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राजनीतिक बदलाव की जिम्मेदारी वोटरों की, हम सामाजिक परिवर्तन के बारे में सोचते हैं : भागवत

Updated at : 22 Dec 2025 1:20 AM (IST)
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राजनीतिक बदलाव की जिम्मेदारी वोटरों की, हम सामाजिक परिवर्तन के बारे में सोचते हैं : भागवत

अगले वर्ष ही राज्य में विधानसभा चुनाव होना है. उससे पहले महानगर पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने यहां एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के दौरान कई सवालों के भी जवाब दिये.

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संवाददाता, कोलकाता

अगले वर्ष ही राज्य में विधानसभा चुनाव होना है. उससे पहले महानगर पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने यहां एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के दौरान कई सवालों के भी जवाब दिये. राजनीति से लेकर बांग्लादेश के हालात, घुसपैठ, धर्म और सरकार की भूमिका जैसे कई मुद्दों पर अपनी बातें रखीं. बांग्लादेश में हाल की अशांति और उसके असर को लेकर शुभेंदु अधिकारी, काजी मासूम अख्तर और खगेन मुर्मू जैसे लोगों के सवालों के जवाब में मोहन भागवत ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस स्थिति का असर पश्चिम बंगाल पर पड़ रहा है.

श्री भागवत के अनुसार, सीमा खुली रहेगी या नहीं, यह सरकार का फैसला है. अगर सीमा खुली है, तो सरकार को इस बात की भी ज़िम्मेदारी लेनी होगी कि कौन आ रहा है और कैसे आ रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात चिंताजनक है. बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के बारे में संघ प्रमुख ने कहा कि भारत में हिंदू समुदाय को एकजुट रहना चाहिए. साथ ही उनकी राय में न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के हिंदू समुदायों को बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के साथ खड़ा होना चाहिए. भागवत ने सीधे तौर पर यह अनुमान नहीं लगाया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बंगाल का राजनीतिक नक्शा बदल देगा या नहीं. उन्होंने कहा कि राजनीतिक बदलाव लाने की जिम्मेदारी वोटरों की है. वे लोग राजनीति नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव के बारे में सोचते हैं. लोग तय करेंगे कि राज्य में बदलाव होगा या नहीं. उन्होंने कहा कि यह सोच पूरी तरह गलत है कि संघ मुस्लिम विरोधी है. जिन्होंने आरएसएस को करीब से देखा है, वे जानते हैं कि आरएसएस किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है. विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उनका मानना है कि देश के फायदे के लिए सब मिलकर काम कर सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारें आयेंगी और जायेगी, लेकिन धर्म अपनी जगह बना रहेगा.

संघ प्रमुख ने कहा कि दुनिया में आरएसएस जैसा कोई दूसरा संगठन नहीं है. इसकी कोई तुलना नहीं है. इसकी किसी से तुलना नहीं है. कुछ लोग संघ को उसी चश्मे से देखते हैं, जिससे भाजपा को. यह एक बड़ी गलती है. संघ को अगल नज़र से देखना चाहिए. मोहन भागवत ने कहा कि आप संघ को अच्छा मानते हैं या नहीं, यह आपका व्यक्तिगत मामला है, लेकिन किसी नैरेटिव को ध्यान में रखकर संघ को समझने की कोशिश न करें. संघ प्रमुख ने कहा कि आरएसएस को देख कर नहीं, महसूस करके समझना होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH KUMAR SINGH

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