बंगाल में 2021 जैसी लहर या ‘परिवर्तन’ की आहट? ममता बनर्जी की लोकप्रियता और भाजपा की रणनीति का पूरा विश्लेषण यहां पढ़ें

Published by :Mithilesh Jha
Published at :18 Apr 2026 3:41 PM (IST)
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West Bengal Election 2021 vs 2026 Comparison West Bengal Election 2026 Analysis

West Bengal Election 2021 vs 2026 Comparison: पश्चिम बंगाल चुनाव 2021 बनाम 2026. जानें 5 सालों में कैसे बदला बंगाल का राजनीतिक परिदृश्य. ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच हाई-प्रोफाइल मुकाबला.

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West Bengal Election 2021 vs 2026 Comparison: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बिसात बिछ चुकी है. 2021 के ऐतिहासिक चुनाव में ‘खेला होबे’ का नारा गूंजा था. 2026 की दहलीज पर खड़ा बंगाल उससे काफी अलग नजर आ रहा है. पिछले 5 वर्षों में राज्य की राजनीतिक तस्वीर और मतदाताओं का मिजाज काफी हद तक बदल चुका है. 2021 में ममता बनर्जी ने एकतरफा जीत हासिल की थी. 2026 का यह रण चुनौतीपूर्ण और ‘कांटे की टक्कर’ वाला माना जा रहा है.

2021 का ‘जनादेश’ और 2026 की ‘चुनौती’

2021 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 213 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था. भाजपा 77 सीटों पर सिमट गयी थी. 2026 में परिस्थितियां बदली हुई हैं. इस बार क्या-क्या बदल गया है, यहां पढ़ें.

  • सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency): 15 साल के शासन के बाद टीएमसी को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और ‘आरजी कर’ जैसे संवेदनशील मामलों के कारण उपजे जन-आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है.
  • भाजपा का ग्राफ : भाजपा ने पिछले 5 सालों में अपनी सांगठनिक शक्ति बढ़ायी है. शुभेंदु अधिकारी अब नेता प्रतिपक्ष के रूप में ज्यादा आक्रामक हैं और ‘नंदीग्राम’ की जीत का मनोवैज्ञानिक लाभ उनके साथ है.

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‘ममता फैक्टर’ बनाम ‘शुभेंदु का उदय’

2021 में ममता बनर्जी ‘बंगाल की बेटी’ के रूप में उभरी थीं. 2026 में भी वह 49 प्रतिशत लोगों की पहली पसंद हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता के ग्राफ में गिरावट आयी है. दूसरी ओर, शुभेंदु अधिकारी अब अघोषित रूप से भाजपा के सबसे बड़े ‘चेहरे’ के रूप में स्थापित हो चुके हैं. यह मुकाबला अब सीधे तौर पर ‘दीदी बनाम दादा’ (ममता बनाम शुभेंदु) में बदल गया है.

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West Bengal Election 2021 vs 2026 Comparison: नये ‘गेमचेंजर’ और समीकरण

  • वोटर लिस्ट विवाद (SIR): 2021 में ऐसा कोई मुद्दा नहीं था, लेकिन 2026 में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा ने ‘घुसपैठ’ के मुद्दे को जोर-शोर से उछाला है.
  • त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना : ओवैसी की AIMIM और हुमायूं कबीर की AJUP का गठबंधन मुस्लिम मतों में सेंध लगा सकता है, जो 2021 में पूरी तरह ममता के साथ थे.
  • युवा और आरजी कर का आंदोलन : 2021 में युवा वोटर टीएमसी के साथ थे. इस बार आरजी कर आंदोलन के बाद शिक्षित युवाओं और मध्यम वर्ग में सरकार के प्रति नाराजगी दिख रही है.

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बंगाल का ‘शिफ्ट होता’ चुनावी लैंडस्केप

2021 में भाजपा केवल उत्तर बंगाल और जंगलमहल तक सीमित थी, लेकिन 2026 में वह दक्षिण बंगाल और शहरी इलाकों (जैसे कोलकाता और सॉल्ट लेक) में भी टीएमसी को कड़ी टक्कर दे रही है. भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था इस बार विकास के दावों पर भारी पड़ते दिख रहे हैं.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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