बंगाल व झारखंड के उद्योगों में खप रहा अवैध कोयला
Updated at : 22 Apr 2024 9:44 PM (IST)
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एक्शन. अवैध कोयला खनन पर बड़ी कार्रवाई, प्राथमिकी दर्ज करा कर सीआइएसएफ कमांडेंट बोले
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आसनसोल.
सीआइएसएफ यूनिट इसीएल शीतलपुर के सीनियर कमांडेंट तुषार ध्यानेश्वर सखारे ने अवैध कोयला खनन को लेकर दर्ज अपनी शिकायत में कहा कि जाली दस्तावेजों के सहारे ट्रक मालिकों और चालकों की मिली भगत से अवैध कोयला पश्चिम बंगाल तथा झारखंड के उद्योगों में खपाया जा रहा है. बिना किसी सुरक्षा उपायों के पुरूष, महिला और बच्चों को खतरनाक खदानों में कोयला खनन के कार्य में लगाया जा रहा है. इससे उनके जान को काफी खतरा रहता है और अवैध कुवां खदानों से यहां के आसपास रहनेवाले लोगों के लिए खतरा बना हुआ है. इसीएल पांडवेश्वर एरिया के अधीन नाला थाना क्षेत्र के पलास्थली इलाके में इसीएल मुख्यालय टास्कफोर्स, सीआइएसएफ यूनिट शीतलपुर और स्थानीय पुलिस के संयुक्तरूप से छापेमारी के उपरांत सीनियर कमांडेंट श्री सखारे ने अपनी नाला थाना में दर्ज अपनी शिकायत में उक्त बातों का जिक्र किया. पहली बार इस इलाके से हुई सफल कार्रवाई में 100 टन कोयला जब्त किया. जिसे इसीएल सालानपुर एरिया के हवाले कर दिया गया. इससे पूर्व जनवरी 2021 में इसीएल की एक टीम यहां छापेमारी करने गयी थी. कोयलाचोरों ने पूरे टीम को घेर लिया और आठ वाहनों को चकनाचूर कर दिया. सुरक्षा विभाग की टीम किसी तरह जंगलों में छिपकर अपनी जान बचायी थी. बाद में पुलिस ने सभी को रेस्क्यू करके वहां से निकाल था. गौरतलब है कि अवैध कोयला कारोबार पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा एजेंसियां जितनी भी कार्रवाई कर रही है, लेकिन इसपर अंकुश नहीं लग रहा है. कार्रवाई के बाद के बाद हुए नुकसान की भरपाई के लिए अवैध कोयला कारोबारी कार्य में और ज्यादा तेजी ला देते हैं. इसीएल की पूरी टीम ने सूचना के आधार पर पलास्थली इलाके में छापेमारी की. जिसके उपरांत सीनियर कमांडेंट ने शिकायत दर्ज करायी. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि इसीएल पांडवेश्वर (वनभूमि) क्षेत्र के पलास्थली में बड़ी संख्या में सक्रिय अवैध कुवां खदानें हैं. सुरक्षा और सावधानियों की परवाह किये बगैर बदमाश यहां अवैध खदानों को खोलकर रखा है. इन खदानों से कोयला निकालकर मोटरसाइकिल, साइकिल, बैलगाड़ी और ट्रैक्टरों के माध्यम से निर्दिष्ट जगह पर पहुंचाया जाता है. फिर यहां से ट्रकों के जरिये झारखंड और बंगाल में स्थित निजी कोयला डिपो, हार्डकॉक प्लांट, ब्रिकेट निर्माताओं को नाममात्र की कीमत में बेच दिया जाता है. फिर यहां से यह विभिन्न उद्योगों में जाता है. जिसके लिए जाली कागजता का उपयोग किया जाता है. उन्होंने कोयला संग्रहण, परिवहन और बिक्री की पूरी प्रक्रिया के संचालन के लिए कस्ता इलाके के सुनील सिंह, कुंता यादव और शेख फिरोज को तथा सुल्तानपुर इलाके के शेख जमशेद, शेख कासिम, अमर मंडल, मनोज सिंह की भूमिका को सक्रिय बताते हुए अपनी शिकायत में सभी को नामजद आरोपी बनाया है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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By Prabhat Khabar News Desk
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