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महंगी हो सकती है चाय की चुस्‍की, 50 से अधिक चाय बागान डूबे, बारि‍श बनी आफत की बरसात

Updated at : 06 Jul 2018 1:40 AM (IST)
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महंगी हो सकती है चाय की चुस्‍की, 50 से अधिक चाय बागान डूबे, बारि‍श बनी आफत की बरसात

नागराकाटा/ मयनागुड़ी : पिछले पांच रोज की लगातार व भारी बारिश के चलते डुवार्स क्षेत्र के चाय बागान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. जानकारी अनुसार क्षेत्र के 50 से अधिक चाय बागानों के सैकड़ों हेक्टेयर जमीन पेड़ पौधे बाढ़ में समा गये हैं. कोई कोई कारखाना तो अभी भी बाढ़ में डूबा हुआ है. बाढ़ […]

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नागराकाटा/ मयनागुड़ी : पिछले पांच रोज की लगातार व भारी बारिश के चलते डुवार्स क्षेत्र के चाय बागान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. जानकारी अनुसार क्षेत्र के 50 से अधिक चाय बागानों के सैकड़ों हेक्टेयर जमीन पेड़ पौधे बाढ़ में समा गये हैं. कोई कोई कारखाना तो अभी भी बाढ़ में डूबा हुआ है. बाढ़ का पानी चाय बागानों के श्रमिक मोहल्लों में भी घुस गया है जिससे वहां के श्रमिकों का बुरा हाल है.
कई चाय बागान के प्रबंधन का कहना है कि चाय के इस शुरुआती मौसम में इस तरह की बाढ़ के प्रकोप से चाय के उत्पादन में 25 फीसदी तक की कमी आ सकती है. वहीं, चाय मालिकों के संगठन डीबीआईटीए और टाई के सदस्यों ने जिला प्रशासन से नदी-नालों के कहर से बचाने के लिये त्वरित मदद की गुहार लगायी है.
डीबीआईटीए के सूत्र के अनुसार जलपाईगुड़ी जिले के गेंद्रापाड़ा चाय बागान की 120 हेक्टेयर जमीन डूबा हुआ है. वहीं, तेलीपाड़ा चाय बागान में 30 हेक्टेयर, बिन्नागुड़ी चाय बागान का 100 हेक्टेयर जमीन डूबी हुई है. देवपाड़ा, लक्खीपाड़ा, मोगलकाटा और बानरहाट चाय बागानों की हालत भी इसी तरह की है.
इन बागानों में चामुर्ची से बहकर आने वाले हाथीनाला या उमेश खाल का पानी समा रहा है. रेती और सुकती नदियों का पानी चूनाभट्टी, कठालगुड़ी, रियाबाड़ी, करबला चाय बागानों में समा रहा है. हिला चाय बागान के पांच सेक्शन जलढाका और जिती नदियों की बाढ़ की चपेट में हैं.
सूत्र के अनुसार चाय बागानों के साथ श्रमिक आवासों के जलमग्न होने से श्रमिकों के लिये भारी संकट है. बानारहाट के लक्खीपाड़ा चाय बागान के कई श्रमिक मोहल्ले डूब गये हैं. अलीपुरद्वार जिले के चाय बागानों की हालत भी इसी तरह की है. उधर, चुआपाड़ा चाय बागान संलग्न पानी नदी बुधवार की रात तक खतरे के निशान से उपर बह रही थी. बागान का कारखाना अभी भी बाढ़ में डूबा है. इन नदियों की चपेट में आकर मथुरा चाय बागान के तीन कल्वर्ट ध्वस्त हो गये हैं.
वहां के सहायक मैनेजर के बंगलो की चारदीवारी का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है. उधर, बसरा नदी के कहर से सेंट्रल डुवार्स चाय बागान ऊभ-चूभ कर रहा है. वहांके 47 श्रमिक आवास क्षतिग्रस्त हुए हैं. रांगामाटी डिवीजन से इस चाय बागान तक लाये गये पेयजल का कनेक्शन भी क्षतिग्रस्त होने के मुकाम पर है. मेचपाड़ा, पाटकापाड़ा चाय बागानों की हालत भी कमोवेश यही है.
बागान मालिकों के संगठन टाई के अनुसार वीरपाड़ा के नांगडोला चाय बागान में डिमडिमा और बिरबिटी नदियों की चपेट में पांच एकड़ जमीन का पता नहीं चल रहा है. बागान की 100 एकड़ जमीन जलमग्न है. उधर, कालजानी नदी का पानी प्रवेश करने से अलीपुरद्वार शहर संलग्न माझेरडाबरी चाय बागान के दो हजार चाय के पौधे बह गये हैं. गोपालपुर, एथेलबाड़ी, नागराकाटा और कूर्ति चाय बागान भी बुरी तरह प्रभावित हैं.
डीबीआईटीए के सचिव सुमंत गुहा ठाकुरता ने बताया कि जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार के जिला प्रशासकों को नुकसान का विस्तृत ब्योरा देते हुए पत्र दिये गये हैं. बागानों को बचाने के लिये प्रशासन को आगे आना चाहिये. टाई की ओर से भी गुरुवार को जिला प्रशासन को अवगत कराया गया है. संगठन की डुवार्स शाखा के सचिव राम अवतार शर्मा ने बताया कि चाय उत्पादन के इस शुरुआती मौसम में बाढ़ से एक ही धक्के में 25 फीसदी तक उत्पादन में कमी आ सकती है. सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से कोयला और डीजल मंगाने में भी परेशानी हो रही है.
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