माध्यमिक और उच्च माध्यमिक की मूल्यांकन पद्धति पर उठ रहे सवाल

Updated at : 01 Jul 2024 1:15 AM (IST)
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माध्यमिक और उच्च माध्यमिक की मूल्यांकन पद्धति पर उठ रहे सवाल

माध्यमिक व उच्च माध्यमिक का रिकार्ड देखते समय परीक्षकों को 11वीं वार्षिक परीक्षा का रिकार्ड भी देखना होता है. इससे परीक्षकों पर दबाव बढ़ जाता है.

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संवाददाता, कोलकाता

माध्यमिक व उच्च माध्यमिक का रिकार्ड देखते समय परीक्षकों को 11वीं वार्षिक परीक्षा का रिकार्ड भी देखना होता है. इससे परीक्षकों पर दबाव बढ़ जाता है. सामान्य तौर पर यदि परीक्षक समीक्षा और जांच पर ध्यान नहीं देंगे, तो उम्मीदवारों को अपने अंक बढ़ाने का अवसर नहीं मिलेगा. अंकों पर संदेह होने पर छात्र पीपीएस और पीपीआर करवा रहे हैं. अब इनके नतीजों के बाद कुछ छात्रों के अंक बढ़ गये हैं.

जब रिजल्ट प्रकाशित होता है, तो कई छात्र संतुष्ट नहीं होते हैं. इसलिए हर साल आवेदन समीक्षा के लिए प्रस्तुत किया जाता है. स्क्रूटनी के बाद कई अंक बढ़ जाते हैं. इस कारण इस बार मेरिट सूची बदल गयी. इस वर्ष समीक्षा में सर्वाधिक 22 अंक माध्यमिक में बढ़े हैं. वहीं हायर सेकेंडरी में पहली बार ऑनलाइन सीधे पोर्टल पर अंक अपलोड करते समय कुछ परीक्षकों ने गलत अंक चुन लिये. इसमें एक विडम्बना है. पीपीएस और पीपीआर को अतिरिक्त शुल्क के लिए उच्च माध्यमिक में पेश किया गया है. परीक्षार्थियों की संख्या 25-30 अंक बढ़ गयी. इस मूल्यांकन पद्धति पर कई लोगों ने सवाल उठाये हैं.

शिक्षकों का कहना है कि इस वर्ष कई विद्यार्थियों को पहले ही सही अंक मिलते, तो मेरिट के आधार पर बेहतर कॉलेजों में दाखिला मिल जाता. पीपीएस व पीपीआर करवाने के बाद अंक बढ़े हैं. शिक्षक संगठनों की शिकायत है कि बोर्ड में परीक्षा की मूल्यांकन पद्धति में त्रुटि रह गयी है, इसलिए सही अंक छात्रों को नहीं मिल पाये.

क्या कहना है शिक्षा परिषद के अध्यक्ष का

स्कूल शिक्षा विभाग के मुताबिक, परीक्षकों पर दबाव है और सामान्य तौर पर यदि परीक्षक समीक्षा और जांच पर ध्यान नहीं देंगे, तो उम्मीदवारों को अपने अंक बढ़ाने का अवसर नहीं मिलेगा. इसलिए हमें सबसे पहले छात्रों के बारे में सोचना होगा. इस संबंध में मध्य शिक्षा परिषद के अध्यक्ष रामानुज गंगोपाध्याय ने कहा कि बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाने के लिए इस वर्ष परीक्षकों को विषयवार मॉडल आंसर स्क्रिप्ट पहले ही भेज दी गयी. परीक्षकों, संवीक्षकों और मुख्य परीक्षकों को गलत खातों के बारे में चेतावनी दी गयी है. वहीं उच्च माध्यमिक शिक्षा संसद के अध्यक्ष चिरंजीव भट्टाचार्य ने कहा कि गलतियों को सुधारने के लिए हम क्षेत्रीय मुख्य परीक्षकों के साथ एक त्वरित बैठक करेंगे. उनसे पता चलेगा कि इतनी गलतियां क्यों हो रही हैं.

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