तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में अभया की मां की हुंकार

Published by : BIJAY KUMAR Updated At : 04 Apr 2026 10:15 PM

विज्ञापन

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल में एक महिला चिकित्सक (अभया) से दुष्कर्म और हत्या के 20 महीने बाद अब इस घटना की राजनीतिक गूंज राज्य के चुनावी मैदान में साफ दिखायी दे रही है.

विज्ञापन

बैरकपुर.

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल में एक महिला चिकित्सक (अभया) से दुष्कर्म और हत्या के 20 महीने बाद अब इस घटना की राजनीतिक गूंज राज्य के चुनावी मैदान में साफ दिखायी दे रही है. महानगर से सटे उत्तर 24 परगना के पानीहाटी विधानसभा क्षेत्र से अभया की मां रत्ना देबनाथ के भाजपा से उम्मीदवार बनने के बाद इस क्षेत्र पर आरजी कर कांड का साया मंडरा रहा है. 2011 से लेकर तीन बार जीत कर हैट्रिक लगा चुकी तृणमूल के इस गढ़ में अब पीड़िता की मां की न्याय की पुकार गूंज रही है, जो सत्तारूढ़ दल को चुनावी जंग में चुनौती दे रही है.

पानीहाटी वह सीट बन गयी है, जहां बंगाल के सबसे भावनात्मक मुद्दे की कड़ी राजनीतिक परीक्षा होने जा रही है. भाजपा प्रत्याशी रत्ना देबनाथ का मुकाबला तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और निवर्तमान विधायक निर्मल घोष के बेटे तीर्थंकर घोष से है. वहीं, वाम दल ने कलातन दासगुप्ता को उम्मीदवार बनाया है, जो आरजी कर आंदोलन के विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं. पानीहाटी में अब दांव सिर्फ विधानसभा की एक सीट पर नहीं है, बल्कि इस पर भी है कि कौन-सी पार्टी बंगाल के हाल के सबसे बड़े विरोध आंदोलन और उससे जुड़े आक्रोश, दुख और अनुत्तरित सवालों पर अपना दावा पेश कर सकती है. भाजपा के लिए यह उम्मीदवारी आरजी कर आंदोलन से पैदा हुए आक्रोश व अविश्वास को तृणमूल के खिलाफ वोट में बदलने की कोशिश है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए यह परीक्षा है कि क्या उसका मजबूत संगठनात्मक ढांचा जनाक्रोश की लहर को झेल पायेगा. वहीं, माकपा के लिए पानीहाटी एक मौका है, आरजी कर के उस आंदोलन को फिर से अपने पक्ष में लेने का, जिसे वह मानती है कि भाजपा अब हथियाने की कोशिश कर रही है. माकपा के कार्यकर्ता और छात्र संगठन के सदस्य इस घटना से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख चेहरे रहे हैं.

छह दशकों तक वामपंथ व कांग्रेस के बीच बदलती रही कुर्सी : पानीहाटी कभी वामपंथियों का गढ़ था. 1967 में इस सीट के अस्तित्व में आने के बाद माकपा ने यहां कई बार जीत दर्ज की. केवल दो बार कांग्रेस ने बीच में जीत हासिल की थी. निर्मल घोष ने 1996 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी. बाद में वह तृणमूल में शामिल हो गये. इसके बाद 2006 को छोड़ कर, उन्होंने 2001, 2011, 2016 और 2021 में लगातार इस सीट पर जीत दर्ज की. इस तरह से यहां लगभग छह दशकों तक केवल वामपंथ और कांग्रेस का ही वर्चस्व दिखा.

सुर्खियों में रहा आंदोलन : आरजी कर अस्पताल में महिला प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या ने देशभर में चिकित्सकों, छात्रों व आम नागरिकों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया था. अस्पतालों में हड़तालें हुईं. प्रदर्शनकारियों ने रातभर सड़कों पर डेरा जमाये रखा. कोलकाता से दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन हुए.

क्या कहते हैं प्रत्याशी

अगर मैं लोगों की सेवा कर पाऊं, तो मेरी बेटी भी खुश होगी. मैं चाहती हूं कि राज्य में कमल खिले और तृणमूल का सफाया हो. परिवार इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि केवल राजनीतिक बदलाव से ही न्याय मिल सकता है.

-रत्ना देबनाथ, भाजपा प्रत्याशी

कोई भी राजनीति में आ सकता है. अगर ऐसा कोई हादसा फिर हुआ, तो हम फिर सड़कें जाम करेंगे. रातभर प्रदर्शन करेंगे. हमें विरोध का रास्ता अपनाने से कोई नहीं रोक सकता. हम न्याय की इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे.

-कलातन दासगुप्ता, माकपा प्रत्याशी

तृणमूल पीड़ित परिवार के दुख में साझीदार है. भाजपा आरजी कर की घटना का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है. लेकिन इस सीट पर सत्तारूढ़ पार्टी ही जीत हासिल करेगी.

-तीर्थंकर घोष, तृणमूल प्रत्याशी

विस क्षेत्र पर एक नजर

कुल मतदाता : 1,97,141

अनुसूचित जातियां : पांच प्रतिशत से थोड़ी अधिक

मुस्लिम मतदाता : पांच प्रतिशत से कम

अधिक इनका प्रभाव : हिंदू और निम्न-मध्यम व मध्यम वर्गीय उपनगरीय मतदाताओं का

2024 के लोस चुनाव में किसे कितना वोट मिला

तृणमूल-लगभग 49.6 प्रतिशत

भाजपा-लगभग 34.6 प्रतिशत

2021 के विस चुनाव में किसे कितना वोट मिला

तृणमूल -86,495

भाजपा – 61,318

कांग्रेस- 21,169

विज्ञापन
BIJAY KUMAR

लेखक के बारे में

By BIJAY KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola