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West Bengal : अजय नदी पर बन रहे सेतु से जान जोखिम में डाल कर आवाजाही कर रहे हैं लोग

Updated at : 05 Aug 2024 6:09 PM (IST)
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West Bengal : अजय नदी पर बन रहे सेतु से जान जोखिम में डाल कर आवाजाही कर रहे हैं लोग

West Bengal : स्थायी सेतु को जोड़नेवाली सड़क अभी पूरी नहीं बनी है. इसलिए यह सेतु भी अभी खोला नहीं गया है. इससे दोनों जिलों के लोगों को भारी परेशानी हो रही है.

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पानागढ़, मुकेश तिवारी : पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा ब्लॉक के विदबिहार और बीरभूम जिले के इलमबाजार के जयदेव केंदुली के बीच अजय नदी पर राज्य सरकार की ओर से बनवाये जा रहे स्थायी सेतु पर बांस की सीढ़ी लगा कर दोनों जिले के लोग गुजर रहे हैं. भारी बारिश व बांधों से पानी छोड़े जाने से अजय नदी उफान पर है. अस्थायी सेतु नदी के तेज बहाव में टूट कर बह गया है. ऐसे में सोमवार को दोनों ही जिलों के लोगों को कांकसा के कृष्णपुर में बन रहे स्थायी सेतु पर बांस की सीढ़ी लगा कर आरपार होते हुए देखा गया. बांस की सीढ़ी से सेतु पर ऊपर-नीचे जाना. साइकिल समेत विभिन्न वस्तुओं को रस्सियों के सहारे नीचे उतारा व चढ़ाया जा रहा है.

कांकसा व जयदेव के बीच अजय नदी पर निर्माणधीन सेतु से टंगी है बांस की सीढ़ी

ऐसे ही अनेक लोग एक जिले से दूसरे में आवाजाही कर रहे हैं. इस बाबत पूछने पर दोनों ही जिलों के प्रशासन अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं. कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण अजय के प्रकोप से अस्थायी सेतु टूट कर नदी में बह गया है. अब तक प्रशासन की ओर से नौकासेवा भी शुरू नहीं की गयी है. पश्चिम बर्दवान से बीरभूम का संपर्क बंद कर दिया गया है. दोनों जिलों के लोगों की जिंदगी व जीविका भी ठहर गयी है. ऐसे में दोनों जिलों के लोग बांस की सीढ़ी बना कर निर्माणधीन स्थायी सेतु से जान जोखिम में डाल कर आवाजाही कर रहे हैं.

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सेतु को जोड़नेवाली सड़क अभी पूरी नहीं बनी

चूंकि स्थायी सेतु को जोड़नेवाली सड़क अभी पूरी नहीं बनी है. इसलिए यह सेतु भी अभी खोला नहीं गया है. इससे दोनों जिलों के लोगों को भारी परेशानी हो रही है. इससे बचने के लिए कुछ स्थानीय लोगों ने कृष्णपुर स्थित स्थायी कंक्रीट सेतु पर ऊपर से नीचे व नीचे से ऊपर जाने के लिए बांस की सीढ़ी बना कर टांग दी है. कई लोग उस सीढ़ी से पक्के पुल पर चढ़ रहे हैं. फिर बीरभूम के लिए प्रस्थान कर रहे हैं. बांस की सीढ़ी से उतरते हुए बीरभूम से पश्चिम बर्दवान आ रहे हैं. लेकिन ऐसा करते हुए कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है. बीरभूम के निवासी रामगोपाल दास ने कहा कि वे लोग मजबूरी में ऐसे आवाजाही कर रहे हैं.

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Shinki Singh

लेखक के बारे में

By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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