पद्मावती फिल्म के विरोध में सिलीगुड़ी में भी हल्लाबोल, रैली की नहीं मिली अनुमति

By Prabhat Khabar Digital Desk
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सिलीगुड़ी: राजस्थान के चित्तौड़ की महारानी ‘पद्मिनी’ को लेकर बनी फिल्म ‘पद्मावती’ के विरोध में अब सिलीगुड़ी में भी हल्लाबोल शुरु होने लगा है. हालांकि सिलीगुड़ी में विरोध रैली शुरु होने से पहले ही पुलिस ने ब्रेक लगा दिया. सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने शहर में फिल्म पद्मावती के विरोध में निकाली जानेवाली रैली के लिए अनुमति ही नहीं दी और न ही फिल्म मेकर संजय लीला भंसाली और फिल्म में महारानी पद्मिनी की किरदार निभा रही अदाकारा दीपिका पादुकोण का पुतला ही जलने दिया.

शहर में गुरुवार को विरोध रैली निकालने और संजय लीला व दीपिका का पुतला जलाने के लिए हिंदू जागरण मंच की सिलीगुड़ी इकाई ने दो-तीन दिन पहले पुलिस से लिखित रूप से अनुमति मांगी, जिसे पुलिस अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया. यह कहना है संगठन के जिला अध्यक्ष शुभो शील का. वह आज सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में आयोजित प्रेस-वार्ता के दौरान मीडिया को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने पुलिस प्रशासन पर जहां ज्यादती और धांधली करने का आरोप लगाया वहीं, सत्ताधारी दल का कठपुतली करार दिया.
हिंदू जागरण मंच का दावा : फिल्म में इतिहास से छेड़छाड़
संगठन के प्रमुख सलाहकार पवन गुप्ता ने दावा किया है कि संजय लीला ने फिल्म के जरिये इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया है. जिसे कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. पतिव्रता पटरानी पद्मिनी के चरित्र को फिल्म में कलंकित किया गया है. फिल्म को दर्शकों को लुभाने और गाढ़ी कमायी करने के उद्देश्य से फिल्म में दिल्ली सल्तनत के राजा अलाउद्दीन खिजली के साथ पद्मिनी के शारीरिक संपर्क को दर्शाया गया है. जबकि इतिहास गवाह है अलाउद्दीन कभी भी महारानी का दीदार तक नहीं कर सका. अलाउद्दीन उनके शरीर को हाथ तक न लगा सके इसके लिए महारानी ने अन्य 16 हजार रानियों के साथ आत्मदाह कर जौहर किया था.

श्री गुप्ता का कहना है कि अगर फिल्म में महारानी पद्मिनी से जुड़े चरित्र व अन्य पहलूओं के साथ छेड़छाड़ किये बगैर प्रसारित किया जाता है तो हम कभी भी फिल्म का विरोध नहीं करेंगे. प्रेस-वार्ता के दौरान संगठन के कोर कमेटी के सदस्य सह संपर्क प्रमुख अमित चौहान ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर फिल्म को रिलीज से पहले विवादित दृश्यों को नहीं हटाया गया तो हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. जरुरत पड़ने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे. इसके लिए कानूनविदों से संपर्क भी साधा जा रहा है.
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