है. इस नदी के संरक्षण के लिये रविवार को कालियागंज के पार्वती सुंदरी उच्च विद्यालय में संगोष्ठी का आयोजन किया गया.
संगोष्ठी का आयोजन नदी व परिवेश बचाओ कमेटी की पहल पर किया गया. संगोष्ठी में वक्ताओं का कहना है कि यह नदी कभी भरी पूरी अवस्था में थी. लेकिन अब यह विभिन्न कारणों से विलुप्ति के कगार पर है. यहां तक कि यह कहा जा रहा है कि नदी चोरी और व्यावसायिक कारोबार का शिकार हो रही है. लेकिन यह कब और कैसे हो गया इसकी जानकारी किसी को नहीं है.
संगोष्ठी में उपस्थित रहे कालियागंज नगरपालिका चेयरमैन कार्तिक पाल, बालुरघाट के वरिष्ठ पर्यावरणविद तुहिन शुभ्र मंडल और सिलीगुड़ी के वरिष्ठ पर्यावरणविद अशेष दास, पर्यावरणविद डॉ. जयंत भट्टाचार्य, विद्यालय के प्रधान शिक्षक नंदन कुमार साहा, नदी व परिवेश बचाओ कमेटी के अध्यक्ष तपन चक्रवर्ती और संयुक्त सचिव स्वपन ब्रह्म और प्रसून दास.
कालियागंज नगरपालिका के चेयरमैन कार्तिक पाल ने बताया कि श्रीमति नदी के संरक्षण के लिये कई योजनाएं ली गयी हैं. उन्होंने प्रशासन से इस नदी के स्वाभाविक रुप को बहाल करने के लिये आगे आने का आह्वान किया.
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