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हरियाली की दीवानगी का दूसरा नाम अब्दुस शुभान, ऑटो चालक अब्दुस पौधे लगाने के साथ देखभाल भी करते हैं

Updated at : 01 Jun 2018 2:05 AM (IST)
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हरियाली की दीवानगी का दूसरा नाम अब्दुस शुभान, ऑटो चालक अब्दुस पौधे लगाने के साथ देखभाल भी करते हैं

चाकुलिया : उसे वैश्विक उत्तापीकरण और वायु प्रदूषण के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है. कम पढ़े लिखे और पेशे से ऑटो चालक अब्दुस शुभान के लिये ये जटिल विषय हैं. लेकिन वह इतना जरूर जानते हैं कि पौधे इंसान के सच्चे मित्र होते हैं. वे हमें फल और फूल देने के अलावा थके […]

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चाकुलिया : उसे वैश्विक उत्तापीकरण और वायु प्रदूषण के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है. कम पढ़े लिखे और पेशे से ऑटो चालक अब्दुस शुभान के लिये ये जटिल विषय हैं. लेकिन वह इतना जरूर जानते हैं कि पौधे इंसान के सच्चे मित्र होते हैं. वे हमें फल और फूल देने के अलावा थके हारों को छाया देते हैं. इसलिये वे जब भी मौका मिलता है किसी भी खाली जगह पौधे लगा देते हैं.
पौधे रोपना उनके लिये किसी नशे से कम नहीं. इसीलिये उन्हें लोग गाछ-पागल के नाम से जानते हैं. इस नेक काम के बदले उन्हें किसी पुरस्कार या लाभ की अपेक्षा नहीं होती है. बस एक आत्मसंतोष का भाव उनके इस काम के पीछे निरंतर प्रेरणा का काम करता है. सबसे बड़ी बात कि ऑटो रिक्शा चलाकर वह किसी तरह एक बेटा और एक बेटी के साथ पति-पत्नी के छोटे परिवार की परवरिश किसी तरह कर पाते हैं.
आर्थिक संघर्ष के बीच भी इन्होंने अपनी यह मुहिम जारी रखी है जिससे बहुत से लोगों को प्रेरणा मिल रही है. पिछले 37 साल से वे पौधे रोप रहे हैं. अभी तक वे 60 हजार पौधे लगा चुके हैं. एक तरफ जहां तकड़ी तस्करों के गिरोह हमारे जंगलों को खत्म करने पर तुले हुए हैं वहीं, अब्दुस शुभान की यह दीवानगी हमें हरियाली की ओर उन्मुख करने की दिशा में चलने को प्रेरित कर रही है. इनका कहना है कि जब तक उनके शरीर में सांस है तब तक वे यह काम करते रहेंगे.
उल्लेखनीय है कि अब्दुस शुभान उत्तर दिनाजपुर जिले के चाकुलिया प्रखंड के धाप्पा गांव के निवासी हैं. छोटी सी जमीन पर छोटा सा घर है जिसमें वह सपरिवार रहते हैं. उनके विनम्र व्यवहार और पेड़ों के प्रति विशेष लगाव के चलते अब्दुस शुभान इलाके में सभी के चहेते हो गये हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार जब अब्दुस शुभान पांच साल के थे तभी उनकी मां इस दुनिया से चल बसीं. पिता मां के जाने के 12 साल पूर्व ही दिवंगत हो चुके थे. इसलिये बचपन में माता पिता के प्यार व स्नेह से वंचित शुभान को धरती के पेड़-पौधों ने आकृष्ट किया. बचपन से ही पेड़ों से विशेष लगाव था. कोई पेड़ काटता तो वे दुखी हो जाते.
उत्तर दिनाजपुर जिला वन विभाग के अधिकारी विपर्ण दत्त ने कहा कि अब्दुस शुभान ने विभाग के अधिकारियों का भी दिल जीत लिया है. अपने काम से उसने पेड़ों के साथ मनुष्य के गहरे रिश्ते को ही उजागर किया है.
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